जौनपुर में पल्लवी पटेल को रोकने की कोशिश नाकाम, पुलिस को चकमा देकर वाराणसी रवाना ; जिलाध्यक्ष रामचंद्र पटेल नजरबंद
राम कीर्ति यादव की रिपोर्ट
जौनपुर। वाराणसी में प्रस्तावित आंदोलन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में लखनऊ से वाराणसी जा रही सिराथू की विधायक एवं अपना दल (कमेरावादी) की प्रमुख नेताओं में शामिल पल्लवी पटेल को जौनपुर में रोकने का प्रयास किए जाने की चर्चा ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। हालांकि बताया जा रहा है कि वह पुलिस की निगरानी से बचते हुए अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गईं। दूसरी ओर, प्रशासन ने अपना दल (कमेरावादी) के जौनपुर जिलाध्यक्ष रामचंद्र पटेल को उनके आवास पर ही नजरबंद कर दिया, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली।
वाराणसी आंदोलन से पहले प्रशासन की बढ़ी सतर्कता
वाराणसी में आयोजित होने वाले आंदोलन को लेकर प्रशासन पहले से ही सतर्क नजर आ रहा है। विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और छात्रों के आंदोलन में शामिल होने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इसी क्रम में जौनपुर में भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की।
सूत्रों के अनुसार, सिराथू विधायक पल्लवी पटेल लखनऊ से सड़क मार्ग के जरिए वाराणसी जा रही थीं। इस दौरान जौनपुर क्षेत्र में उनकी गतिविधियों पर प्रशासन की नजर बनी हुई थी। बताया जा रहा है कि उन्हें रोकने की कोशिश भी की गई, लेकिन वह पुलिस की रणनीति को विफल करते हुए आगे निकल गईं।
बाइक से निकलने की चर्चा, पुलिस ने किया इनकार
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा रही कि पल्लवी पटेल ने अपनी गाड़ी एक स्थान पर छोड़ दी और उसके बाद बाइक के जरिए आगे का सफर तय किया। इस कारण पुलिस उन्हें ट्रैक नहीं कर सकी और वह वाराणसी के लिए रवाना हो गईं।
हालांकि इस पूरे मामले पर जफराबाद थानाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी ने किसी भी प्रकार की रोकथाम या उन्हें रोकने के प्रयास की बात से साफ इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि ऐसी किसी कार्रवाई की जानकारी उनके पास नहीं है। इसके बावजूद क्षेत्र में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं जारी हैं।
जिलाध्यक्ष रामचंद्र पटेल को घर में किया गया नजरबंद
इधर, प्रशासन ने अपना दल (कमेरावादी) के जौनपुर जिलाध्यक्ष रामचंद्र पटेल को उनके आवास पर ही नजरबंद कर दिया। पार्टी नेताओं का आरोप है कि आंदोलन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी को रोकने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया।
रामचंद्र पटेल के अनुसार, वह पिछले कई दिनों से वाराणसी में प्रस्तावित आंदोलन को सफल बनाने की तैयारियों में जुटे हुए थे। जौनपुर जिले से छात्रों, युवाओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठित कर आंदोलन में शामिल कराने के लिए लगातार संपर्क अभियान चलाया जा रहा था।
प्रेस विज्ञप्ति में जताई नाराजगी
जिलाध्यक्ष रामचंद्र पटेल ने प्रेस को जारी अपने बयान में प्रशासनिक कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं और नेताओं को शांतिपूर्ण आंदोलन में भाग लेने का अधिकार है। इसके बावजूद उन्हें घर से बाहर निकलने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
उन्होंने बताया कि रविवार रात करीब नौ बजे पुलिसकर्मी उनके आवास पर पहुंचे और उन्हें घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी। इसके बाद उन्हें प्रभावी रूप से नजरबंद कर दिया गया। उनका आरोप है कि प्रशासन को आशंका थी कि उनके नेतृत्व में जौनपुर से बड़ी संख्या में युवा और कार्यकर्ता वाराणसी पहुंच सकते हैं, जिसके कारण यह कार्रवाई की गई।
कार्यकर्ताओं में बढ़ी नाराजगी
रामचंद्र पटेल को नजरबंद किए जाने की सूचना मिलते ही पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष फैल गया। कई कार्यकर्ताओं ने इसे राजनीतिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने का प्रयास बताया। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए और शांतिपूर्ण आंदोलन में भाग लेने से किसी को रोका नहीं जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वाराणसी में प्रस्तावित आंदोलन को लेकर प्रशासन किसी भी संभावित भीड़ या कानून-व्यवस्था की स्थिति से बचना चाहता है। इसी कारण विभिन्न जिलों में सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
आंदोलन को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
पल्लवी पटेल के जौनपुर से गुजरने और उन्हें रोकने के प्रयास की चर्चाओं के साथ-साथ रामचंद्र पटेल की नजरबंदी ने जिले में राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और प्रशासन के बीच बयानबाजी तेज होने की संभावना है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही जा रही है, जबकि विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगाने की कार्रवाई बता रहे हैं। वाराणसी में होने वाले आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।








