सामाजिक विश्लेषण
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अपराध
जानलेवा बन रहा है इश्क ? कुछ चर्चित मामलों के बीच रिश्तों में बढ़ती हिंसा की भयावह तस्वीर
राजा रघुवंशी, सौरभ राजपूत और केतन अग्रवाल जैसे प्रमुख मामलों ने एक बार फिर से राजशाही में बढ़ते अपराध और…
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संपादकीय
बदबख्त नशा और बाअदब नशेड़ी
“बदबख्त नशा और बाअदब नशेड़ी” संपादकीय शराब के नशे से उत्पन्न भ्रम, झूठे आत्मविश्वास और उसके सामाजिक दुष्परिणामों का गहन…
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विचार
शब्दों के महल में रहने वाला सबसे गरीब आदमी ; आखिर लेखक और साहित्यकार आर्थिक विपन्न क्यों रहता है?
-अनिल अनूप सभ्यता का इतिहास उठाकर देखिए। जिस समाज ने अपने कवियों, लेखकों और साहित्यकारों को सबसे अधिक सम्मान दिया,…
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विचार
औकात….? इंसान की हैसियत का सच, समाज का छल और आत्मसम्मान की अंतिम लड़ाई
✍️अनिल अनूप एक शब्द बहुत आसानी से लोगों के जंहा पर चढ़ जाता है – “औकात”। किसी को सपने में…
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संपादकीय
“पायल उतार दऽ… आवाज करऽता!” : रिश्तों, राजनीति और समाज के शोर का सच
अनिल अनूप ✍️ भोजपुरी लोकसंगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि वह भारतीय ग्रामीण जीवन की संवेदनाओं, संघर्षों, रिश्तों…
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बदतमीजी दिल की
घणी बातां, गहरा सच : “फलौदी” की फुसफुसाती गलियों में “गुस्ताख दिल” का सफर
✍ अनिल अनूप के साथ बल्लभ लखेश्री रेत की लकीरों में लिखी अधूरी सभ्यता : जयपुर से फलौदी तक गुस्ताख…
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