16 अक्टूबर 2026 6:04 अपराह्न

हर गली में जोश, हर घर में सैनिक… यही है इस गांव की असली पहचान

रिपोर्टर ठाकुर बख्श सिंह की तस्वीर के साथ भारतीय सेना के जवानों की सांकेतिक तस्वीर, देशभक्ति और सैन्य परंपरा पर आधारित फीचर इमेज।

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ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में अनेक गांव अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जाने जाते हैं, लेकिन एक ऐसा गांव भी है जिसने देशभक्ति, अनुशासन और सैन्य परंपरा के बल पर पूरे देश में अलग स्थान बनाया है। यहां सेना में भर्ती होना केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही गौरवशाली परंपरा है। यही वजह है कि इस गांव का नाम आते ही लोगों के मन में सबसे पहले भारतीय सेना और वीर जवानों की छवि उभरती है।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में स्थित गहमर को लंबे समय से “फौजियों वाला गांव” कहा जाता है। इसकी पहचान केवल बड़ी आबादी या विशाल क्षेत्रफल तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के हजारों सैनिकों और पूर्व सैनिकों ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने गाजीपुर दौरे के दौरान इस गांव की सैन्य परंपरा का उल्लेख करते हुए इसकी सराहना की, जिसके बाद यह गांव एक बार फिर चर्चा में आ गया।

एशिया के सबसे बड़े गांवों में शुमार

गहमर गांव बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा के निकट स्थित है। लगभग आठ वर्गमील क्षेत्र में फैले इस गांव की आबादी करीब 1.20 लाख बताई जाती है। अपनी विशाल आबादी और भौगोलिक विस्तार के कारण इसे एशिया के सबसे बड़े गांवों में भी गिना जाता है।

गांव की एक और विशेषता यह है कि इसे 22 टोलों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक टोले का नाम किसी ऐतिहासिक या प्रतिष्ठित व्यक्ति से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना भी काफी समृद्ध मानी जाती है।

हर घर में दिखती है सेना की परंपरा

गहमर की सबसे बड़ी पहचान यहां की सैन्य परंपरा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस गांव के 12 हजार से अधिक जवान वर्तमान में भारतीय सेना में विभिन्न पदों पर देश की सेवा कर रहे हैं। इसके अलावा लगभग 15 हजार से अधिक सेवानिवृत्त सैनिक और सैन्य अधिकारी भी इसी गांव में निवास करते हैं।

इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों और पूर्व सैनिकों की मौजूदगी शायद ही किसी अन्य गांव में देखने को मिले। यही वजह है कि यहां का सामाजिक वातावरण भी अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और सेवा भावना से परिपूर्ण दिखाई देता है।

विश्वयुद्ध से लेकर कारगिल तक निभाई अहम भूमिका

गहमर की वीरता का इतिहास कई दशक पुराना है। बताया जाता है कि विश्वयुद्ध के दौरान इस गांव के 228 युवाओं ने सेना में रहकर युद्ध में भाग लिया था। इनमें से 21 वीर जवान देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर वीरगति को प्राप्त हुए।

इसके बाद से गांव में सेना में भर्ती होने की परंपरा और अधिक मजबूत होती चली गई। वर्ष 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध से लेकर कारगिल युद्ध तक इस गांव के सैनिकों ने साहस और पराक्रम का परिचय दिया। देश की सीमाओं की रक्षा में इस गांव के जवानों का योगदान हमेशा उल्लेखनीय रहा है।

युवाओं के जीवन का हिस्सा है सेना की तैयारी

गहमर की सुबह और शाम सामान्य गांवों से अलग दिखाई देती है। सूर्योदय से पहले ही बड़ी संख्या में युवा मैदानों और सड़कों पर दौड़ लगाते हुए नजर आते हैं। शारीरिक अभ्यास, दौड़, व्यायाम और फिटनेस यहां की दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सेना में भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं को गांव के पूर्व सैनिक लगातार मार्गदर्शन देते हैं। वे भर्ती प्रक्रिया, शारीरिक दक्षता और अनुशासन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हैं। यही सामूहिक प्रयास युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ाता है और उन्हें सेना में जाने के लिए प्रेरित करता है।

सेना में चयन पूरे गांव का उत्सव

गहमर की सबसे प्रेरणादायक परंपरा यह है कि जब किसी परिवार का बेटा या बेटी सेना में चयनित होता है तो खुशी केवल उस परिवार तक सीमित नहीं रहती। पूरा गांव इसे अपनी उपलब्धि मानकर उत्सव मनाता है।

इस सामूहिक भावना के कारण युवाओं में देशसेवा का उत्साह लगातार बढ़ता है। छोटे बच्चे भी बचपन से सैनिकों को अपना आदर्श मानते हैं और बड़े होकर भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना देखते हैं।

अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की जीवंत मिसाल

गहमर केवल सैनिकों की संख्या के कारण प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यहां की जीवनशैली भी लोगों को प्रेरित करती है। गांव में अनुशासन, मेहनत, शारीरिक फिटनेस और देशभक्ति को विशेष महत्व दिया जाता है। पूर्व सैनिकों का अनुभव नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बनता है, जिससे सैन्य परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है।

यही कारण है कि वर्षों बीत जाने के बावजूद इस गांव की पहचान कमजोर नहीं हुई, बल्कि समय के साथ और मजबूत होती गई है।

देश के युवाओं के लिए प्रेरणा

आज जब युवा विभिन्न क्षेत्रों में करियर की तलाश कर रहे हैं, ऐसे समय में गहमर यह संदेश देता है कि देशसेवा भी सम्मान, गौरव और आत्मसंतोष का सबसे बड़ा माध्यम हो सकती है। यहां की परंपरा बताती है कि राष्ट्रप्रेम केवल भाषणों का विषय नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार भी बन सकता है।

गहमर की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते हैं। यह गांव इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब किसी समाज में देशभक्ति पीढ़ी-दर-पीढ़ी विरासत बन जाती है, तब वह पूरे देश के लिए प्रेरणा का केंद्र बन जाता है।

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