मौसम

3 दिन मौसम मचाएगा तबाही! आंधी, बारिश और ओलों का डबल अटैक, केरल में मॉनसून की दस्तक के साथ बदला मौसम का मिजाज

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

LUCKNOW। देशभर में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को राहत तो मिली है, लेकिन इसके साथ ही आंधी, तूफान, भारी बारिश और ओलावृष्टि ने नई परेशानियां भी खड़ी कर दी हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले तीन दिनों तक देश के कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। इसी बीच दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने आखिरकार केरल में दस्तक दे दी है, जिसके बाद देश के मौसम में बड़े बदलाव की शुरुआत हो चुकी है।

गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में तेज आंधी और झमाझम बारिश देखने को मिली। कई जगह पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई। मौसम विभाग का कहना है कि 5 जून से लेकर अगले तीन दिनों तक मौसम का यही रुख बना रह सकता है।

19 राज्यों में बारिश और तूफान का अलर्ट

भारतीय मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए देश के 19 राज्यों में तेज आंधी, बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। कई क्षेत्रों में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। अलर्ट वाले राज्यों में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और असम शामिल हैं।

मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में बिजली गिरने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।

दिल्ली-एनसीआर में जारी रहेगा बारिश का दौर

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में गुरुवार को हुई बारिश ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया। तापमान में करीब 19 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई।

5 और 6 जून को भी दिल्ली-एनसीआर में बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ बारिश होने और 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने कुछ स्थानों पर तेज बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की है। दिल्ली का अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

उत्तर प्रदेश में 38 जिलों पर मौसम का खतरा

उत्तर प्रदेश में मौसम विभाग ने 38 जिलों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। राज्य के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।

ऑरेंज अलर्ट वाले जिले

बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर, जौनपुर, गाजीपुर, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।

येलो अलर्ट वाले जिले

आजमगढ़, मऊ, बलिया, कानपुर नगर, कानपुर देहात, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मथुरा, हाथरस, एटा, मैनपुरी, औरैया और बिजनौर सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान है। लखनऊ, मेरठ, बरेली, बदायूं, रामपुर और सीतापुर जैसे शहरों में भी मौसम का असर देखने को मिल सकता है।

बिहार और झारखंड में ओलावृष्टि की संभावना

बिहार और झारखंड में मौसम विभाग ने तेज बारिश के साथ ओले गिरने की चेतावनी दी है। कई जिलों में बिजली गिरने का भी खतरा बना हुआ है। रांची, जामताड़ा, दुमका, साहिबगंज, धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, पलामू और सरायकेला क्षेत्रों में तेज बारिश हो सकती है। इन इलाकों में हवा की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।

मध्य प्रदेश में अगले पांच दिन खराब रहेगा मौसम

मध्य प्रदेश में भी मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में अगले पांच दिनों तक बारिश, आंधी और ओलावृष्टि की संभावना बनी रहेगी।

भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और सागर संभाग के कई जिलों में तेज हवाएं चल सकती हैं। बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

उत्तराखंड और हिमाचल में भी अलर्ट

पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी मौसम विभाग ने बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड के हरिद्वार, देहरादून, ऋषिकेश, नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।

वहीं हिमाचल प्रदेश के शिमला, मंडी, चंबा, कांगड़ा, सोलन, लाहौल और स्पीति जिलों में तेज बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका को देखते हुए पर्यटकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

केरल पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मॉनसून

देशभर के लिए राहत भरी खबर यह है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने आखिरकार केरल में दस्तक दे दी है। भारतीय मौसम विभाग ने इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी है। मौसम विभाग के महानिदेशक एम. महापात्र के अनुसार इस वर्ष मॉनसून सामान्य तिथि से लगभग तीन दिन की देरी से केरल पहुंचा है। सामान्य तौर पर मॉनसून 1 जून के आसपास केरल पहुंच जाता है, जबकि इस बार इसकी औपचारिक एंट्री 4 जून को दर्ज की गई। पिछले वर्ष मॉनसून 24 मई को ही केरल पहुंच गया था और 29 जून तक पूरे देश को कवर कर चुका था।

उत्तर भारत तक पहुंचने में लगेगा लगभग एक महीना

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मॉनसून अभी केरल तट पर पहुंचा है। इसके बाद यह धीरे-धीरे कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य भारत और फिर उत्तर भारत की ओर बढ़ेगा।

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश तक मॉनसून पहुंचने में लगभग तीन से चार सप्ताह का समय लग सकता है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमी गतिविधियों के कारण उत्तर भारत में फिलहाल बारिश का दौर जारी रहेगा।

इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान

भारतीय मौसम विभाग ने जून से सितंबर तक चलने वाले दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के लिए अनुमान जारी करते हुए कहा है कि देश के अधिकांश हिस्सों में औसत से कम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष वर्षा का स्तर दीर्घकालिक औसत (LPA) के लगभग 90 प्रतिशत के आसपास रह सकता है। इसकी प्रमुख वजह प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो (El Nino) स्थिति को माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो के प्रभाव से भारत में वर्षा की मात्रा घट सकती है, जिसका सीधा असर कृषि और खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ेगा।

किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मॉनसून?

भारत की बड़ी आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है और देश की खेती का एक बड़ा हिस्सा मानसूनी बारिश पर आधारित है। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, दालें और अन्य खरीफ फसलों की बुआई मॉनसून की समय पर और पर्याप्त बारिश पर निर्भर करती है। यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है तो खाद्यान्न उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

आखिर क्या होता है मॉनसून?

सामान्य बारिश और मॉनसून में अंतर होता है। केरल में पहले से प्री-मॉनसून वर्षा चल रही थी, लेकिन मॉनसून घोषित करने के लिए मौसम विभाग कुछ विशेष मानकों को देखता है।

जब केरल के अधिकांश मौसम केंद्रों में लगातार दो दिनों तक कम से कम 2.5 मिलीमीटर या उससे अधिक वर्षा दर्ज होती है, साथ ही हवाओं की दिशा और बादलों की स्थिति निर्धारित मानकों को पूरा करती है, तब मॉनसून की आधिकारिक घोषणा की जाती है।

भारत में औसतन कितनी होती है मानसूनी बारिश?

भारत में जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी वर्षा का दीर्घकालिक औसत लगभग 87 सेंटीमीटर माना जाता है। इस वर्ष देश में करीब 80 सेंटीमीटर तक वर्षा होने का अनुमान है। हालांकि पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है, जबकि देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रह सकती है।

मौसम विभाग की सलाह

  • खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर न जाएं।
  • बिजली चमकने के समय पेड़ों के नीचे खड़े न हों।
  • किसानों को फसल और कृषि उपकरण सुरक्षित स्थान पर रखने चाहिए।
  • यात्रा करने से पहले स्थानीय मौसम अपडेट अवश्य देखें।
  • प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।

देशभर में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज आने वाले दिनों में और भी प्रभाव दिखा सकता है। ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

सवाल-जवाब

देश में कितने राज्यों में बारिश और तूफान का अलर्ट है?

मौसम विभाग ने 19 राज्यों में आंधी, बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है।

उत्तर प्रदेश के कितने जिलों में मौसम चेतावनी जारी है?

उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में मौसम विभाग ने आंधी, बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है।

मॉनसून उत्तर भारत कब तक पहुंचेगा?

मॉनसून को उत्तर भारत तक पहुंचने में लगभग तीन से चार सप्ताह का समय लग सकता है।

क्या इस साल सामान्य से कम बारिश हो सकती है?

मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई गई है।

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