गोंडा। गोंडा जनगणना 2027 प्रशिक्षण को लेकर जिला प्रशासन ने लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। जनगणना के दूसरे चरण के अंतर्गत आयोजित फील्ड ट्रेनरों के प्रशिक्षण में 11 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने संबंधित कर्मचारियों के प्रशिक्षण अवधि के वेतन पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही संबंधित विभागों को पत्र भेजकर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को कहा गया है। प्रशासन के इस कदम से स्पष्ट है कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में निर्धारित प्रशिक्षण की अनदेखी को सामान्य लापरवाही मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
जनगणना की प्रक्रिया में आंकड़ों का सही संकलन, निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन और नागरिकों से प्राप्त जानकारी का व्यवस्थित अभिलेखीकरण बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस काम को सही ढंग से पूरा करने के लिए कर्मचारियों को पहले प्रशिक्षित किया जाता है। ऐसे में प्रशिक्षण से अनुपस्थित रहना न केवल विभागीय जिम्मेदारी के प्रति उदासीनता का मामला है, बल्कि इससे आगे होने वाले मैदानी कार्य की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से जिला प्रशासन ने अनुपस्थित कर्मचारियों के मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है।
लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय में चल रहा तीन दिवसीय प्रशिक्षण
जनगणना 2027 के दूसरे चरण के तहत गोंडा के लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय में 7 अक्टूबर से फील्ड ट्रेनरों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य संबंधित कर्मचारियों को जनगणना की प्रक्रिया, कार्यप्रणाली और मैदानी स्तर पर अपनाई जाने वाली आवश्यक सावधानियों की जानकारी देना है। प्रशिक्षित कर्मचारी आगे निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन करते समय तय प्रक्रिया का पालन कर सकें, इसी उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को उनके दायित्वों से संबंधित जरूरी जानकारियां दी जानी हैं, ताकि वास्तविक कार्य के समय किसी तरह की अनावश्यक कठिनाई उत्पन्न न हो। जनगणना जैसे व्यापक कार्य में एकत्र किए जाने वाले आंकड़ों की शुद्धता और कार्य की समयबद्धता का विशेष महत्व होता है। इसलिए प्रशिक्षण में भाग लेना संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है।
जिला प्रशासन की ओर से की गई जांच में कुल 11 कर्मचारियों की अनुपस्थिति सामने आई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ कर्मचारी 7 अक्टूबर की दूसरी पाली में प्रशिक्षण से अनुपस्थित रहे, जबकि कुछ कर्मचारी 7 और 8 अक्टूबर को आयोजित प्रशिक्षण में शामिल नहीं हुए। अलग-अलग समय पर दर्ज की गई अनुपस्थिति के आधार पर संबंधित कर्मचारियों को चिह्नित किया गया और उनके विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए।
प्रवक्ता, सहायक अध्यापक और लेखपाल भी अनुपस्थित
प्रशिक्षण में अनुपस्थित पाए गए कर्मचारियों में विभिन्न विद्यालयों के प्रवक्ता, सहायक अध्यापक और तहसीलों में तैनात लेखपाल शामिल बताए गए हैं। ये कर्मचारी अपने-अपने विभागों में जिम्मेदार पदों पर कार्यरत हैं। ऐसे में जनगणना से संबंधित निर्धारित प्रशिक्षण में उनकी अनुपस्थिति को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को मामले में आवश्यक कदम उठाने और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
सरकारी कर्मचारियों को जब किसी आधिकारिक दायित्व के लिए नामित किया जाता है, तो उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे निर्धारित समय पर उपस्थित होकर जिम्मेदारी निभाएं। खासकर जनगणना जैसे व्यापक प्रशासनिक कार्य में प्रशिक्षण का महत्व और बढ़ जाता है। यदि कर्मचारी प्रशिक्षण में शामिल नहीं होते हैं, तो उन्हें कार्य की प्रक्रिया समझने, निर्देशों को सही तरीके से लागू करने और मैदानी स्तर पर आने वाली समस्याओं से निपटने में कठिनाई हो सकती है।
हालांकि, प्रत्येक कर्मचारी की अनुपस्थिति के कारणों और संबंधित विभागीय अभिलेखों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक होगा। प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को इसी दिशा में निर्देश दिए हैं, ताकि मामले का निस्तारण निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा सके।
जनगणना अधिनियम के तहत कार्रवाई के निर्देश
