16 अक्टूबर 2026 6:00 अपराह्न

ग्राम पंचायत अधिकारी सोनू यादव का निलंबन बना विरोध की वजह, सचिवों ने उठाई बहाली की मांग

भटनी ब्लॉक परिसर में ग्राम पंचायत अधिकारी सोनू यादव के निलंबन के विरोध में प्रदर्शन करते पंचायत सचिव और जनगणदूत के संवाददाता इरफान अली लारी।

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देवरिया: विकास खंड भटनी के पंचायत सचिवों ने ग्राम पंचायत अधिकारी सोनू यादव के निलंबन के विरोध में काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। सचिवों ने कार्रवाई को अनुचित बताते हुए निष्पक्ष जांच और निलंबन वापस लेने की मांग की। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र विचार नहीं हुआ तो आंदोलन को जिला मुख्यालय तक ले जाया जाएगा।

रिपोर्ट: इरफान अली लारी | जनगणदूत

भटनी ब्लॉक परिसर में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में पंचायत सचिवों और कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि किसी कर्मचारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले मामले के सभी तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए। संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना भी जरूरी है। सचिवों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत अधिकारी सोनू यादव के मामले में इन प्रक्रियाओं का समुचित पालन नहीं किया गया। हालांकि, निलंबन आदेश और जांच से संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

काली पट्टी बांधकर जताया विरोध, बहाली की मांग

विरोध प्रदर्शन के दौरान पंचायत सचिवों ने काली पट्टी बांधकर प्रशासन के फैसले के प्रति अपना असंतोष व्यक्त किया। उनका कहना था कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई तथ्यों, साक्ष्यों और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर होनी चाहिए। यदि किसी घटना में कर्मचारी की जिम्मेदारी निर्धारित की जानी है, तो उसके लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने सोनू यादव का निलंबन वापस लेकर उन्हें बहाल करने की मांग उठाई।

सचिवों के अनुसार, इस कार्रवाई से पंचायत विभाग के कर्मचारियों में असंतोष पैदा हुआ है। उनका मानना है कि जांच पूरी होने और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने प्रशासन से मामले की समीक्षा करने और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने की अपील की।

उधोपुर ग्राम पंचायत में हुई थी दुखद घटना

इस पूरे प्रकरण का संबंध बैतालपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत उधोपुर से बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत गांव की निवासी गीता, पत्नी दीना प्रसाद, के पुत्र के नाम पर व्यक्तिगत शौचालय स्वीकृत हुआ था। शौचालय के निर्माण की प्रक्रिया के दौरान लाभार्थी परिवार ने गड्ढा खोदा था। बताया गया कि हाल में हुई भारी बारिश के कारण इस गड्ढे में पानी भर गया।

इसी पानी से भरे गड्ढे में डूबने से परिवार के चार वर्षीय मासूम पौत्र की मौत हो गई। यह घटना परिवार के लिए गहरा दुख लेकर आई। निर्माण कार्य से जुड़े गड्ढों में बारिश का पानी जमा होने पर छोटे बच्चों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए ऐसी जगहों को सुरक्षित रखना, खुले गड्ढों को ढकना और आसपास बच्चों की पहुंच रोकना बेहद जरूरी है। यह हादसा ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण स्थलों की सुरक्षा और बारिश के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता भी सामने लाता है।

पीड़ित परिवार के कथित लिखित बयान का हवाला

प्रदर्शन कर रहे सचिवों ने दावा किया कि हादसे के बाद पीड़ित परिवार ने प्रशासन को लिखित रूप से बताया था कि इस दुर्घटना में किसी अधिकारी या कर्मचारी की गलती नहीं थी। उनके अनुसार, परिवार ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण हादसा बताया था। सचिवों ने इसी कथित लिखित बयान का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब घटना के संबंध में परिवार का ऐसा पक्ष सामने आया था, तब निलंबन का निर्णय किन तथ्यों के आधार पर लिया गया।

हालांकि, परिवार के लिखित बयान की प्रति, निलंबन आदेश और विभागीय जांच के अभिलेखों का स्वतंत्र परीक्षण किए बिना किसी पक्ष के दावे को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। दुर्घटना की परिस्थितियों, निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था, जिम्मेदारियों के निर्धारण और प्रशासनिक कार्रवाई के आधार को स्पष्ट करने के लिए निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। यही जांच तय कर सकती है कि घटना में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं।

