गुस्ताख दिल
-
गुस्ताख दिल
गुस्ताख दिल ; “जब दिल हुआ गुस्ताख, तो सच हुआ बेनकाब!” चलते हैं सीतापुर….
[चाय की गरम-गरम चुस्कियों के बीच जब बातचीत सिर्फ फुल्की-फुल्की न हो, तो सच की परतें गेरुआ लगें, तो वही…
Read More » -
गुस्ताख दिल
गुस्ताख दिल : सब कुछ मिल गया… इंसान कहीं रह गया
“गुस्ताख दिल” एक ऐसा स्तंभ है, जहाँ दिल की बेबाकी और सोच की सच्चाई बिना लाग-लपेट के सामने आती है।…
Read More » -
बदतमीजी दिल की
घणी बातां, गहरा सच : “फलौदी” की फुसफुसाती गलियों में “गुस्ताख दिल” का सफर
✍ अनिल अनूप के साथ बल्लभ लखेश्री रेत की लकीरों में लिखी अधूरी सभ्यता : जयपुर से फलौदी तक गुस्ताख…
Read More »