विरहिणी नायिका
-
समीक्षा
‘का करूँ सजनी, आए न बालम’ : विरह-शृंगार की अमर अभिव्यक्ति और भारतीय साहित्य की संवेदनात्मक परंपरा
यह साहित्यिक विवेचना लेखक अनिल अनूप द्वारा एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रम में प्रस्तुत विचारों की भावात्मक पुनर्संरचना है। इसमें…
Read More »