भारतीय साहित्य
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समीक्षा
‘का करूँ सजनी, आए न बालम’ : विरह-शृंगार की अमर अभिव्यक्ति और भारतीय साहित्य की संवेदनात्मक परंपरा
यह साहित्यिक विवेचना लेखक अनिल अनूप द्वारा एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रम में प्रस्तुत विचारों की भावात्मक पुनर्संरचना है। इसमें…
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विचार
शब्दों के महल में रहने वाला सबसे गरीब आदमी ; आखिर लेखक और साहित्यकार आर्थिक विपन्न क्यों रहता है?
-अनिल अनूप सभ्यता का इतिहास उठाकर देखिए। जिस समाज ने अपने कवियों, लेखकों और साहित्यकारों को सबसे अधिक सम्मान दिया,…
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