दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट
सहारनपुर के हकीकत नगर में सिंधावली निवासी सरिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के मायके पक्ष ने उसके पति टिंकू पर मारपीट करने और हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मृतका के भाई नवीन उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा हैं। उनका आरोप है कि उनकी बहन को लंबे समय से घरेलू विवाद और मारपीट का सामना करना पड़ रहा था। नवीन ने यह भी दावा किया कि घटना से कुछ दिन पहले टिंकू कथित तौर पर सर्विस राइफल लेकर सरिता के पीछे दौड़ा था।
परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरिता की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पति पर लगातार मारपीट करने का आरोप
मृतका के भाई नवीन के अनुसार, शादी के बाद सरिता अपने पति टिंकू और दोनों बेटियों के साथ सहारनपुर में किराये के मकान में रह रही थी। आरोप है कि पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था और टिंकू कथित तौर पर सरिता के साथ मारपीट करता था।
नवीन का कहना है कि वर्ष 2025 में भी सरिता ने पति के खिलाफ मेरठ के एडीजी कार्यालय में शिकायत की थी। शिकायत के बाद टिंकू ने सरिता को मनाने का प्रयास किया था। उस समय परिवार ने आपसी समझौते की उम्मीद में मामले को आगे नहीं बढ़ाया और प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई।
मायके पक्ष का कहना है कि इसके बावजूद परिस्थितियों में स्थायी सुधार नहीं हुआ। परिवार के अनुसार, सरिता ने समय-समय पर अपने साथ होने वाले विवाद और कथित मारपीट की जानकारी परिजनों को दी थी।
घटना से चार दिन पहले भी सामने आया था विवाद
नवीन के मुताबिक, सरिता ने घटना से करीब चार दिन पहले फोन करके दोबारा मारपीट की जानकारी दी थी। उसने कथित तौर पर बताया था कि विवाद के दौरान टिंकू सर्विस राइफल लेकर उसके पीछे दौड़ा। इसके बाद उसका मोबाइल फोन भी छीन लिया गया और उसे बंद कर दिया गया।
उस समय नवीन कांवड़ ड्यूटी में तैनात होने के कारण तत्काल अपनी बहन के पास नहीं पहुंच सके। अब सरिता की मौत के बाद उन्होंने पुलिस से पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से जांच करने की मांग की है।
परिवार का कहना है कि यदि पहले की शिकायतों और घटना से कुछ दिन पहले सामने आए विवाद की परिस्थितियों की भी जांच की जाए तो मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
दरोगा भाई ने अवैध संबंधों को लेकर भी लगाया आरोप
नवीन ने अपनी बहन की मौत के पीछे पति के कथित अवैध संबंधों को भी एक संभावित वजह बताया है। उनका आरोप है कि टिंकू के ननिहाल में किसी महिला से संबंध थे और इसी वजह से वह सरिता को रास्ते से हटाना चाहता था।
हालांकि, यह आरोप फिलहाल मृतका के भाई की ओर से लगाया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस को कॉल डिटेल, मोबाइल रिकॉर्ड, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य उपलब्ध तथ्यों की जांच करनी होगी।
ऐसे मामलों में आरोप और प्रमाण के बीच अंतर करना बेहद जरूरी है। इसलिए जांच पूरी होने तक किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
पुलिस परिवार से जुड़ा है सरिता का मायका
ग्रामीणों के अनुसार, सरिता के पिता रामकिशन भी उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा थे। परिवार में पांच बेटे और दो बेटियां हैं। रामकिशन के निधन के बाद उनके बेटे नवीन को मृतक आश्रित कोटे के तहत पुलिस विभाग में नौकरी मिली। वर्तमान में नवीन पुलिस लाइन में तैनात बताए जा रहे हैं।
परिवार की पुलिस पृष्ठभूमि के कारण मामले को लेकर उनकी ओर से की गई शिकायत और लगाए गए आरोपों पर जांच की मांग और महत्वपूर्ण हो गई है। परिजनों का कहना है कि किसी भी दबाव से अलग हटकर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए।
ससुराल पक्ष ने विवाद की जानकारी से किया इनकार