बिना निष्पक्ष जांच कार्रवाई का आरोप

पंचायत सचिवों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत अधिकारी सोनू यादव को निलंबित करने से पहले उनका पक्ष नहीं सुना गया और कार्रवाई जल्दबाजी में की गई। कर्मचारियों का कहना है कि किसी दुर्घटना के बाद जिम्मेदारी निर्धारित करना संवेदनशील विषय है। इसमें घटनास्थल की स्थिति, संबंधित अभिलेख, निर्माण की प्रक्रिया, सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं और संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका का परीक्षण किया जाना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के जरिए प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, यह कर्मचारियों का आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन का पक्ष, निलंबन के कारण और विभागीय जांच की स्थिति सामने आने पर ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे मामलों में किसी कर्मचारी को दोषी या निर्दोष घोषित करने से पहले तथ्यों और आधिकारिक दस्तावेजों का परीक्षण आवश्यक है।

जिला मुख्यालय तक आंदोलन ले जाने की चेतावनी

सचिवों ने प्रशासन से सोनू यादव के निलंबन की समीक्षा कर बहाली का आदेश जारी करने की मांग की। उनका कहना था कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो विरोध प्रदर्शन को जिला स्तर पर विस्तारित किया जाएगा। कर्मचारियों ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करने और आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी।

इस चेतावनी से संकेत मिलता है कि कर्मचारी इस मामले को केवल एक अधिकारी के निलंबन तक सीमित नहीं मान रहे, बल्कि इसे विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा प्रश्न भी बता रहे हैं। अब प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर निगाहें रहेंगी। यदि संबंधित पक्षों की बात सुनकर निष्पक्ष जांच कराई जाती है और उसके निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाते हैं, तो विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ना आसान हो सकता है।

प्रदर्शन में पंचायत विभाग के अधिकारी और कर्मचारी रहे मौजूद

भटनी ब्लॉक परिसर में हुए प्रदर्शन में पंचायत विभाग के सचिवों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान सहायक विकास अधिकारी पंचायत विंध्याचल सिंह के साथ सतीश शाही, सुनील मिश्रा, अजय मिश्रा, जितेंद्र यादव, जनरंजन गौतम, अविनाश पासवान, शुभम गुप्ता, चंदू पासवान और रूपेश यादव सहित अन्य लोग मौजूद रहे। प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने सोनू यादव के समर्थन में आवाज उठाते हुए निलंबन वापस लेने की मांग दोहराई।

निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट होगी जिम्मेदारी

उधोपुर की घटना में चार वर्षीय बच्चे की मौत सबसे दुखद पहलू है। परिवार के नुकसान की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन घटना की परिस्थितियों की जांच और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की रोकथाम जरूरी है। खुले गड्ढों में बारिश का पानी भरने से होने वाले जोखिम को देखते हुए निर्माण स्थलों की सुरक्षा, समय रहते चेतावनी और बच्चों की पहुंच रोकने जैसे उपायों पर ध्यान देना आवश्यक है।

दूसरी ओर, निलंबन के विरोध में उठे सवालों का समाधान भी तथ्यों और निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए। पंचायत सचिवों ने बहाली की मांग रखी है, जबकि प्रशासन की ओर से कार्रवाई के कारणों और जांच की स्थिति का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में निष्पक्ष जांच, सभी संबंधित पक्षों को सुनने और दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेने से ही विवाद का उचित समाधान निकल सकता है। फिलहाल, भटनी के पंचायत सचिवों का विरोध और जिला मुख्यालय तक आंदोलन ले जाने की चेतावनी इस प्रकरण को लेकर बढ़ते तनाव को दर्शाती है।

महत्वपूर्ण सूचना: इस समाचार में निलंबन और विरोध प्रदर्शन से संबंधित आरोपों को संबंधित कर्मचारियों के पक्ष के रूप में प्रस्तुत किया गया है। प्रशासन का आधिकारिक पक्ष और संबंधित दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध होने पर तथ्यों के अनुसार समाचार को अद्यतन किया जा सकता है। किसी भी पक्ष के विरुद्ध अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

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