विशेष किशोर पुलिस इकाई की मासिक समीक्षा बैठक, बाल विवाह और बाल श्रम मुक्त जनपद बनाने पर दिया गया जोर
बच्चों के हितों की सुरक्षा के लिए सभी विभागों के समन्वय पर विशेष बल
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया पुलिस लाइन स्थित प्रेक्षागृह में सोमवार को विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू) की जून माह की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य जनपद में बच्चों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत बनाना तथा बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई को बढ़ावा देना रहा। बैठक में जिला स्तर पर कार्यरत विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं सभी थानों पर नामित बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों ने सहभागिता की।
बैठक की अध्यक्षता जिला परिवीक्षा अधिकारी आदीश मिश्रा ने की, जबकि संचालन जिला बाल संरक्षण इकाई के संरक्षण अधिकारी जय प्रकाश तिवारी ने किया। बैठक में बच्चों के संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुनर्वास तथा सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे तक पहुंचाने के लिए समन्वित प्रयासों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को दिए गए महत्वपूर्ण निर्देश
जिला परिवीक्षा अधिकारी आदीश मिश्रा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रत्येक सदस्य एवं बाल कल्याण पुलिस अधिकारी को किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों का पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन संवेदनशीलता के साथ करे और बैठकों में निर्धारित एजेंडा के अनुरूप समय पर प्रतिभाग सुनिश्चित करे।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से बच्चों से जुड़े मामलों का त्वरित और प्रभावी समाधान संभव होगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे बाल संरक्षण से संबंधित प्रत्येक मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए बच्चों के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दें।
बाल विवाह और बाल श्रम मुक्त देवरिया बनाने की रणनीति पर चर्चा
बैठक के दौरान संरक्षण अधिकारी जय प्रकाश तिवारी ने एजेंडावार समीक्षा करते हुए कहा कि देवरिया को बाल विवाह मुक्त और बाल श्रम मुक्त जनपद बनाने के लिए सभी विभागों को संयुक्त रूप से कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज और प्रशासन के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिन बच्चों का संपर्क किसी भी विभाग या संस्था के माध्यम से प्रशासन से होता है, उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण तथा सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना सुनिश्चित किया जाए। इससे बच्चों का समग्र विकास संभव होगा और उनका भविष्य सुरक्षित बन सकेगा।
किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों का पालन अनिवार्य
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि बच्चों से जुड़े किसी भी मामले में किशोर न्याय अधिनियम (जेजे एक्ट) के प्रावधानों का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिए। अधिकारियों को बताया गया कि यदि कोई बच्चा किसी भी बाल संरक्षण स्टेकहोल्डर के संपर्क में आता है तो यात्रा अवधि को छोड़कर 24 घंटे के भीतर उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाना कानूनी रूप से आवश्यक है।
अधिकारियों से कहा गया कि बच्चों के संबंध में कोई भी निर्णय लेते समय उनके अधिकारों, सुरक्षा और भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
बाल कल्याण समिति ने योजनाओं से जोड़ने पर दिया जोर
बैठक में बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सावित्री राय ने सभी बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों से अपील की कि वे नियमित रूप से बैठक में एजेंडा के अनुसार भाग लें। उन्होंने कहा कि इससे जरूरतमंद बच्चों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण से जुड़े प्रत्येक अधिकारी की सक्रिय भूमिका बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है और प्रशासनिक समन्वय से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
श्रम विभाग, वन स्टॉप सेंटर और चाइल्ड हेल्पलाइन ने साझा की जानकारी
श्रम प्रवर्तन अधिकारी दिनेश कुमार ने बैठक में श्रम विभाग द्वारा संचालित योजनाओं तथा बाल श्रम उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे अभियानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल श्रम की रोकथाम के लिए पुलिस एवं अन्य विभागों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रबंधक नीतू भारती ने बालिकाओं एवं महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न सुविधाओं और सहायता सेवाओं की जानकारी देते हुए कहा कि पीड़ित बालिकाओं से जुड़े मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाना चाहिए ताकि उन्हें समय पर संरक्षण एवं सहायता मिल सके।
वहीं प्रभारी चाइल्ड हेल्पलाइन अमित कुमार उपाध्याय ने पुलिस थानों से प्राप्त होने वाले मामलों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों से बेहतर समन्वय और त्वरित सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की।
विधिक सेवा प्राधिकरण और एएचटीयू ने भी दिए महत्वपूर्ण सुझाव
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के चीफ लीगल डिफेंस काउंसिल दीपक कुमार तिवारी ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सभी संबंधित विभागों को संवेदनशील होकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कानूनी सहायता एवं न्यायिक प्रक्रिया को बच्चों के हित में प्रभावी बनाने पर बल दिया।
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) के प्रभारी सुरेश वर्मा ने विशेष किशोर पुलिस इकाई एवं एएचटीयू की कार्यप्रणाली, जिम्मेदारियों तथा किशोर न्याय अधिनियम के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मानव तस्करी, बाल शोषण और अन्य अपराधों की रोकथाम के लिए सतर्कता और समन्वित कार्रवाई बेहद जरूरी है।
विभिन्न विभागों के अधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में राजकीय बाल गृह (बालक) के प्रभारी अधीक्षक रामकृपाल, एएचटीयू के उप निरीक्षक सदन यादव, वन स्टॉप सेंटर की मनोवैज्ञानिक मीनू जायसवाल, मुख्य आरक्षी संतपाल राजभर, आरक्षी आकाश सिंह कुशवाहा सहित एएचटीयू के अन्य अधिकारी एवं जनपद के सभी थानों पर नामित बाल कल्याण पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में सभी अधिकारियों ने यह संकल्प लिया कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा, बाल विवाह एवं बाल श्रम उन्मूलन तथा किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समन्वित एवं संवेदनशील तरीके से कार्य किया जाएगा। अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों से देवरिया को बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक आदर्श जनपद बनाया जा सकता है।








