16 अक्टूबर 2026 7:08 अपराह्न

एसआईआर पर सरकार से टकराव तेज, राजघाट पहुंचे राहुल-प्रियंका; अब ममता बनर्जी पर नजर

एसआईआर के विरोध में राजघाट पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और इंडिया ब्लॉक के सांसदों के प्रदर्शन की तस्वीर, साथ में राहुल गांधी का क्लोजअप।

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और एसआईआर के विरोध में तीसरे दिन भी प्रदर्शन • ममता बनर्जी शुक्रवार के मार्च में हो सकती हैं शामिल, विपक्षी एकजुटता पर टिकी नजरें

रिपोर्ट: ठाकुर बख्श सिंह

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने गुरुवार को लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्षी गठबंधन के अन्य सांसदों ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया के जरिए मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, विपक्षी सांसदों ने अपने विरोध प्रदर्शन के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मताधिकार की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।

गुरुवार के प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। विपक्षी सांसद पहले कनॉट प्लेस पहुंचे, जहां उन्होंने दोपहर का भोजन किया। इसके बाद वे बसों से राजघाट के लिए रवाना हुए। राजघाट पहुंचने के बाद सांसदों को परिसर में प्रवेश के लिए करीब एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा। अनुमति मिलने पर उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद देर शाम सांसद वहां से वापस लौट गए।

लगातार तीसरे दिन हुए इस विरोध प्रदर्शन ने संकेत दिया कि एसआईआर का मुद्दा विपक्षी दलों के लिए महज एक दिन का राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है। विपक्ष इसे मताधिकार, चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा सवाल बता रहा है। दूसरी ओर, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग ने इस राजनीतिक टकराव को और तीखा कर दिया है।

शुक्रवार को फिर मार्च निकालने की तैयारी, ममता बनर्जी की भागीदारी पर नजर

दिल्ली में गुरुवार के प्रदर्शन के बाद इंडिया ब्लॉक शुक्रवार को एक बार फिर मार्च निकाल सकता है। इस संभावित कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है, क्योंकि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी भी इसमें शामिल हो सकती हैं।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने ममता बनर्जी के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की बात की पुष्टि की। उनके मुताबिक, ममता बनर्जी दिल्ली में मौजूद हैं और शुक्रवार को प्रस्तावित प्रदर्शन में भाग लेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि इंडिया ब्लॉक के वरिष्ठ नेता इस मार्च में शामिल हो सकते हैं।

बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने स्वयं फोन करके ममता बनर्जी को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यदि शुक्रवार को विपक्षी दलों के प्रमुख नेता एक साथ मार्च करते हैं, तो इसे गठबंधन की एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में देखा जा सकता है।

हालांकि, विपक्षी एकता की वास्तविक परीक्षा केवल साझा मंच पर नेताओं की मौजूदगी से नहीं होगी। एसआईआर जैसे मुद्दे पर सभी दलों की साझा रणनीति, चुनावी सुधारों को लेकर उनकी मांगों और आगे के आंदोलन की दिशा से भी यह स्पष्ट होगा कि गठबंधन इस मुद्दे पर कितनी दूर तक एक साथ चल सकता है।

खड़गे ने गांधीजी से की केंद्र सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की अपील

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि विपक्ष महात्मा गांधी से प्रार्थना करेगा कि वे केंद्र सरकार को सद्बुद्धि दें। उन्होंने मतदाताओं के वोट देने के अधिकार की रक्षा पर जोर देते हुए कहा कि लोगों से उनका लोकतांत्रिक अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए।

खड़गे का यह बयान विपक्ष के आंदोलन के राजनीतिक और वैचारिक पक्ष को सामने रखता है। विपक्ष एसआईआर के विरोध को केवल चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि आम नागरिक के मताधिकार से संबंधित मुद्दा बता रहा है।

भारतीय लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता और प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम उसमें शामिल होना चुनाव प्रक्रिया के महत्वपूर्ण आधार हैं। इसी तरह, किसी भी पात्र मतदाता का नाम अनुचित तरीके से सूची से बाहर न हो, यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। इसलिए एसआईआर को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब तथ्यों, पारदर्शी प्रक्रिया और संबंधित नियमों के आधार पर दिया जाना जरूरी है।

