लाल किले से पीएम मोदी का संदेश : दिमागी नक्सल से सावधान, युवाओं को AI स्किल्स से जोड़ने का बड़ा संकल्प

80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से पीएम मोदी का संबोधन और रिपोर्टर सरिता सक्सेना की तस्वीर

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सरिता सक्सेना की रिपोर्ट

नई दिल्ली। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर शनिवार को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए विकास, आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा, महिला भागीदारी और युवाओं की नई भूमिका का व्यापक खाका सामने रखा। करीब 76 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि भारत को अब छोटे लक्ष्यों से आगे बढ़कर बड़े राष्ट्रीय संकल्पों के साथ 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। उनके संबोधन में एक तरफ नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की उपलब्धियों और उससे जुड़े वैचारिक खतरे की चर्चा रही, तो दूसरी ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के दौर में भारतीय युवाओं को तैयार करने की बड़ी घोषणा भी सामने आई।

इस बार लाल किले का समारोह कई मायनों में अलग रहा। स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ। इसके बाद प्रधानमंत्री ने तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान के साथ समारोह आगे बढ़ा। 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ को विशेष महत्व दिया गया है और इसे पहली बार लाल किले की प्राचीर से प्रस्तुत किए जाने की घोषणा पहले ही रक्षा मंत्रालय की ओर से की गई थी।

लाल किले से प्रधानमंत्री का इस वर्ष का संदेश मूल रूप से उस भारत की तस्वीर पेश करता दिखाई दिया, जिसे सरकार 2047 तक विकसित राष्ट्र के रूप में देख रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब देश को अपनी दिशा तय करने के बाद लक्ष्य प्राप्त करने की गति भी तेज करनी होगी। उन्होंने कार्य संस्कृति और सोच में बदलाव को जरूरी बताते हुए कहा कि जो काम पिछले कई दशकों में पूरे नहीं हो सके, उन्हें आने वाले कुछ वर्षों में पूरा करने का संकल्प लेना होगा।

‘हथियारबंद नक्सल चले गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौजूद’

प्रधानमंत्री के संबोधन में नक्सलवाद का मुद्दा सबसे अधिक चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब विकास की नई तस्वीर सामने आ रही है। लेकिन प्रधानमंत्री ने इसके साथ एक वैचारिक चेतावनी भी दी।

उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सल भले ही पीछे चले गए हों, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ अभी भी मौके की तलाश में हैं। प्रधानमंत्री के मुताबिक ऐसे लोग समाज को गलत दिशा में ले जाने के लिए अलग-अलग तरीके तलाशते हैं और युवाओं को हिंसा तथा अराजकता की राह पर ले जाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने ऐसे तत्वों को पहचानने और उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत बताई।

यह टिप्पणी केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रधानमंत्री ने इसे युवाओं और समाज की दिशा से जोड़ दिया। उनका संदेश था कि देश की युवा शक्ति को किसी भी प्रकार की हिंसक या अराजक विचारधारा से बचाते हुए राष्ट्र निर्माण के बड़े अभियान से जोड़ा जाना चाहिए।

2047 का लक्ष्य, लेकिन रफ्तार अभी और तेज करनी होगी

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता की शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को फिर केंद्रीय मुद्दे के रूप में सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारत की दिशा तय हो चुकी है और अब लक्ष्य हासिल करने के लिए काम की गति बढ़ानी होगी।

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प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से वर्क कल्चर और सोच में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके संदेश का सार यह रहा कि देश की विकास यात्रा केवल सरकारी योजनाओं या नीतियों से पूरी नहीं होगी। इसके लिए प्रशासन, उद्योग, किसान, श्रमिक, विद्यार्थी, युवा और आम नागरिक—सभी को अपनी भूमिका निभानी होगी।

उन्होंने बड़े सपने देखने का आह्वान करते हुए कहा कि छोटे सपनों से अब काम नहीं चलेगा। बड़े सपने सोच को विस्तार देते हैं और मजबूत संकल्प कठिन परिस्थितियों के बीच रास्ता निकालने की क्षमता पैदा करते हैं।

यह बात ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ तकनीक, ऊर्जा, विनिर्माण, सेमीकंडक्टर और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। सरकार की हालिया पहलों में AI और उभरती तकनीकों के लिए कौशल विकास पर भी जोर दिया गया है।

एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI स्किल्स

प्रधानमंत्री के भाषण का सबसे बड़ा युवा-केंद्रित ऐलान AI स्किल्स से जुड़ा रहा। उन्होंने घोषणा की कि सरकार अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग देने की दिशा में काम करेगी।

यह घोषणा उस बदलती अर्थव्यवस्था के संदर्भ में अहम है, जहां रोजगार की प्रकृति तेजी से बदल रही है। AI अब केवल तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिंग, विनिर्माण, मीडिया, प्रशासन और कारोबार सहित लगभग हर क्षेत्र में AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

ऐसे में एक करोड़ युवाओं को AI कौशल से जोड़ने का लक्ष्य भारत की युवा आबादी को भविष्य की नौकरियों और उद्यमिता के लिए तैयार करने की बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। सरकार पहले से ही स्कूल विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए AI जागरूकता तथा आधारभूत AI कौशल कार्यक्रम चला रही है।

प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट था कि भारत को केवल AI का उपभोक्ता नहीं, बल्कि AI के क्षेत्र में सक्षम मानव संसाधन और तकनीकी क्षमता वाला देश बनना होगा।

गरीब और मध्यमवर्गीय युवाओं के लिए फ्री ऑनलाइन कोचिंग

युवा वर्ग से जुड़ी दूसरी बड़ी घोषणा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर रही। प्रधानमंत्री ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों के लिए कई परीक्षाओं की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग व्यवस्था शुरू करने की बात कही।

इस घोषणा का महत्व उन परिवारों के लिए अधिक है, जहां महंगी कोचिंग फीस आर्थिक बोझ बन जाती है। ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से तैयारी की सुविधा मिलने से छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।

यदि इस व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री, अनुभवी शिक्षकों, नियमित टेस्ट और तकनीकी सहायता से जोड़ा जाता है, तो यह शिक्षा में अवसर की असमानता कम करने की दिशा में उपयोगी कदम साबित हो सकता है।

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महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों से अपील

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में महिला भागीदारी को भी प्रमुखता दी। उन्होंने देश के सभी राजनीतिक दलों से महिलाओं के सम्मान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर आगे आने की अपील की।

उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में सभी राजनीतिक दल मिलकर आगे बढ़ें।

भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है, लेकिन संसद और विधानसभाओं में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बहस का विषय है। प्रधानमंत्री का लाल किले से इस मुद्दे को उठाना इस बात का संकेत है कि महिला भागीदारी को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत पर जोर

प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की नीति को भी अपने संबोधन के केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रहकर आगे नहीं बढ़ना है। दुनिया में कई वस्तुएं सस्ती और आसानी से उपलब्ध हो सकती हैं, लेकिन हर चीज के लिए आयात पर निर्भरता देश की अपनी क्षमता को कमजोर कर सकती है।

इसलिए उन्होंने उत्पादन, तकनीक और रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।

आत्मनिर्भरता का अर्थ प्रधानमंत्री के संदेश में दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि अपनी जरूरतों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की क्षमता विकसित करना रहा। यह दृष्टिकोण सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, रक्षा उत्पादन और तकनीकी बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सरकार की नीतियों से भी जुड़ता है।

ग्लोबलाइजेशन से आत्मनिर्भरता तक

प्रधानमंत्री ने वैश्वीकरण को लेकर भी अपने पुराने तर्क को दोहराया। उन्होंने कहा कि जब वह आत्मनिर्भरता की बात करते थे, तब कुछ लोग सवाल उठाते थे कि वैश्वीकरण के दौर में यह कैसे संभव होगा।

प्रधानमंत्री के अनुसार, पिछले एक दशक में वैश्विक परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है। उनके संदेश में आत्मनिर्भरता को बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच भारत की रणनीतिक आवश्यकता के रूप में प्रस्तुत किया गया।

आज व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और आपूर्ति शृंखलाओं में दुनिया के देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। ऐसे में भारत के लिए घरेलू विनिर्माण और तकनीकी क्षमता बढ़ाना केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सामर्थ्य से भी जुड़ा विषय है।

आपदाओं के बीच रास्ता निकालने का संदेश

प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं और कठिन परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्प आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कठिनाइयों और आपदाओं के बीच रास्ते निकालने की क्षमता मजबूत संकल्प से पैदा होती है।

