रनिंग टेस्ट में मिली हार बनी जीत की सीढ़ी, किसान की बेटी ने सब इंस्पेक्टर बनकर रचा नया इतिहास
हरदोई। कहते हैं कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जो ठोकर लगने के बाद भी रास्ता नहीं बदलते। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की रहने वाली 23 वर्षीय अंजली ने इसी कहावत को सच साबित किया है। किसान परिवार की इस होनहार बेटी ने उत्तर प्रदेश पुलिस सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल कर न केवल अपने माता-पिता का सपना पूरा किया, बल्कि पूरे जिले का नाम भी गौरवान्वित किया है। उनकी सफलता आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो एक असफलता के बाद अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं।
साधारण किसान परिवार से निकलकर हासिल की बड़ी सफलता
सुरसा थाना क्षेत्र के खुटेहना गांव की रहने वाली अंजली का परिवार पूरी तरह खेती-किसानी पर निर्भर है। उनके पिता राम मूर्ति मेहनती किसान हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। परिवार में दो भाई और दो बहनें हैं। चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के कारण अंजली पर बचपन से ही जिम्मेदारियों का बोझ रहा, लेकिन उन्होंने कभी परिस्थितियों को अपनी पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया।
परिवार की आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा। कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने अपने सपने को साकार करने का संकल्प नहीं छोड़ा।
पहली असफलता से नहीं टूटा आत्मविश्वास
अंजली बताती हैं कि वर्ष 2024 में उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में भी भाग लिया था। लिखित परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद वह रनिंग टेस्ट तक पहुंचीं, लेकिन शारीरिक दक्षता परीक्षा में सफल नहीं हो सकीं। यह उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था।
हालांकि उन्होंने इस असफलता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। निराश होने के बजाय उन्होंने अपनी कमियों का विश्लेषण किया, शारीरिक फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पहले से अधिक मेहनत और अनुशासन के साथ शुरू कर दी।
यही सकारात्मक सोच उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित उत्तर प्रदेश पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में सफलता तक ले गई।
कोचिंग और नियमित अभ्यास ने बदली किस्मत
बेहतर तैयारी के लिए अंजली हरदोई शहर के आवास विकास क्षेत्र में रहकर एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ नियमित शारीरिक अभ्यास, समय प्रबंधन और मॉक टेस्ट पर विशेष ध्यान दिया।
उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल किताबें पढ़ना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि निरंतर अभ्यास, अनुशासन और मानसिक मजबूती भी सफलता के लिए उतनी ही जरूरी होती है।
शैक्षिक सफर भी रहा शानदार
अंजली की पढ़ाई शुरू से ही उत्कृष्ट रही है। उन्होंने वर्ष 2018 में सुरसा स्थित दयानंद इंटर कॉलेज से हाईस्कूल परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद वर्ष 2020 में इसी संस्थान से इंटरमीडिएट की परीक्षा अच्छे अंकों के साथ पास की।
उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने हरदोई शहर के आर कन्या डिग्री कॉलेज से स्नातक (बीए) की पढ़ाई पूरी की। स्नातक के दौरान ही उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी और अपने लक्ष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर रहीं।
सफलता का श्रेय परिवार और शिक्षकों को
अपनी सफलता पर अंजली बेहद भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि का सबसे बड़ा श्रेय उनके माता-पिता, परिवार और शिक्षकों को जाता है। परिवार ने हर परिस्थिति में उनका मनोबल बढ़ाया, जबकि शिक्षकों ने सही दिशा और मार्गदर्शन देकर उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने में मदद की।
अंजली का कहना है कि यदि परिवार का सहयोग और स्वयं पर विश्वास बना रहे तो कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं होता।
युवाओं को दिया सफलता का मूल मंत्र
अपनी सफलता के अनुभव साझा करते हुए अंजली ने युवाओं से कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। स्पष्ट लक्ष्य, नियमित अध्ययन, अनुशासन और लगातार मेहनत ही सफलता की असली कुंजी है।
उन्होंने कहा कि यदि पहली बार सफलता नहीं मिले तो निराश होने के बजाय अपनी गलतियों को सुधारना चाहिए। हर असफल प्रयास भविष्य की सफलता की मजबूत नींव बन सकता है।
गांव में खुशी का माहौल
अंजली के सब इंस्पेक्टर बनने की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने उन्हें बधाई दी। गांव के लोगों का कहना है कि अंजली ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं होती। यदि मेहनत और लगन हो तो ग्रामीण परिवेश से भी राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की जा सकती है।
बेटियों के लिए बनी नई प्रेरणा
अंजली की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए एक मजबूत संदेश भी है। उन्होंने दिखा दिया कि सीमित संसाधन, आर्थिक चुनौतियां और शुरुआती असफलताएं किसी भी सपने को रोक नहीं सकतीं।
आज उनकी कहानी उन अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। अंजली ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ निश्चय, आत्मविश्वास और लगातार मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस देती रहेगी।








