प्रेम, धर्मांतरण और निकाह का विवाद: जिम ट्रेनर पर युवक को इस्लाम कबूल कराने का आरोप, 10 लोगों पर FIR
कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के शामली जिले में प्रेम संबंध, कथित धर्मांतरण और निकाह को लेकर एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय दवा कारोबारी और केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष देवराज मलिक के इकलौते बेटे आयुष मलिक से जुड़ा यह प्रकरण अब कानूनी और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। मामले में जिम ट्रेनर चांदनी कुरैशी, उसके पिता समेत कुल 10 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि आयुष मलिक को प्रेम संबंध के माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया गया और बाद में उसका निकाह करा दिया गया। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जिम में हुई मुलाकात, फिर बढ़ी नजदीकियां
जानकारी के अनुसार करीब पांच वर्ष पहले आयुष मलिक ने शामली स्थित एक जिम जॉइन किया था। इसी जिम में चांदनी कुरैशी ट्रेनर के रूप में कार्यरत थीं। बताया जाता है कि प्रशिक्षण के दौरान दोनों के बीच परिचय हुआ, जो समय के साथ दोस्ती और फिर कथित प्रेम संबंध में बदल गया।
परिजनों का आरोप है कि इसी संबंध के दौरान आयुष पर धीरे-धीरे धार्मिक प्रभाव डाला गया। उनका दावा है कि कुछ वर्षों बाद आयुष ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया और उसका नाम बदलकर रहमान रखा गया। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
आयुष के पिता देवराज मलिक ने पुलिस को दी गई तहरीर में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके बेटे को मानसिक रूप से प्रभावित किया गया और कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रेम संबंध के नाम पर आर्थिक शोषण और रंगदारी जैसी गतिविधियां भी चलती रहीं।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आयुष के धर्म परिवर्तन और निकाह से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए। परिवार का आरोप है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान बेटे को परिवार से दूर किया गया और उस पर लगातार मानसिक दबाव बनाया जाता रहा। देवराज मलिक का कहना है कि उनका परिवार लंबे समय से हिंदू परंपराओं का पालन करता रहा है और वे इस पूरे घटनाक्रम से बेहद आहत हैं। उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
छह महीने में बदला व्यवहार
परिवार के अनुसार पिछले लगभग छह महीनों के दौरान आयुष के रहन-सहन और व्यवहार में उल्लेखनीय बदलाव दिखाई देने लगे थे। आरोप है कि उन्होंने दाढ़ी बढ़ा ली, धार्मिक पहनावा अपनाना शुरू किया और मस्जिद में नियमित रूप से जाने लगे।
सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर कुछ तस्वीरें भी चर्चा का विषय बनीं, जिनमें आयुष धार्मिक गतिविधियों में शामिल दिखाई दे रहे हैं। हालांकि पुलिस इन तस्वीरों और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है ताकि घटनाक्रम की वास्तविकता को समझा जा सके।
वीडियो के बाद बढ़ा विवाद
मामले को व्यापक चर्चा तब मिली जब मुजफ्फरनगर स्थित योग साधना आश्रम के महंत स्वामी यशवीर ने एक वीडियो जारी कर इस पूरे प्रकरण को सार्वजनिक किया। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि युवक को प्रेम संबंध के माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया गया।
वीडियो सामने आने के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों ने मामले में हस्तक्षेप किया और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। इसके बाद स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन और धरने की चर्चाएं भी शुरू हो गईं। बढ़ते दबाव के बीच परिवार ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
किन लोगों पर दर्ज हुई FIR
पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में चांदनी कुरैशी, उसके पिता इस्लाम कुरैशी, भाई आस मोहम्मद तथा परिवार के अन्य सदस्यों के नाम शामिल किए गए हैं। इसके अलावा कुछ मौलवियों को भी आरोपी बनाया गया है।
एफआईआर में कुल 10 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने चांदनी कुरैशी और उसके पिता को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी या दोष तय करने से पहले सभी उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा।
एंटी कन्वर्जन कानून के तहत जांच
उत्तर प्रदेश में लागू धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत यह मामला विशेष महत्व का माना जा रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2021 में अवैध धर्म परिवर्तन रोकने के लिए सख्त कानून लागू किया था। इस कानून के तहत यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन जबरन, धोखे, प्रलोभन या विवाह के उद्देश्य से कराया जाता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान है। दोष सिद्ध होने पर लंबी अवधि की सजा भी हो सकती है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले में मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, सोशल मीडिया गतिविधियां, कथित निकाहनामा और अन्य डिजिटल दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
समाज और राजनीति में चर्चा
यह मामला सामने आने के बाद शामली और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक समूहों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ संगठनों ने इसे सुनियोजित धर्मांतरण का मामला बताया है, जबकि अन्य लोगों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने का इंतजार किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी इस विषय को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में भावनाओं और तथ्यों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है, ताकि जांच प्रभावित न हो और कानून अपना काम निष्पक्ष रूप से कर सके।
पुलिस क्या कह रही है?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला संवेदनशील है और हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच के दौरान सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाएगा। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह की अटकलों से बचना चाहिए।
शामली का यह मामला प्रेम संबंध, धर्म, परिवार और कानून से जुड़े कई सवालों को एक साथ सामने लाता है। फिलहाल आरोप और प्रत्यारोपों का दौर जारी है, लेकिन अंतिम सच्चाई पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी पक्ष को दोषी या निर्दोष घोषित करना उचित नहीं होगा। हालांकि इस मामले ने एक बार फिर यह बहस जरूर छेड़ दी है कि व्यक्तिगत संबंधों, धार्मिक स्वतंत्रता और पारिवारिक चिंताओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।







