अपडेट के नाम पर गैस उपभोक्ताओं से अवैध वसूली का आरोप, सिलेंडर लेने पहुंचे लोगों ने उठाए सवाल
उपभोक्ताओं का दावा—‘पैसे दो तभी मिलेगा सिलेंडर’, जांच की मांग तेज
चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
गोण्डा। जिले के कर्नलगंज तहसील क्षेत्र स्थित सकरौरा इंडेन गैस एजेंसी एक बार फिर उपभोक्ताओं की शिकायतों को लेकर चर्चा में है। गैस उपभोक्ताओं ने एजेंसी पर कनेक्शन अपडेट करने के नाम पर अवैध वसूली करने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीण क्षेत्रों से गैस सिलेंडर लेने पहुंचने वाले लोगों का कहना है कि उनसे निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त धनराशि जमा कराई जा रही है और इसके संबंध में स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी जाती।
मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में उपभोक्ताओं के बीच असंतोष बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि महंगाई के दौर में पहले से ही घरेलू खर्चों का बोझ बढ़ा हुआ है, ऐसे में गैस एजेंसी पर अतिरिक्त धनराशि वसूलना आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
ग्रामीण महिलाओं ने लगाए गंभीर आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम जतौरा के रन्नी गांव से गैस सिलेंडर लेने पहुंचीं कई महिलाओं ने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उपभोक्ता सीमा, पार्वती, रत्ना सहित अन्य महिलाओं ने आरोप लगाया कि एजेंसी पर आने वाले अधिकांश उपभोक्ताओं से कनेक्शन अपडेट कराने के नाम पर पैसे लिए जाते हैं।
महिलाओं का कहना है कि जब वे इस अतिरिक्त शुल्क के बारे में जानकारी मांगती हैं तो उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता। एजेंसी कर्मचारियों द्वारा केवल इतना कहा जाता है कि “अपडेट कराना जरूरी है, अन्यथा गैस सिलेंडर नहीं मिलेगा।”
उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई लोगों को यह भी नहीं बताया जाता कि आखिर किस प्रकार का अपडेट किया जा रहा है और इसके लिए धनराशि क्यों ली जा रही है। इससे लोगों में भ्रम और नाराजगी दोनों बढ़ रही हैं।
गैस सिलेंडर वितरण प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा गैस वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए समय-समय पर अनेक दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। आधार लिंकिंग, मोबाइल नंबर अपडेट, ई-केवाईसी और अन्य तकनीकी प्रक्रियाएं भी उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए लागू की गई हैं।
लेकिन यदि किसी प्रकार की प्रक्रिया के नाम पर उपभोक्ताओं से अनिवार्य रूप से धनराशि ली जा रही है और उसके बदले उचित जानकारी नहीं दी जा रही, तो यह व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
क्षेत्र के कई लोगों ने मांग की है कि गैस एजेंसी पर लगाए जा रहे शुल्कों की सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा या भ्रम का सामना न करना पड़े।
महंगाई के दौर में अतिरिक्त बोझ
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अधिकांश उपभोक्ता सीमित आय वर्ग से जुड़े हैं। लगातार बढ़ती महंगाई, रसोई गैस की कीमतों और घरेलू खर्चों के बीच अतिरिक्त भुगतान की शिकायतें लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि किसी सरकारी या कंपनी स्तर की प्रक्रिया के लिए शुल्क निर्धारित है तो उसकी जानकारी लिखित रूप में उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही यदि कोई अतिरिक्त उत्पाद या सेवा दी जा रही है तो उसकी भी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। लोगों का आरोप है कि बिना पर्याप्त जानकारी दिए धनराशि लेना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है।
प्रशासनिक जांच की मांग
मामला सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों ने संबंधित विभाग से जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में कंपनी द्वारा कोई विशेष अपडेट अभियान चलाया जा रहा है तो उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
इसके अलावा यदि एजेंसी स्तर पर नियमों के विपरीत किसी प्रकार की धन उगाही की जा रही है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में उपभोक्ताओं का शोषण न हो सके।
सप्लाई इंस्पेक्टर ने दिया जांच का आश्वासन
मामले को लेकर जब कर्नलगंज के सप्लाई इंस्पेक्टर अनुज कुमार पांडेय से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि गैस कंपनी की ओर से उपभोक्ता अपडेट से संबंधित प्रक्रिया संचालित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि कंपनी कुछ आवश्यक सामग्री या सुविधा उपलब्ध कराने के साथ यह प्रक्रिया करवा रही है। यदि किसी गैस एजेंसी द्वारा उपभोक्ताओं से अतिरिक्त धनराशि ली गई है और उसके बदले कोई सामान या निर्धारित सुविधा नहीं दी गई है, तो मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सप्लाई इंस्पेक्टर के इस बयान के बाद अब उपभोक्ताओं को जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
उपभोक्ता हितों की रक्षा जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक सेवा से जुड़े संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है। गैस एजेंसियां सीधे लाखों परिवारों की दैनिक जरूरतों से जुड़ी होती हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को प्रत्येक शुल्क, सेवा और प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं होगा, बल्कि उपभोक्ता विश्वास को प्रभावित करने वाला विषय भी साबित हो सकता है।
अब देखना होगा कि विभागीय जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और संबंधित एजेंसी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल क्षेत्र के उपभोक्ता निष्पक्ष जांच और पारदर्शी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।







