कालूपुर पाही ग्राम पंचायत में सरकारी संपत्ति को लेकर विवाद गहराया, ग्रामीणों ने जांच और पैमाइश की उठाई मांग
सूरज सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट। ग्राम पंचायत कालूपुर पाही में सरकारी जमीन और सार्वजनिक संपत्ति को लेकर विवाद सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने कुछ लोगों पर सरकारी भूमि पर कथित रूप से कब्जा करने और सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मामला केवल जमीन पर कथित अतिक्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे गांव की सार्वजनिक सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों पर भी असर पड़ सकता है।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में पेयजल व्यवस्था के लिए स्थापित की गई पानी की टंकी को भी कथित रूप से तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दिया गया। पानी की टंकी को नुकसान पहुंचाए जाने की बात सामने आने के बाद ग्रामीणों में पेयजल व्यवस्था को लेकर चिंता और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि गांव में सरकारी संपत्ति का निर्माण सार्वजनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाता है। ऐसी संपत्ति को नुकसान पहुंचने से सीधे तौर पर आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।
वहीं, राज्य मार्ग से जुड़ी सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण किए जाने की बात भी ग्रामीणों की ओर से कही जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर निजी कब्जे की स्थिति बनने से भविष्य में सड़क, आवागमन, विकास कार्यों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार में दिक्कत पैदा हो सकती है।
सरकारी जमीन की स्थिति को लेकर उठे सवाल
कालूपुर पाही ग्राम पंचायत में सरकारी जमीन को लेकर उठे विवाद ने राजस्व और प्रशासनिक स्तर पर भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता को सामने ला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी जमीन का स्वरूप सरकारी या सार्वजनिक उपयोग का है तो उसकी स्पष्ट पैमाइश और सीमांकन कराया जाना जरूरी है, ताकि भविष्य में विवाद की स्थिति न बने।
ग्रामीणों के मुताबिक, जमीन की स्थिति को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चा होती रही है। ऐसे में मौके पर राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि की पहचान, सीमांकन और पैमाइश कराए जाने से स्थिति साफ हो सकती है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को शिकायतों को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार के अतिक्रमण की स्थिति सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यदि किसी आरोप में तथ्य नहीं हैं तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट कर ग्रामीणों को भी जानकारी दी जानी चाहिए।
पानी की टंकी क्षतिग्रस्त होने से पेयजल व्यवस्था पर चिंता
गांव में पेयजल की सुविधा से जुड़ी पानी की टंकी को कथित रूप से क्षतिग्रस्त किए जाने का मामला ग्रामीणों के लिए सबसे अधिक चिंता का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, पानी की टंकी सार्वजनिक जरूरत से जुड़ी संपत्ति है और इसके क्षतिग्रस्त होने का असर गांव की पेयजल व्यवस्था पर पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी और अन्य मौसमों में पेयजल की जरूरत बढ़ जाती है। ऐसे में पानी की टंकी अथवा उससे जुड़ी व्यवस्था को नुकसान पहुंचने से लोगों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पानी की टंकी की मौके पर स्थिति देखी जाए और यह पता लगाया जाए कि उसे किस परिस्थिति में नुकसान पहुंचा।
लोगों का कहना है कि यदि सरकारी पेयजल संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है तो उसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। साथ ही आवश्यकता के अनुसार टंकी की मरम्मत या पुनर्स्थापना कराकर पेयजल व्यवस्था को सुचारु किया जाना चाहिए।
राज्य मार्ग से जुड़ी जमीन को लेकर भी ग्रामीणों में रोष
कालूपुर पाही में सरकारी जमीन के कथित कब्जे को लेकर उठे सवालों में राज्य मार्ग से जुड़ी भूमि का मुद्दा भी शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क से जुड़ी सरकारी जमीन सार्वजनिक व्यवस्था और भविष्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसी भूमि पर कथित अतिक्रमण होने से आवागमन और विकास संबंधी योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
ग्रामीणों के मुताबिक, राज्य मार्ग से जुड़ी भूमि की वास्तविक स्थिति की भी राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच होनी चाहिए। यदि कहीं सीमा को लेकर भ्रम है तो मौके पर पैमाइश और सीमांकन कराया जाना चाहिए। इससे न केवल वर्तमान विवाद का समाधान हो सकता है, बल्कि भविष्य में सरकारी भूमि को लेकर होने वाले विवादों को भी रोका जा सकेगा।
कई बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि कालूपुर पाही सरकारी जमीन विवाद को लेकर ग्राम प्रधान सहित संबंधित अधिकारियों को पहले भी शिकायतें दी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर मौके की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
ग्रामीणों के अनुसार, शिकायतों पर समय रहते जांच हो जाती तो विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता था। अब लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर भूमि और सरकारी संपत्तियों का निरीक्षण करें। इसके बाद राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
लोगों का कहना है कि सरकारी जमीन किसी व्यक्ति विशेष की निजी संपत्ति नहीं होती। इसका उपयोग सार्वजनिक हित और निर्धारित सरकारी कार्यों के लिए किया जाता है। इसलिए सरकारी भूमि से जुड़े किसी भी विवाद को गंभीरता से लेते हुए नियमों के अनुसार समाधान किया जाना जरूरी है।
स्थलीय निरीक्षण और पैमाइश की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से सरकारी जमीन की जांच और पैमाइश कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मौके पर राजस्व विभाग की टीम भेजकर भूमि का सीमांकन कराया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि कौन-सी जमीन सरकारी है तथा उसका वर्तमान में किस प्रकार उपयोग हो रहा है।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने पानी की टंकी को हुए नुकसान की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पेयजल से जुड़ी सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना प्रशासन और स्थानीय व्यवस्था की जिम्मेदारी है। यदि टंकी क्षतिग्रस्त है तो उसकी तकनीकी जांच कराकर जल्द मरम्मत कराई जानी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना न करना पड़े।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जांच के दौरान संबंधित राजस्व अभिलेख, ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान किया जाए। इससे सरकारी जमीन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकेगी और विवाद के समाधान का रास्ता निकलेगा।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
कालूपुर पाही में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे और पानी की टंकी को क्षति पहुंचाए जाने के आरोपों के बीच अब ग्रामीण प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति आधिकारिक जांच और स्थलीय निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मामला सरकारी जमीन, सार्वजनिक संपत्ति और पेयजल व्यवस्था से जुड़ा होने के कारण ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच करे। भूमि की पैमाइश, सरकारी संपत्ति की स्थिति का निरीक्षण और शिकायतों के आधार पर तथ्य जुटाए जाने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि वास्तव में कहीं अतिक्रमण या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की स्थिति बनी है या नहीं।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन यदि समय रहते कार्रवाई करता है तो न केवल मौजूदा विवाद का समाधान हो सकता है, बल्कि भविष्य में सरकारी जमीन और सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर होने वाले विवादों पर भी रोक लगाई जा सकती है। अब निगाहें संबंधित अधिकारियों की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।