विपक्ष की मांग है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर उठने वाली आशंकाओं को गंभीरता से सुना जाए। इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग की ओर से आने वाले स्पष्टीकरण तथा संबंधित तथ्यों की जांच से ही विवाद के विभिन्न पहलुओं को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।

राजघाट रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के करीब 300 सांसद शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है।

राहुल गांधी ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इन लोगों ने एक आपराधिक साजिश के तहत देश को अपने नियंत्रण में ले लिया है। राहुल गांधी ने संविधान को कमजोर करने और जनता के वोट चुराने का भी आरोप लगाया।

ये आरोप कांग्रेस नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि के बिना इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि, राहुल गांधी के बयान से स्पष्ट है कि विपक्ष इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपना राजनीतिक हमला और तेज करने की रणनीति अपना रहा है।

विपक्ष के लिए यह आंदोलन चुनावी प्रक्रिया में भरोसे और मताधिकार की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताओं को सार्वजनिक करने का माध्यम बन गया है। वहीं, इस पूरे विवाद में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों का समाधान किस तरह किया जाता है और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित आशंकाओं पर क्या स्पष्टीकरण सामने आते हैं।

तीन दिनों से जारी प्रदर्शन का बदला स्वरूप

दिल्ली में पिछले तीन दिनों से विपक्षी सांसदों के विरोध प्रदर्शन का सिलसिला जारी है। मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग तक मार्च निकाला था। इसके बाद बुधवार को प्रदर्शन का केंद्र जंतर-मंतर बना। गुरुवार को विपक्षी सांसद राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देकर अपने विरोध को आगे बढ़ाया।

इन प्रदर्शनों में एक समान गतिविधि भी देखने को मिली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे विपक्षी सांसदों को दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित करते हैं। इसके बाद सांसद बसों में सवार होकर विरोध प्रदर्शन के निर्धारित स्थल पर पहुंचते हैं। बुधवार को सांसद जंतर-मंतर गए थे, जबकि गुरुवार को उनका गंतव्य राजघाट रहा।

यह तरीका विपक्षी सांसदों को एक साथ जुटाने और सामूहिक रूप से अपनी बात रखने का अवसर देता है। हालांकि, प्रदर्शन के अलग-अलग स्थलों का चयन अपने आप में आंदोलन की मांगों में बदलाव का संकेत नहीं है। विपक्ष का मुख्य जोर एसआईआर, मतदाता अधिकारों और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर बना हुआ है।

राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रम के जरिए विपक्ष ने अपने आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ने की कोशिश की। गांधीजी की समाधि पर पहुंचना इस विरोध का प्रतीकात्मक पक्ष भी रहा।

विपक्षी एकता की परीक्षा, आगे की रणनीति पर टिकी निगाहें

शुक्रवार को प्रस्तावित मार्च को लेकर राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि इसमें ममता बनर्जी और इंडिया ब्लॉक के अन्य वरिष्ठ नेताओं की संभावित भागीदारी की बात सामने आई है। राहुल गांधी की ओर से ममता बनर्जी को आमंत्रित किए जाने और अभिषेक बनर्जी की पुष्टि के बाद इस कार्यक्रम को लेकर उत्सुकता बढ़ी है।

विपक्षी दलों के सामने अब दोहरी चुनौती है। पहली, एसआईआर को लेकर अपनी आपत्तियों को तथ्यों और ठोस मांगों के साथ सामने रखना। दूसरी, अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं और राज्यों में अपनी स्वतंत्र पहचान रखने वाले दलों के बीच साझा रणनीति बनाए रखना।

यदि शुक्रवार के मार्च में प्रमुख विपक्षी नेता एक साथ दिखाई देते हैं, तो इससे गठबंधन की राजनीतिक एकजुटता का संदेश जा सकता है। लेकिन आंदोलन का प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि विपक्ष अपनी मांगों को किस तरह आगे बढ़ाता है और संबंधित संस्थाओं से जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कौन-से लोकतांत्रिक रास्ते अपनाता है।

फिलहाल, दिल्ली में एसआईआर के विरोध में लगातार तीसरे दिन हुए प्रदर्शन के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। शुक्रवार के संभावित मार्च, ममता बनर्जी की भागीदारी और विपक्षी दलों की आगे की रणनीति पर निगाहें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह विरोध प्रदर्शन व्यापक राजनीतिक अभियान का रूप लेता है या विपक्ष अपनी मांगों को लेकर किसी नए कार्यक्रम की घोषणा करता है।

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