देवरिया

अवैध शराब की बड़ी खेप पकड़ी गई, 138 पेटी अंग्रेजी शराब और वाहन जब्त, जांच में उलझे दावे

दस्तावेजों के बावजूद कार्रवाई पर उठे सवाल, पुलिस और आबकारी विभाग के अलग-अलग दावों से मामला बना चर्चा का विषय

इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया। जिले के बनकटा थाना क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक टाटा पिकअप वाहन से 138 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार बरामद शराब की अनुमानित कीमत करीब नौ लाख रुपये है। इस कार्रवाई के दौरान वाहन को भी सीज कर दिया गया है। मामले में वाहन स्वामी विवेक राय तथा एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

हालांकि इस पूरे मामले ने नया मोड़ तब ले लिया, जब शराब दुकान के लाइसेंसधारी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि बरामद शराब पूरी तरह वैध दस्तावेजों के साथ अधिकृत दुकान के लिए भेजी जा रही थी। वहीं आबकारी विभाग के अधिकारी का बयान भी इस दावे की पुष्टि करता दिखाई दे रहा है। ऐसे में पुलिस और आबकारी विभाग के अलग-अलग दावों के चलते मामला जांच का विषय बन गया है।

चौधुर छापर गांव में हुई पुलिस की कार्रवाई

जानकारी के अनुसार बनकटा थाना क्षेत्र के चौधुर छापर गांव के पास पुलिस ने एक टाटा पिकअप वाहन को रोककर उसकी तलाशी ली। पुलिस का कहना है कि वाहन से बड़ी मात्रा में अंग्रेजी शराब बरामद हुई। बरामद शराब की कुल मात्रा 138 पेटी बताई गई है, जिसकी बाजार कीमत लगभग नौ लाख रुपये आंकी गई है।

कार्रवाई के बाद पुलिस ने वाहन को अपने कब्जे में लेकर थाने पहुंचाया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। इस मामले में वाहन स्वामी विवेक राय पुत्र बलिंद्र राय निवासी जैतपुरा तथा एक अज्ञात चालक के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

लाइसेंसधारी ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

मामले में नया मोड़ तब आया जब शराब दुकान के लाइसेंसधारी बलिंद्र राय ने पुलिस कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना है कि खरवनिया स्थित उनकी अधिकृत अंग्रेजी शराब की दुकान के लिए देवरिया स्थित गोदाम से विधिवत चालान और बिल्टी के आधार पर शराब भेजी जा रही थी।

उन्होंने बताया कि जिस वाहन को पुलिस ने पकड़ा, उसी वाहन में दुकान के लिए भेजी गई अंग्रेजी शराब के साथ दो रेफ्रिजरेटर भी लदे हुए थे। इन रेफ्रिजरेटरों को रास्ते में उनके घर पर उतारने की योजना थी। इसी दौरान देवरिया की स्वाट टीम ने वाहन को रोक लिया और बाद में बनकटा पुलिस को सूचना देकर वाहन को थाने भिजवा दिया।

बलिंद्र राय का आरोप है कि आबकारी विभाग को पूरे मामले की जानकारी देने के बावजूद पुलिस ने उपलब्ध दस्तावेजों का समुचित परीक्षण नहीं किया और सीधे कार्रवाई कर दी।

आबकारी विभाग ने क्या कहा

क्षेत्रीय आबकारी निरीक्षक बृजेश कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार खरवनिया स्थित लाइसेंस प्राप्त दुकान के लिए बिल्टी और अन्य दस्तावेजों के माध्यम से शराब भेजी जा रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

आबकारी विभाग के इस बयान के बाद मामले में कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। यदि दस्तावेज वैध पाए जाते हैं तो पुलिस कार्रवाई की समीक्षा भी हो सकती है, जबकि यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस का दावा- बिहार ले जाई जा रही थी शराब

दूसरी ओर भाटपार रानी क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि पुलिस जांच में यह सामने आया कि टाटा पिकअप वाहन के माध्यम से करीब 1191 लीटर अंग्रेजी शराब बिहार की ओर ले जाई जा रही थी। वाहन से शराब के अलावा दो रेफ्रिजरेटर भी बरामद किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि वाहन स्वामी विवेक राय तथा अज्ञात चालक के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शराब की वास्तविक गंतव्य क्या थी और इसमें किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका तो नहीं है।

जांच पूरी होने के बाद होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल इस मामले में पुलिस और आबकारी विभाग के बयानों में अंतर दिखाई दे रहा है। एक ओर पुलिस शराब को बिहार ले जाए जाने का दावा कर रही है, जबकि दूसरी ओर लाइसेंसधारी और आबकारी विभाग का कहना है कि शराब अधिकृत दुकान के लिए वैध दस्तावेजों के साथ भेजी जा रही थी।

ऐसी स्थिति में जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सभी दस्तावेजों, परिवहन अनुमति, बिल्टी और अन्य अभिलेखों की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

पुलिस और आबकारी विभाग के समन्वय पर भी उठे प्रश्न

इस घटना के बाद पुलिस और आबकारी विभाग के बीच समन्वय को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। यदि किसी लाइसेंस प्राप्त दुकान के लिए वैध दस्तावेजों के साथ शराब का परिवहन किया जा रहा था, तो उसकी पुष्टि समय रहते क्यों नहीं हो सकी। वहीं यदि शराब की तस्करी की जा रही थी तो उसके समर्थन में मौजूद दस्तावेजों की वास्तविकता क्या है, यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

फिलहाल पुलिस ने वाहन को सीज कर शराब अपने कब्जे में ले ली है और मुकदमा दर्ज कर आगे की विवेचना शुरू कर दी है। वहीं संबंधित पक्ष जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आने की उम्मीद जता रहे हैं।

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