यह संदेश ऐसे समय आया जब देश के विभिन्न हिस्से प्राकृतिक आपदाओं, भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की और सहायता का भरोसा दिलाया।

लाल किले के संबोधन का एक अलग रिकॉर्ड

करीब 76 मिनट का इस वर्ष का संबोधन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषणों की अवधि के लिहाज से अपेक्षाकृत छोटा रहा। हालांकि यहां एक तथ्यात्मक सुधार जरूरी है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार 2014 में उनका पहला भाषण करीब 65 मिनट, 2017 का भाषण लगभग 56 मिनट और 2022 का संबोधन करीब 74 मिनट का था। 2025 में उन्होंने 103 मिनट का सबसे लंबा स्वतंत्रता दिवस भाषण दिया था। इसलिए 76 मिनट का 2026 का भाषण तीसरा नहीं, बल्कि पिछले रिकॉर्ड के आधार पर चौथा सबसे छोटा भाषण बनता है।

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इस अवधि की तुलना से यह भी स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री के भाषणों की लंबाई में वर्ष-दर-वर्ष काफी अंतर रहा है। कभी संबोधन एक घंटे से भी कम रहा तो कभी डेढ़ घंटे से अधिक समय तक चला।

समारोह में परंपरा और बदलाव का संगम

80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में परंपरा और नए संदेश का मिश्रण दिखाई दिया। तिरंगा फहराने, राष्ट्रगान और 21 तोपों की सलामी जैसी पारंपरिक औपचारिकताओं के साथ इस बार ‘वंदे मातरम्’ का लाल किले की प्राचीर से पहली बार गायन एक महत्वपूर्ण बदलाव रहा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह में युवाशक्ति को भी विशेष रूप से केंद्र में रखा गया।

यानी समारोह का सांकेतिक संदेश भी प्रधानमंत्री के भाषण की तरह दो स्तरों पर था—एक ओर स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और राष्ट्रीय भावना, दूसरी ओर भविष्य का भारत।

युवाओं पर टिकी विकसित भारत की उम्मीद

प्रधानमंत्री के इस पूरे संबोधन को अगर एक सूत्र में बांधा जाए तो वह है—युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण की शक्ति बनाना।

AI प्रशिक्षण की घोषणा हो, मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की बात हो, हिंसक विचारधाराओं से युवाओं को बचाने का संदेश हो या 2047 के विकसित भारत का लक्ष्य—हर जगह युवा वर्ग केंद्र में दिखाई देता है।

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है, लेकिन यही आबादी तभी राष्ट्रीय संपदा में बदल सकती है जब उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल, रोजगार के अवसर और उद्यमिता के लिए अनुकूल वातावरण मिले। AI प्रशिक्षण और ऑनलाइन शिक्षा संबंधी घोषणाएं इसी चुनौती से निपटने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती हैं।

लाल किले से प्रधानमंत्री का संदेश इसलिए केवल स्वतंत्रता दिवस की औपचारिक शुभकामनाओं तक सीमित नहीं रहा। इसमें सुरक्षा से लेकर अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भरता से लेकर तकनीक और महिला भागीदारी से लेकर युवा शक्ति तक कई मुद्दों को एक साथ जोड़ा गया।

80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने जिस भारत का खाका सामने रखा, उसकी मंजिल 2047 का विकसित भारत है। रास्ते में आत्मनिर्भरता, तकनीकी कौशल, सामाजिक स्थिरता, महिला भागीदारी और युवा शक्ति को प्रमुख आधार बनाया गया है। अब इन घोषणाओं और संकल्पों की वास्तविक कसौटी उनका जमीन पर क्रियान्वयन होगा—क्या एक करोड़ युवाओं तक AI प्रशिक्षण वास्तव में पहुंचता है, क्या गरीब और मध्यमवर्गीय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मुफ्त कोचिंग मिलती है और क्या विकास की गति समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती है।

लाल किले की प्राचीर से दिए गए संबोधन का असली प्रभाव भी इन्हीं सवालों के जवाब में दिखाई देगा। प्रधानमंत्री ने बड़े सपने देखने का आह्वान किया है; अब देश की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि इन बड़े सपनों को जमीन पर उतारने के लिए सरकार और समाज किस गति से आगे बढ़ते हैं।

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Author: यायावर

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