कीरत यादव की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के महराजगंज क्षेत्र में विद्युत विभाग की लापरवाही ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। सराय पड़री चौराहे से दुर्गादास मार्ग स्थित अंगराह गांव तक लगभग पूरे मार्ग पर 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन विद्युत लाइन लकड़ी और बांस के अस्थायी खंभों के सहारे संचालित की जा रही है। यह स्थिति न केवल विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि क्षेत्र के हजारों लोगों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में जर्जर व्यवस्था के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। गांव से होकर गुजरने वाले इस मार्ग पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में किसान, छात्र, महिलाएं और अन्य राहगीर आवागमन करते हैं। ऐसे में लकड़ी और बांस की बल्लियों पर टिकी हाईटेंशन लाइन लोगों में लगातार भय का माहौल पैदा कर रही है।
भटपुरा विद्युत उपकेंद्र के सराय पड़री फीडर से होती है आपूर्ति
ग्रामीणों के अनुसार अंगराह गांव को बिजली की आपूर्ति भटपुरा विद्युत उपकेंद्र के सराय पड़री फीडर के माध्यम से की जाती है। इस फीडर से निकली 11 केवी हाईटेंशन लाइन का एक बड़ा हिस्सा संपर्क मार्ग के किनारे सुरक्षित सीमेंट या लोहे के पोलों के बजाय अस्थायी लकड़ी और बांस के सहारों पर टिका हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवस्था लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद विभाग ने स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। समय के साथ लकड़ी और बांस कमजोर होते जा रहे हैं, जिससे लाइन के झुकने या टूटने की आशंका लगातार बनी रहती है।
बरसात में बढ़ जाती है दुर्घटना की आशंका
मानसून के दौरान तेज बारिश और तेज हवा के कारण लकड़ी तथा बांस के खंभों के कमजोर पड़ने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी दिन तेज हवा या बारिश के दौरान ये अस्थायी सहारे टूट गए तो हाईटेंशन तार सड़क या खेतों में गिर सकते हैं।
ऐसी स्थिति में राहगीरों, किसानों, पशुओं और आसपास रहने वाले लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत प्रवाहित तार जमीन पर गिरने की स्थिति में बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता।
राहगीरों और किसानों में बना रहता है भय
अंगराह गांव और आसपास के क्षेत्रों के लोग प्रतिदिन इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। खेतों में काम करने वाले किसान भी हाईटेंशन लाइन के नीचे से होकर गुजरते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जर्जर व्यवस्था को देखकर हर समय मन में किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के स्कूल आने-जाने का रास्ता भी इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो भविष्य में गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
कई बार शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय निवासी निर्भय प्रताप सिंह ने बताया कि इस गंभीर समस्या की जानकारी कई बार विद्युत विभाग के संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है। ग्रामीणों ने मौखिक और लिखित दोनों माध्यमों से शिकायत कर जर्जर व्यवस्था को बदलने की मांग उठाई, लेकिन अब तक विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। इससे लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी भी बढ़ रही है।
नए विद्युत पोल लगाने की उठी मांग
ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से मांग की है कि लकड़ी और बांस के अस्थायी सहारों को तत्काल हटाकर उनकी जगह मजबूत सीमेंट या लोहे के विद्युत पोल लगाए जाएं। साथ ही पूरी हाईटेंशन लाइन का तकनीकी निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराई जाए ताकि विद्युत आपूर्ति सुरक्षित और निर्बाध बनी रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा के मानकों के अनुरूप लाइन का पुनर्निर्माण किया जाना बेहद जरूरी है। इससे न केवल संभावित दुर्घटनाओं पर रोक लगेगी, बल्कि ग्रामीणों को भी सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा।
ग्रामीणों ने जताई बड़ी दुर्घटना की आशंका
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। उनका मानना है कि दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
लोगों ने प्रशासन और विद्युत विभाग से अपील की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल स्थायी समाधान किया जाए, ताकि बरसात के मौसम में किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
सुरक्षित विद्युत व्यवस्था की मांग हुई तेज
अंगराह गांव सहित आसपास के ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की है कि जर्जर लकड़ी और बांस के सहारों पर चल रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन को तत्काल सुरक्षित पोलों पर स्थानांतरित किया जाए। उनका कहना है कि विद्युत आपूर्ति जितनी आवश्यक है, उससे कहीं अधिक जरूरी लोगों के जीवन की सुरक्षा है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी जल्द ही मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे और वर्षों से चली आ रही इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करेंगे।

























