देवरिया

भाटपार रानी तहसील विवाद : भूमि विवाद के पक्षकार ने तहसीलदार पर दबाव और धमकी का लगाया आरोप, डीएम से जांच व एफआईआर की मांग

देवरिया में भाटपार रानी तहसील विवाद ने पकड़ा तूल, शिकायतकर्ता ने सीसीटीवी जांच की उठाई मांग

इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया जनपद की भाटपार रानी तहसील में भूमि विवाद से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। तहसील क्षेत्र के लखनचक गांव निवासी एक व्यक्ति ने तहसीलदार और तहसील से जुड़े एक निजी कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच तथा प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे अपने मुकदमे से संबंधित मामले में दबाव बनाकर अधिवक्ता बदलने के लिए कहा गया। साथ ही ऐसा न करने पर फर्जी मुकदमों में फंसाने और जेल भेजने की धमकी भी दी गई। हालांकि तहसीलदार ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताया है।

भूमि विवाद से जुड़ा है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लखनचक गांव निवासी उमेश यादव भूमि विवाद से संबंधित एक मुकदमे में पक्षकार हैं। उन्होंने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि तहसील से जुड़े निजी कर्मचारी अभिलाष मिश्रा ने 24 मई को फोन कर उन्हें अगले दिन तहसील आने के लिए कहा था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, निर्धारित तिथि पर तहसील पहुंचने के बाद उन्हें सीधे तहसीलदार के आवास पर ले जाया गया, जहां उनसे उनके वर्तमान अधिवक्ता को बदलने के लिए कहा गया।

अधिवक्ता बदलने का बनाया गया दबाव: शिकायतकर्ता

उमेश यादव का आरोप है कि उनसे कहा गया कि यदि वे अपने वर्तमान अधिवक्ता को बदल लेते हैं तो उनके मुकदमे के निस्तारण में मदद की जा सकती है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने अधिवक्ता बदलने से साफ इनकार कर दिया।

आरोप है कि इसके बाद उनके प्रति दबावपूर्ण रवैया अपनाया गया और उन्हें तथा उनके अधिवक्ता को फर्जी मामलों में फंसाने, डिफॉल्टर घोषित कराने और जेल भिजवाने जैसी धमकियां दी गईं।

सादे कागज पर हस्ताक्षर कराने का भी आरोप

शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिकायतकर्ता पर सादे कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया गया। उमेश यादव का कहना है कि जब उन्होंने ऐसा करने से मना किया तो उन्हें डराया-धमकाया गया और मानसिक दबाव बनाया गया।

उनका दावा है कि इस दौरान वह स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे थे और उन्हें आशंका थी कि उनके साथ किसी प्रकार की अनुचित कार्रवाई की जा सकती है।

कमरे का दरवाजा बंद करने की कोशिश का दावा

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनके अनुसार, विरोध करने पर उन्हें कमरे में रोकने का प्रयास किया गया और दरवाजा बंद करने की कोशिश की गई। हालांकि उन्होंने दावा किया कि वह किसी तरह वहां से निकलने में सफल रहे और बाद में अपने सहयोगियों को पूरी घटना की जानकारी दी।

यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला प्रशासनिक अनियमितता से आगे बढ़कर आपराधिक प्रकृति का भी हो सकता है।

सीसीटीवी फुटेज जांच की मांग

उमेश यादव ने जिलाधिकारी से मांग की है कि तहसील परिसर और तहसीलदार आवास पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को सुरक्षित कर उसकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि संबंधित तिथि और समय की फुटेज की निष्पक्ष जांच से पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकती है।

उन्होंने यह भी मांग की है कि आरोप सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और प्राथमिकी दर्ज कराई जाए।

प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्व न्यायालयों और तहसील स्तर की कार्यवाहियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

ऐसे मामलों में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच न केवल सच्चाई सामने लाने के लिए आवश्यक होती है, बल्कि आम नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

तहसीलदार ने आरोपों को बताया निराधार

दूसरी ओर, भाटपार रानी तहसीलदार अभिजीत प्रताप सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप असत्य, निराधार और तथ्यहीन हैं।

तहसीलदार का कहना है कि उन्होंने किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया और न ही किसी को धमकी दी गई। उन्होंने विश्वास जताया कि निष्पक्ष जांच में वास्तविक तथ्य सामने आ जाएंगे।

जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल यह मामला शिकायतकर्ता और तहसीलदार के परस्पर विरोधी दावों के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है। एक ओर शिकायतकर्ता कार्रवाई और एफआईआर की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर संबंधित अधिकारी आरोपों को पूरी तरह नकार रहे हैं।

अब सभी की निगाहें जिलाधिकारी स्तर पर होने वाली संभावित जांच पर टिकी हैं। यदि प्रशासन सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कराता है तो मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और संबंधित अधिकारी के पक्ष पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जाने वाली जांच के बाद ही हो सकेगी।

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