दूसरी ओर, टिंकू के परिवार ने पति-पत्नी के बीच किसी बड़े विवाद की जानकारी होने से इनकार किया है। हस्तिनापुर के पलटूपुरी निवासी परिवार के सदस्य कपिल के अनुसार, टिंकू और सरिता की शादी के बाद उनकी दो बेटियां पीहू और ज्योत्सना हैं। दोनों करीब तीन वर्षों से बेटियों के साथ सहारनपुर में रह रहे थे।
ससुराल पक्ष का कहना है कि उन्हें पति-पत्नी के बीच किसी ऐसे गंभीर विवाद की जानकारी नहीं थी, जिससे इस तरह की घटना की आशंका हो। इस पक्ष के सामने आने के बाद मामले में दोनों परिवारों के बयानों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है।
अब पुलिस जांच के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इन परस्पर विरोधी दावों के बीच वास्तविक घटनाक्रम को साक्ष्यों के आधार पर सामने लाया जाए।
मकान मालिक ने सुनी थी गाली-गलौज की आवाज
घटना के समय मकान मालिक मनीष के बयान को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके मुताबिक, वह मकान की ऊपरी मंजिल पर मौजूद थे। रात करीब 11 बजे उन्हें पटाखा चलने जैसी आवाज सुनाई दी।
घर में बच्चों के होने के कारण उन्होंने शुरुआत में इस आवाज को सामान्य माना और तत्काल नीचे नहीं आए। कुछ समय बाद पड़ोसी का फोन आने पर वह नीचे पहुंचे। वहां सरिता घायल अवस्था में पड़ी मिली।
मनीष ने यह भी बताया कि घटना से पहले घर के भीतर से गाली-गलौज की आवाज सुनाई दे रही थी। उस समय उन्हें लगा कि शायद टिंकू बच्चों को डांट रहा होगा। बाद में जब उन्हें सरिता के घायल होने की जानकारी मिली तो घटना की गंभीरता सामने आई।
मकान मालिक का यह बयान भी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। पुलिस यदि घटना के समय मौजूद लोगों के बयान, आसपास की गतिविधियों और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का मिलान करती है तो घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है।
दो बेटियों के सामने खड़ा हुआ बड़ा सवाल
सरिता की मौत के बाद परिवार की दो बेटियों का भविष्य भी चिंता का विषय बन गया है। वे पिछले करीब तीन वर्षों से अपने माता-पिता के साथ सहारनपुर में रह रही थीं। अब मां की मौत और घटना को लेकर लगाए जा रहे गंभीर आरोपों ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।
मायके पक्ष की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक कारण सामने लाया जाए और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए। वहीं, ससुराल पक्ष अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार कर रहा है।
जांच से सामने आएगा मौत का सच
सरिता की संदिग्ध मौत के मामले में फिलहाल कई सवाल अनुत्तरित हैं। क्या घटना से पहले वास्तव में पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था? क्या पहले की शिकायतों और कथित मारपीट की घटनाओं का इस मौत से कोई संबंध है? सर्विस राइफल को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है? अवैध संबंधों से जुड़ा आरोप महज आशंका है या इसके पीछे कोई ठोस तथ्य मौजूद है? इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
पुलिस के लिए घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मोबाइल फोन से जुड़े रिकॉर्ड और परिवार के दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
फिलहाल सरिता की मौत ने एक परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। मायके पक्ष जहां इसे सामान्य घटना मानने को तैयार नहीं है और गंभीर आरोप लगा रहा है, वहीं ससुराल पक्ष विवाद की जानकारी से इनकार कर रहा है। ऐसे में निष्पक्ष जांच ही वह माध्यम है, जिसके जरिए आरोपों और तथ्यों के बीच अंतर स्पष्ट हो सकेगा तथा सरिता की मौत की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकेंगी।
नोट: इस रिपोर्ट में लगाए गए आरोप संबंधित पक्षों के कथनों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

























