उन्नाव

रिश्तों का खौफनाक अंत : जिस बेटे को पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी ने कर दी निर्मम हत्या

शादी टूटने की नाराजगी, संपत्ति विवाद और पारिवारिक तनाव ने ली एक जान

रिपोर्ट: ठाकुर बख्श सिंह

उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है जिसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। जिस पिता ने अपने बेटे को पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी बेटे ने कथित तौर पर उनकी निर्मम हत्या कर दी। मृतक भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता और मंडल अध्यक्ष थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पारिवारिक विवाद, संपत्ति को लेकर लंबे समय से चल रहा तनाव और वैवाहिक जीवन में आई टूटन ने इस रिश्ते को इतनी गहरी खाई में धकेल दिया कि उसका अंत खून-खराबे में हुआ।

पुलिस ने आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया है। उसने वारदात के बाद स्वयं थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। मामले की जांच जारी है और पुलिस हत्या के सभी पहलुओं को गंभीरता से खंगाल रही है।

शनिवार की नियमित पूजा बनी आखिरी यात्रा

जानकारी के अनुसार, औरास क्षेत्र के उटरा डकौली गांव के मजरा चमारन खेड़ निवासी 58 वर्षीय प्रमोद रावत उर्फ रेवती खेती-किसानी के साथ भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते थे। गांव से कुछ दूरी पर स्थित अपने बाग में उन्होंने एक शनि मंदिर का निर्माण कराया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, हर शनिवार शाम वह नियमित रूप से मंदिर जाकर दीपक जलाते और पूजा-अर्चना करते थे।

शनिवार की रात भी वह अपनी इसी दिनचर्या के तहत मंदिर पहुंचे थे। लेकिन इस बार मंदिर परिसर में उनका बड़ा बेटा पहले से मौजूद था। पुलिस के अनुसार, जैसे ही प्रमोद रावत पूजा की तैयारी के लिए झुके, आरोपी ने कुल्हाड़ी से उन पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गर्दन, चेहरे और जबड़े पर किए गए कई वार इतने गंभीर थे कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

हत्या के पीछे वर्षों से पनप रहा था पारिवारिक तनाव

प्रारंभिक जांच और परिजनों के बयानों से यह संकेत मिले हैं कि पिता-पुत्र के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि आरोपी सोनेलाल की शादी लगभग दो दशक पहले हुई थी और उसके दो बच्चे भी हैं।

करीब सात वर्ष पहले पारिवारिक विवादों के कारण उसकी पत्नी बच्चों सहित मायके चली गई थी। दोनों परिवारों की ओर से कई बार समझौते के प्रयास हुए, लेकिन रिश्ते सामान्य नहीं हो सके। लगभग छह महीने पहले दोनों का वैवाहिक संबंध कानूनी रूप से समाप्त हो गया।

परिवार का कहना है कि पत्नी से अलगाव के बाद सोनेलाल मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगा था। वह अपनी शादी टूटने के लिए अपने माता-पिता को जिम्मेदार मानता था और इसी बात को लेकर उसके मन में लगातार नाराजगी बढ़ती चली गई।

जमीन के बंटवारे को लेकर भी बढ़ता गया विवाद

परिजनों के अनुसार, आरोपी अक्सर पिता से जमीन के बंटवारे की मांग करता था। कभी वह अपनी हिस्सेदारी चाहता था तो कभी कुछ जमीन बेचकर उसे धन देने की बात कहता था ताकि वह कोई व्यवसाय शुरू कर सके और नया जीवन बसा सके।

दूसरी ओर, प्रमोद रावत का स्पष्ट कहना था कि जब तक वह जीवित हैं, तब तक पैतृक संपत्ति का बंटवारा नहीं होगा। उनका निर्णय था कि उनके निधन के बाद चारों बेटों को बराबर का हिस्सा दिया जाएगा।

इसी मुद्दे को लेकर दोनों के बीच आए दिन विवाद होता था। परिवार के सदस्यों का कहना है कि बातचीत अक्सर बहस और झगड़े में बदल जाती थी। आरोपी स्वयं को परिवार में उपेक्षित महसूस करता था और धीरे-धीरे उसका गुस्सा बढ़ता गया।

मंदिर जाने की दिनचर्या का उठाया फायदा

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रमोद रावत की दिनचर्या पूरे गांव को पता थी। विशेष रूप से शनिवार शाम मंदिर में उनकी मौजूदगी लगभग तय रहती थी।

पुलिस का भी मानना है कि आरोपी को पिता की इस आदत की पूरी जानकारी थी। इसी वजह से उसने कथित तौर पर शनिवार की शाम को वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हत्या पूरी तरह पूर्व नियोजित थी या फिर मौके पर विवाद बढ़ने के बाद हमला किया गया।

बीच-बचाव करने वाले युवक पर भी किया हमला

घटना के दौरान मंदिर के पास मौजूद एक युवक ने चीख-पुकार सुनकर हस्तक्षेप करने का प्रयास किया। लेकिन आरोपी ने उस पर भी हमला करने की कोशिश की। युवक किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागा और गांव पहुंचकर परिजनों व ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी।

सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। तब तक प्रमोद रावत की मौत हो चुकी थी। गांव में घटना के बाद शोक और आक्रोश का माहौल फैल गया।

मां को भी तलाशता हुआ घर पहुंचा आरोपी

ग्रामीणों और परिवार के लोगों के अनुसार, हत्या के बाद आरोपी अपने घर भी पहुंचा था। आशंका जताई जा रही है कि वह अपनी मां को भी नुकसान पहुंचाना चाहता था। हालांकि उस समय उसकी मां घटनास्थल की ओर जा चुकी थीं, जिससे वह किसी अनहोनी का शिकार होने से बच गईं।

इस घटना के बाद परिवार के अन्य सदस्य भी दहशत में आ गए और पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई।

खून से सनी कुल्हाड़ी लेकर थाने पहुंचा

घटना के बाद आरोपी फरार होने के बजाय सीधे औरास थाने पहुंचा। उसके हाथ में खून से सनी कुल्हाड़ी थी। उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करते हुए अपना अपराध स्वीकार किया।

पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि पिता उसकी बात नहीं सुनते थे। पत्नी से अलग होने के बाद वह दोबारा शादी करना चाहता था, लेकिन पिता इसके लिए तैयार नहीं थे। साथ ही जमीन बेचने अथवा आर्थिक मदद देने की उसकी मांग भी लगातार ठुकराई जा रही थी। इसी नाराजगी ने उसे इस भयावह कदम तक पहुंचा दिया।

पुलिस ने शुरू की विस्तृत जांच

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए गए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। परिवार के सदस्यों, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच के बाद ही हत्या के पीछे की पूरी सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।

एक परिवार की त्रासदी बन गया पूरा मामला

यह घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि उन पारिवारिक संबंधों की भी दर्दनाक तस्वीर पेश करती है, जहां संवाद की कमी, बढ़ता अविश्वास, संपत्ति को लेकर विवाद और मानसिक तनाव धीरे-धीरे रिश्तों को खोखला कर देते हैं। जिस परिवार में कभी साथ रहने का सपना था, वहीं आज एक पिता की जान चली गई और बेटा हत्या के आरोप में सलाखों के पीछे पहुंच गया। इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यदि पारिवारिक मतभेद समय रहते सुलझाए न जाएं, तो उनके परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं।

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