हिंदी साहित्य
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समीक्षा
‘का करूँ सजनी, आए न बालम’ : विरह-शृंगार की अमर अभिव्यक्ति और भारतीय साहित्य की संवेदनात्मक परंपरा
यह साहित्यिक विवेचना लेखक अनिल अनूप द्वारा एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रम में प्रस्तुत विचारों की भावात्मक पुनर्संरचना है। इसमें…
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गुस्ताख दिल
दर्द में राहत, स्मृतियों का सहारा और समय का ध्रुव सत्य
(यह कोई कहानी नहीं है। यह कोई उपदेश भी नहीं है। यह किसी दर्शनशास्त्री का व्याख्यान या किसी मनोवैज्ञानिक का…
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शख्शियत
बशीर बद्र : मुहब्बत, इंसानियत और उम्मीद का वह शायर जिसकी ग़ज़लें कभी बूढ़ी नहीं होतीं
विवेक शुक्ला उर्दू शायरी की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल शायर नहीं रहते, बल्कि एक दौर,…
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शख्शियत
संघर्ष ने गढ़ी सोच, शिक्षा ने दिलाया सम्मान ; लेखनी ने जगाई चेतना, यही है केवल कृष्ण पनगोत्रा की पहचान
अनिल अनूप की प्रस्तुति भारत की लोकतांत्रिक और बौद्धिक परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि यहां विचारों…
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विचार
शब्दों के महल में रहने वाला सबसे गरीब आदमी ; आखिर लेखक और साहित्यकार आर्थिक विपन्न क्यों रहता है?
-अनिल अनूप सभ्यता का इतिहास उठाकर देखिए। जिस समाज ने अपने कवियों, लेखकों और साहित्यकारों को सबसे अधिक सम्मान दिया,…
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शख्शियत
शब्दों में संवेदना, विचारों में गहराई और जीवन में संघर्ष का नाम : वल्लभ लखेश्री
हिमांशु मोदी की रिपोर्ट भारत जैसे विशाल और विविधताओं से भरे देश में लाखों लोग हर दिन संघर्ष करते हैं।…
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संपादकीय
शब्दों के आईने में समाज, संस्कार और सियासत : बदलते भारत की एक जीवंत शाब्दिक यात्रा
-अनिल अनूप समाज कभी एक जगह खड़ा नहीं रहता। वह हर दिन बदलता है, हर पीढ़ी के साथ अपना रंग…
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आजमगढ़
📚 आज़मगढ़ में साहित्यिक उत्सव: 10 मई को होगा चर्चित पुस्तक का लोकार्पण
रिपोर्ट: शामी एम इरफ़ान, मुंबई। उत्तर प्रदेश का सांस्कृतिक शहर आज़मगढ़ एक बार फिर साहित्यिक हलचल का केंद्र बनने जा…
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गोंडा
“चमरौटी” से “चौपाल” तक गूंजत: गरीबन की पीर और “अदम” की ग़ज़ल
🎤चुन्नीलाल प्रधान की खास रिपोर्ट समाज का वास्तविक आधार केवल कानून, संस्थाएँ और विकास योजनाएँ नहीं होते, बल्कि वह सूक्ष्म…
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बदतमीजी दिल की
“राजा रंगबाज़ हमरा लाज लागे” : भोजपुरी लोकभावना में प्रेम, संकोच और आकर्षण की अनकही कथा
🖊️ अनिल अनूप भोजपुरी लोकसंगीत की परंपरा में एक छोटी-सी पंक्ति भी भावनाओं, संस्कृति और सामाजिक मनोविज्ञान का विराट संसार…
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