चित्रकूट

ट्रांसफार्मर खराब, अंधेरे में डूबा गांव : बिजली संकट से गोशाला और ग्रामीण बेहाल

कई दिनों से ठप बिजली आपूर्ति से जनजीवन प्रभावित, गोशाला में पानी का संकट गहराया ; ग्रामीणों ने त्वरित समाधान की मांग उठाई

रिपोर्ट: संजय सिंह राणा


बिजली संकट से जूझ रहा गांव, मूलभूत सुविधाओं पर पड़ा व्यापक असर

चित्रकूट जनपद के पहाड़ी विकासखंड अंतर्गत हरदौली गांव इन दिनों गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार गांव का विद्युत ट्रांसफार्मर कई दिनों से खराब पड़ा है, जिससे पूरे गांव की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। लगातार बिजली न मिलने से जहां आम जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं गांव की गोशाला में गोवंशों के लिए पानी की व्यवस्था भी चरमरा गई है। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शीघ्र समाधान की मांग की है।

अंधेरे में बीत रहे दिन और रात

स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद से गांव में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित है। गर्मी और उमस के बीच बिजली न होने से लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। घरों में पेयजल की समस्या बढ़ गई है, मोबाइल फोन चार्ज करना मुश्किल हो गया है और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। रात होते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है, जिससे ग्रामीणों को सुरक्षा संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

गोशाला में पानी का संकट बना चिंता का विषय

बिजली संकट का सबसे अधिक असर गांव की गोशाला पर देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक बिजली न होने से पानी की मोटर नहीं चल पा रही है, जिसके कारण गोवंशों को समय पर पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा। भीषण गर्मी में यह स्थिति पशुओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि गोशाला जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था के लिए वैकल्पिक बिजली या पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं होने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि ट्रांसफार्मर खराब होने की सूचना कई बार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को दी गई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं किया गया। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रांसफार्मर बदलने अथवा मरम्मत के नाम पर धन की मांग की जा रही है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

बिजली बाधित होने से प्रभावित हुई ग्रामीण व्यवस्था

गांवों में बिजली केवल रोशनी का साधन नहीं, बल्कि पेयजल, शिक्षा, कृषि, पशुपालन और छोटे व्यवसायों की जीवनरेखा बन चुकी है। हरदौली में बिजली आपूर्ति ठप होने से इन सभी व्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। किसानों को सिंचाई संबंधी परेशानियां हो रही हैं, दुकानदारों का काम प्रभावित है और लोगों की दैनिक आवश्यकताएं पूरी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

समयबद्ध कार्रवाई की जरूरत

ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत विभाग को ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद यदि कई दिनों तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होती है तो इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों का मानना है कि शिकायतों के निस्तारण के लिए प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले का संज्ञान लेकर विद्युत विभाग को शीघ्र ट्रांसफार्मर बदलने या मरम्मत कराने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

ग्रामीण विकास के लिए मजबूत बिजली व्यवस्था जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त ट्रांसफार्मरों का स्टॉक, नियमित तकनीकी निरीक्षण, त्वरित शिकायत निस्तारण और पारदर्शी कार्यप्रणाली बेहद आवश्यक है। इससे न केवल उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं को भी गति मिलेगी।

हरदौली गांव का बिजली संकट केवल एक तकनीकी खराबी का मामला नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, पेयजल व्यवस्था और पशु कल्याण से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है। कई दिनों से खराब पड़े ट्रांसफार्मर के कारण गांव का जनजीवन प्रभावित है और गोशाला में पानी का संकट भी गहरा गया है। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग और जिला प्रशासन त्वरित कार्रवाई करते हुए बिजली आपूर्ति बहाल कर ग्रामीणों को राहत दिलाएं। साथ ही यदि शिकायतों में दम पाया जाता है तो उनकी निष्पक्ष जांच कर जवाबदेही भी तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं दोबारा उत्पन्न न हों।

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