गोंडा

एक लाख की रिश्वत लेते नगर पालिका का कर्मचारी गिरफ्तार, एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथों दबोचा

शिकायत मिलने के बाद बिछाया गया जाल, नगर कोतवाली में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू

चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

गोंडा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर पालिका परिषद में नजूल अमीन के पद पर तैनात एक कर्मचारी को कथित तौर पर एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद नगर पालिका परिसर सहित प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। आरोपी को हिरासत में लेकर नगर कोतवाली लाया गया, जहां उससे पूछताछ के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई।

शिकायत के आधार पर रची गई पूरी रणनीति

बताया गया कि शिकायतकर्ता ने एंटी करप्शन टीम को लिखित रूप से जानकारी दी थी कि नगर पालिका में लंबित एक आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने के बदले संबंधित अधिकारी लगातार रिश्वत की मांग कर रहा है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बिना पैसे दिए सरकारी अभिलेखों में आवश्यक संशोधन नहीं किया जा रहा था, जिससे मकान की मरम्मत का कार्य भी रुका हुआ था।

शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने पूरे मामले का प्राथमिक सत्यापन किया। आरोपों की पुष्टि होने के बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप बिछाया और आरोपी को रिश्वत की रकम स्वीकार करते समय रंगे हाथों पकड़ लिया।

एक लाख रुपये लेते ही दबोचा गया आरोपी

एंटी करप्शन टीम ने यह कार्रवाई वीर अब्दुल हमीद चौराहे के निकट स्थित एक मकान के भूतल पर की। जैसे ही आरोपी ने शिकायतकर्ता से एक लाख रुपये की रिश्वत ली, पहले से मौजूद टीम ने तत्काल उसे हिरासत में ले लिया। पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई ताकि आरोपी को किसी प्रकार की भनक न लग सके।

गिरफ्तारी के बाद टीम आरोपी को सीधे नगर कोतवाली लेकर पहुंची, जहां उससे पूछताछ की गई और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं।

किस काम के लिए मांगी जा रही थी रिश्वत

जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता अपने शोरूम और मकान से संबंधित अभिलेखों में आवश्यक दुरुस्तीकरण कराना चाहता था। इसके लिए नगर पालिका के रजिस्टर-45 में प्रविष्टियों का संशोधन आवश्यक था। आरोप है कि संबंधित कर्मचारी इस कार्य को पूरा करने और मरम्मत कार्य शुरू कराने के बदले लगातार एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग कर रहा था।

काफी समय तक मांग जारी रहने के बाद शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने के बजाय एंटी करप्शन संगठन से संपर्क किया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी लिखित रूप में उपलब्ध कराई। इसके बाद कार्रवाई की योजना बनाई गई।

एंटी करप्शन टीम ने दिखाई सक्रियता

शिकायत मिलने के बाद देवीपाटन मंडल की एंटी करप्शन टीम ने पूरे मामले की निगरानी शुरू की। टीम ने शिकायतकर्ता के साथ समन्वय स्थापित कर तय समय और स्थान पर जाल बिछाया। जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

पूरे अभियान का नेतृत्व एंटी करप्शन टीम के इंस्पेक्टर धनंजय कुमार सिंह ने किया। कार्रवाई के दौरान टीम के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे, जिन्होंने सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया।

नगर पालिका में लंबे समय से तैनात था आरोपी

गिरफ्तार कर्मचारी की पहचान गुरुचरण पांडेय के रूप में हुई है। वह नगर पालिका परिषद में नजूल अमीन के पद पर कार्यरत था और लंबे समय से विभाग में अपनी सेवाएं दे रहा था। बताया जा रहा है कि आरोपी मूल रूप से ग्राम माझा तरहर, पोस्ट मधईपुर, थाना कोतवाली देहात क्षेत्र का निवासी है।

गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं उसके खिलाफ पहले भी इस प्रकार की शिकायतें तो नहीं मिली थीं।

क्या होता है रजिस्टर-45 और क्यों है महत्वपूर्ण

नगर पालिका में रजिस्टर-45 एक महत्वपूर्ण अभिलेख माना जाता है। इसका उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि संबंधित भूमि की स्थिति क्या है और उस पर निर्माण अथवा मरम्मत की अनुमति दी जा सकती है या नहीं।

यदि कोई व्यक्ति अपने भवन की मरम्मत कराना चाहता है और उसकी भूमि नजूल श्रेणी में आती है, तो पहले यह देखा जाता है कि संबंधित भूमि विधिवत उसके नाम दर्ज है या नहीं। दाखिल-खारिज और स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड सही पाए जाने पर ही मरम्मत अथवा अन्य निर्माण संबंधी अनुमति जारी की जाती है।

यदि अभिलेखों में किसी प्रकार की त्रुटि होती है, तो पहले उसका दुरुस्तीकरण किया जाता है। इसी प्रक्रिया को पूरा कराने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप सामने आया, जिसके बाद एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई की।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश

इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन की सख्त नीति के रूप में देखा जा रहा है। सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं, लेकिन रंगे हाथों गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई यह संदेश देती है कि शिकायत मिलने पर जांच एजेंसियां तत्काल सक्रिय होकर कार्रवाई कर सकती हैं।

प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा किसी कार्य के बदले अवैध धन की मांग की जाती है, तो इसकी सूचना संबंधित एंटी करप्शन एजेंसी को दें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाती है।

जांच आगे भी जारी

फिलहाल एंटी करप्शन टीम पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रही है। जांच के दौरान आरोपी से पूछताछ के अलावा उससे जुड़े दस्तावेजों और अन्य तथ्यों की भी पड़ताल की जाएगी। यदि जांच में अतिरिक्त तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी कार्यों के बदले रिश्वत मांगने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कानून का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है और भ्रष्टाचार के मामलों में एजेंसियां अब पहले की तुलना में अधिक सक्रिय नजर आ रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button