16 अक्टूबर 2026 5:25 अपराह्न

विदेश में लापता भारतीय की घर वापसी से परिवार ने ली राहत की सांस, सांसद के प्रयास से लौटी खुशियां

जनगणदूत के रिपोर्टर इरफान अली लारी की तस्वीर के साथ रूस से भारत लौटे फिरोज अहमद, परिजनों से मुलाकात और घर वापसी से जुड़ी खबर का रंगीन फीचर कोलाज।

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सलेमपुर में परिजनों से मिले फिरोज अहमद, रूस के मॉस्को में संपर्क टूटने से बढ़ गई थी परिवार की चिंता

रिपोर्ट: इरफान अली लारी

जनगणदूत | देवरिया, उत्तर प्रदेश

देवरिया। विदेश में रोजगार की तलाश में गए किसी व्यक्ति से अचानक संपर्क टूट जाना उसके परिवार के लिए गहरी चिंता का कारण बन जाता है। कई दिनों तक फोन बंद रहने और कोई जानकारी नहीं मिलने पर परिजनों की बेचैनी बढ़ने लगती है। कुछ ऐसी ही स्थिति सलेमपुर क्षेत्र के भठवां धर्मपुर निवासी फिरोज अहमद के परिवार के सामने भी आई। रूस के मॉस्को में रह रहे फिरोज अहमद से जब कई दिनों तक संपर्क नहीं हो सका, तो परिवार के लोग परेशान हो उठे। काफी प्रयासों के बाद भी जब उनकी कोई जानकारी नहीं मिली, तब परिजनों ने जनप्रतिनिधि के माध्यम से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद उनकी सुरक्षित घर वापसी के लिए प्रयास शुरू हुए और आखिरकार फिरोज अहमद अपने घर पहुंच गए।

फिरोज अहमद की वापसी से परिवार में खुशी का माहौल है। लंबे समय तक संपर्क नहीं होने के कारण परेशान रहे परिजनों ने राहत की सांस ली। परिवार के सदस्यों ने इस मामले में सहायता के लिए सलेमपुर के सांसद रमाशंकर राजभर के प्रति आभार व्यक्त किया है।

रूस में अचानक टूट गया था फिरोज अहमद का संपर्क

प्राप्त जानकारी के अनुसार, फिरोज अहमद पुत्र स्वर्गीय जहीरुद्दीन अहमद उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सलेमपुर क्षेत्र स्थित भठवां धर्मपुर गांव के निवासी हैं। वह रोजगार के सिलसिले में रूस गए थे और मॉस्को में रह रहे थे। इसी दौरान उनके परिवार का उनसे संपर्क टूट गया।

फिरोज अहमद की पत्नी और अन्य परिजन कई दिनों से उनसे बात करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिल रहा था। फोन करने पर मोबाइल बंद होने की सूचना मिलती थी। लगातार संपर्क नहीं होने से परिवार के लोगों की चिंता बढ़ती चली गई। विदेश में मौजूद अपने परिजन की स्थिति और कुशलक्षेम की जानकारी नहीं मिलने से घर में बेचैनी का माहौल बन गया।

परिवार के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि उन्हें फिरोज अहमद के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में उन्होंने उनकी तलाश और सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित स्तर पर मदद लेने का निर्णय किया।

सांसद के मीडिया प्रभारी के माध्यम से पहुंचाई गई समस्या

फिरोज अहमद के बड़े भाई सनाउल्लाह और अब्दुल सलाम ने इस समस्या को लेकर सलेमपुर के सांसद रमाशंकर राजभर के मीडिया प्रभारी मंजूर आलम से मुलाकात की। दोनों भाइयों ने उन्हें अपने छोटे भाई के रूस में लापता होने, कई दिनों से संपर्क नहीं हो पाने और परिवार की परेशानी के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

परिजनों ने बताया कि फिरोज अहमद से संपर्क स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी। परिवार को उनकी सुरक्षित वापसी की चिंता सता रही थी। उन्होंने अपने भाई को वापस भारत लाने के लिए सांसद से हस्तक्षेप कराने का आग्रह किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मंजूर आलम ने परिजनों की समस्या सांसद रमाशंकर राजभर तक पहुंचाई। इसके बाद सांसद के स्तर से फिरोज अहमद की जानकारी प्राप्त करने और उनकी देश वापसी के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की पहल की गई।

सांसद ने दूतावास को ई-मेल और पत्र भेजकर की पहल

परिजनों की गुहार के बाद सांसद रमाशंकर राजभर ने रूस में भारतीय दूतावास के माध्यम से मामले को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, फिरोज अहमद की स्थिति का पता लगाने और उनकी सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से दूतावास को ई-मेल तथा पत्र भेजे गए।

