मकान के लालच में मां ने दो दिन के नवजात का कर दिया सौदा, गुमनाम फोन कॉल से खुली सनसनीखेज साजिश

रिपोर्टर ठाकुर बख्श सिंह की तस्वीर के साथ दो दिन के नवजात के कथित सौदे के मामले पर आधारित फीचर इमेज, जिसमें नवजात, पुलिस जांच, स्वास्थ्य विभाग और मकान का प्रतीकात्मक दृश्य दर्शाया गया है।

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रिपोर्ट: ठाकुर बख्श सिंह

जिस मां की गोद को दुनिया में बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है, जब उसी मां पर अपने ही जिगर के टुकड़े का सौदा करने का आरोप लगे तो यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज को झकझोर देने वाला मामला बन जाता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां महज एक मकान के लालच में दो दिन के नवजात को दूसरी महिला को सौंपने की कथित साजिश रची गई। हालांकि, समय रहते मिली एक गुमनाम सूचना ने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नवजात को सुरक्षित बरामद कर लिया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि बच्चे के जन्म से कई महीने पहले ही पूरी योजना बनाकर कथित तौर पर सौदे की नींव रख दी गई थी। मामले में अब पुलिस के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग भी जांच में जुट गया है।

गुमनाम फोन कॉल से खुली पूरी साजिश

जानकारी के अनुसार, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को एक गुमनाम फोन कॉल के जरिए सूचना मिली कि एक निजी अस्पताल में जन्मे नवजात को अवैध रूप से दूसरी महिला को सौंपने की तैयारी की गई है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई की और जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने नवजात को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके बाद बच्चे की जैविक मां और जिस महिला को बच्चा सौंपा गया था, दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया।

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तीन महीने पहले तय हो गया था पूरा सौदा

पुलिस जांच में सामने आया कि बच्चे के जन्म से लगभग तीन महीने पहले ही दोनों महिलाओं के बीच बातचीत शुरू हो चुकी थी। एक परिचित व्यक्ति के माध्यम से दोनों का संपर्क हुआ और फिर बच्चे को जन्म के बाद दूसरी महिला को सौंपने की सहमति बन गई।

जांच एजेंसियों का कहना है कि कथित तौर पर यह निर्णय पहले से तय था और उसी के अनुरूप आगे की पूरी योजना बनाई गई। इस वजह से पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य संभावित लोगों की भी तलाश कर रही है।

मकान बनवाने के वादे के बदले नवजात देने का आरोप

पूछताछ के दौरान सामने आया कि नवजात की मां पहले से तीन बच्चों की मां है। उसने पुलिस को बताया कि दूसरी महिला की कोई संतान नहीं थी। इसी दौरान दोनों के बीच ऐसी सहमति बनी कि नवजात के बदले उसकी आर्थिक मदद की जाएगी और उसके लिए मकान बनवाया जाएगा।

आरोप है कि इसी समझौते के तहत बच्चे के जन्म के दो दिन बाद नवजात को दूसरी महिला के हवाले कर दिया गया। पुलिस अब इस कथित लेन-देन से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तार से जांच कर रही है।

अस्पताल के रिकॉर्ड ने बढ़ाई जांच की गंभीरता

मामले में सबसे बड़ा सवाल अस्पताल में दर्ज रिकॉर्ड को लेकर खड़ा हुआ है। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि प्रसव के समय अस्पताल में भर्ती कराई गई महिला का नाम वास्तविक पहचान से अलग दर्ज कराया गया था।

बताया जा रहा है कि अस्पताल में भर्ती के समय महिला ने अपना नाम किसी और के नाम से दर्ज कराया था। बाद में दस्तावेजों में अलग नाम मिलने पर रिकॉर्ड में संशोधन किए जाने की बात सामने आई। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पहचान बदलने की प्रक्रिया कैसे हुई और इसमें किसी अस्पताल कर्मी या अन्य व्यक्ति की कोई भूमिका थी या नहीं।

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अस्पताल संचालकों पर दर्ज हुआ मुकदमा

पूरे प्रकरण में अस्पताल प्रशासन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस ने अस्पताल संचालक और संबंधित चिकित्सकों सहित अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी तथा किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि अस्पताल में भर्ती से लेकर नवजात को सौंपे जाने तक सभी प्रक्रियाओं का पालन नियमों के अनुसार किया गया था या नहीं।

अस्पताल प्रशासन ने दी अपनी सफाई

मामले में अस्पताल प्रशासन ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। अस्पताल संचालक का कहना है कि भर्ती के समय महिला ने स्वयं अपना नाम वही बताया था, जो प्रारंभिक रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। बाद में जब दस्तावेजों में अलग नाम सामने आया तो रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार कर दिया गया।

अस्पताल प्रशासन का दावा है कि नवजात उसी महिला को सौंपा गया जिसने अस्पताल में प्रसव कराया था। उनका कहना है कि अस्पताल की ओर से किसी भी प्रकार की जानबूझकर अनियमितता नहीं की गई।

पुलिस हर पहलू की कर रही है जांच

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच बेहद गंभीरता से की जा रही है। संबंधित अस्पताल में हाल के दिनों में हुए सभी प्रसव, नवजातों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं इस तरह की कोई अन्य संदिग्ध घटना तो नहीं हुई।

साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित सौदे में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा आर्थिक लेन-देन किस प्रकार किया गया।

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स्वास्थ्य विभाग भी जांच में करेगा सहयोग

स्वास्थ्य विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि पुलिस जांच में पूरा सहयोग दिया जाएगा। यदि जांच के दौरान अस्पताल की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही, नियमों के उल्लंघन या दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आती है तो विभागीय स्तर पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मानव तस्करी और अवैध गोद लेने पर गंभीर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर नवजातों की सुरक्षा, अवैध गोद लेने की प्रक्रियाओं और मानव तस्करी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बच्चे को कानूनी प्रक्रिया के बिना किसी अन्य व्यक्ति को सौंपना कानून का उल्लंघन है। इसके लिए निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है।

फिलहाल नवजात सुरक्षित है और पूरा मामला पुलिस जांच के अधीन है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित सौदे की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं, इसमें कितने लोग शामिल थे और किसकी भूमिका कितनी गंभीर थी। लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आर्थिक मजबूरियां और लालच यदि रिश्तों से भी बड़ा हो जाएं, तो उसके परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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Author: यायावर

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