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी और संबंधित उप जिलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि अनुपस्थित कर्मचारियों के मामले में जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 5 और 11 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रशिक्षण में अनुपस्थिति से संबंधित दिनों का वेतन रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त संबंधित विभागों को की गई कार्रवाई की जानकारी जिला जनगणना अधिकारी को उपलब्ध कराने को कहा गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से प्रशासन मामले की प्रगति पर नजर रख सकेगा और यह सुनिश्चित कर सकेगा कि दिए गए निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की गई है। विभागीय स्तर पर कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करना भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
जनगणना अधिनियम का उल्लेख करते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस राष्ट्रीय कार्य से जुड़ी जिम्मेदारियों को निर्धारित नियमों के अनुसार पूरा किया जाना चाहिए। हालांकि, किसी कर्मचारी पर लागू होने वाले विशिष्ट प्रावधान और कार्रवाई का स्वरूप संबंधित तथ्यों, कर्तव्य तथा कानून की प्रयोज्यता के आधार पर तय किया जाना चाहिए। इसलिए संबंधित विभागों को नियमों के अनुरूप आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
बिना प्रशिक्षण मैदानी कार्य प्रभावित होने की आशंका
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने प्रशिक्षण को जनगणना की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को काम से संबंधित जरूरी जानकारियां दी जा रही हैं, ताकि फील्ड में जिम्मेदारी निभाते समय उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। यदि कर्मचारी प्रशिक्षण में शामिल हुए बिना सीधे मैदानी कार्य में पहुंचते हैं, तो प्रक्रिया को समझने और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करने में दिक्कत आ सकती है। इसका असर कार्य की गति और गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।
जनगणना की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारी अपने दायित्वों को स्पष्ट रूप से समझें। आंकड़ों का सही संकलन, निर्धारित प्रक्रिया का पालन और समय पर काम पूरा करना इस अभियान के प्रमुख पहलू हैं। इन सभी उद्देश्यों को पूरा करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम की उपयोगिता महत्वपूर्ण है। इसी कारण प्रशासन कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर गंभीरता बरत रहा है।
प्रशिक्षण से अनुपस्थित रहने पर वेतन रोकने और विभागीय कार्रवाई के निर्देश इसी जवाबदेही को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखे जा रहे हैं। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनगणना से जुड़ा काम निर्धारित व्यवस्था के अनुसार संपन्न हो और संबंधित कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहें।
भविष्य में लापरवाही पर भी होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि प्रशिक्षण से अनुपस्थित रहना लापरवाही है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अनुपस्थित कर्मचारियों को संबंधित दिनों का वेतन नहीं दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही भविष्य में भी यदि कर्मचारी निर्धारित प्रशिक्षण से गैरहाजिर रहते हैं, तो उनके विरुद्ध इसी तरह नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। संबंधित विभागों को भी अपने स्तर पर कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई का मुख्य संदेश यही है कि जनगणना 2027 की तैयारियों में लगे सभी कर्मचारियों को समयबद्धता और जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभानी होगी। प्रशिक्षण केवल औपचारिक उपस्थिति का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से कर्मचारियों को आगामी कार्य के लिए तैयार किया जाता है। इसलिए निर्धारित प्रशिक्षण में भाग लेना और दिए गए निर्देशों को समझना जरूरी है।
गोंडा में 11 कर्मचारियों की अनुपस्थिति के बाद जारी किए गए निर्देशों से विभागीय जवाबदेही पर जोर दिया गया है। अब संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे अनुपस्थिति से जुड़े तथ्यों की जांच करते हुए नियमों के अनुसार कार्रवाई करें और उसकी सूचना जिला जनगणना अधिकारी को उपलब्ध कराएं। इससे जनगणना की तैयारियों को व्यवस्थित रखने और कर्मचारियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
गोंडा जनगणना 2027 प्रशिक्षण से जुड़े इस मामले में जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय महत्व के कार्य में लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जाएगा। प्रशिक्षण में नियमित उपस्थिति, निर्देशों का पालन और समय पर जिम्मेदारी निभाना ही जनगणना की तैयारियों को प्रभावी बनाने का आधार है।