विदेश में किसी भारतीय नागरिक से संपर्क टूटने की स्थिति में संबंधित दूतावास तक जानकारी पहुंचाना और आवश्यक सहायता प्राप्त करने का प्रयास करना महत्वपूर्ण होता है। फिरोज अहमद के मामले में भी परिवार की शिकायत को आगे बढ़ाते हुए दूतावास के स्तर पर संपर्क किया गया।

परिवार के सदस्य अपने भाई की वापसी को लेकर लगातार चिंतित थे। ऐसे समय में उन्हें उम्मीद थी कि संबंधित अधिकारियों के सहयोग से फिरोज अहमद के बारे में जानकारी मिल सकेगी और वह अपने घर लौट सकेंगे।

बताया गया है कि इन प्रयासों के बाद फिरोज अहमद की मॉस्को से भारत वापसी हुई। वह दिल्ली पहुंचे और इसके बाद रात में अपने पैतृक गांव भठवां धर्मपुर, सलेमपुर स्थित घर पहुंच गए। हालांकि, उनके लापता होने के वास्तविक कारणों और मॉस्को में संपर्क टूटने की परिस्थितियों के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

दिल्ली से गांव पहुंचे तो परिवार में छाई खुशी

फिरोज अहमद के घर पहुंचने की खबर से उनके परिजनों को बड़ी राहत मिली। कई दिनों से उनकी कुशलक्षेम को लेकर परेशान परिवार के सदस्यों के लिए यह बेहद भावुक क्षण था। अपने बीच फिरोज अहमद को सुरक्षित पाकर परिवार ने राहत महसूस की।

उनके बड़े भाई सनाउल्लाह और अब्दुल सलाम सहित अन्य परिजनों ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सहयोग करने वाले लोगों के प्रति आभार जताया। परिवार की ओर से सांसद रमाशंकर राजभर को विशेष रूप से धन्यवाद दिया गया, जिनके समक्ष उन्होंने अपने छोटे भाई की वापसी का मामला उठाया था।

विदेश में रोजगार के लिए जाने वाले लोगों के परिवारों के सामने कई बार ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, जब लंबे समय तक संपर्क नहीं हो पाने से अनिश्चितता बढ़ जाती है। इस मामले में भी फोन बंद मिलने और कई दिनों तक बात नहीं हो पाने के कारण परिजन परेशान थे। फिरोज अहमद की वापसी ने परिवार को इस चिंता से राहत दिलाई।

भारतीय दूतावास से भी मिली घर वापसी की सूचना

प्राप्त विवरण के अनुसार, मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव (राजनयिक एवं कांसुलर) हरदेश गिरी ने ई-मेल और पत्र के माध्यम से सांसद रमाशंकर राजभर को फिरोज अहमद की घर वापसी की जानकारी दी।

इस सूचना के मिलने के बाद सांसद ने अपने मीडिया प्रभारी मंजूर आलम को अवगत कराया। इसके बाद मंजूर आलम फिरोज अहमद से मिलने पहुंचे। सलेमपुर क्षेत्र में उनकी वापसी की जानकारी सामने आने के बाद परिवार और परिचितों के बीच राहत और खुशी का माहौल रहा।

मंजूर आलम, सांसद के मीडिया प्रभारी, सलेमपुर की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर यह पूरा घटनाक्रम सामने आया है। इसमें बताया गया है कि परिवार की ओर से सहायता मांगे जाने के बाद सांसद ने दूतावास से संपर्क किया और फिरोज अहमद की भारत वापसी के संबंध में प्रयास किए गए।

विदेश में फंसे नागरिकों के मामलों में समय पर सूचना जरूरी

फिरोज अहमद की घर वापसी का यह मामला विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है। विदेश में किसी व्यक्ति से अचानक संपर्क टूटने पर परिवार को यह समझने में कठिनाई हो सकती है कि मदद के लिए किससे संपर्क किया जाए।

ऐसी स्थिति में उपलब्ध जानकारी के साथ संबंधित भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास तक मामला पहुंचाना, आवश्यक दस्तावेज और संपर्क विवरण उपलब्ध कराना तथा परिवार के सदस्यों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बनाए रखना उपयोगी हो सकता है। आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय प्रशासन और संबंधित सरकारी माध्यमों से भी सहायता मांगी जा सकती है।

हालांकि, प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और किसी नागरिक की खोज या वापसी में लगने वाला समय भी अलग-अलग हो सकता है। इसलिए किसी घटना के कारणों अथवा किसी व्यक्ति की स्थिति के बारे में आधिकारिक पुष्टि के बिना निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

फिलहाल फिरोज अहमद की अपने गांव भठवां धर्मपुर, सलेमपुर स्थित घर वापसी से उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। जिन परिजनों के लिए कई दिनों तक उनका बंद फोन चिंता का कारण बना रहा, वे अब उन्हें अपने बीच पाकर खुश हैं। परिवार ने सांसद रमाशंकर राजभर और इस मामले में सहयोग करने वाले लोगों के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया है।

रिपोर्ट: इरफान अली लारी

जनगणदूत | देवरिया, उत्तर प्रदेश

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