16 अक्टूबर 2026 6:35 अपराह्न

कोना-कोना पानी में, हर तरफ आफत: लखनऊ से गोंडा-गोरखपुर तक बारिश का कहर, कहीं छत गिरी तो कहीं पेड़ बने मौत का सबब

उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से जलभराव और तबाही का दृश्य, रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी की तस्वीर के साथ

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

The specified slider id does not exist.

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

लखनऊ। आसमान खुला तो पानी रुका नहीं और पानी बरसा तो मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश अब महज मौसम की खबर नहीं रह गई है, बल्कि कई जिलों में यह जिंदगी और मौत के बीच खड़ी चुनौती बन गई है। कहीं कच्चे मकान भरभराकर गिर रहे हैं, कहीं पुराने पेड़ सड़क पर मौत बनकर टूट पड़ रहे हैं, कहीं दीवारों के नीचे परिवार दब रहे हैं तो कहीं सड़कों पर घुटनों तक पानी भर जाने से शहरों की रफ्तार थम गई है।

उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और तेज हवाओं ने कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। जलभराव से शहरों की रफ्तार थमी है तो ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों, छप्परों और फसलों पर असर पड़ा है। इस बीच पेड़ गिरने और मकान-दीवार ढहने की कई घटनाएं सामने आई हैं। कुछ हादसों में लोगों की जान गई है और कई लोग घायल हुए हैं।

लखनऊ में करीब सौ साल पुराना बरगद गिरने से पार्क की बाउंड्री क्षतिग्रस्त हुई, जबकि हुसैनाबाद में ऐतिहासिक गेट का एक हिस्सा गिरने की सूचना है। मऊ में कच्चा मकान गिरने से तीन लोग घायल हुए। गोंडा में बिजली के तार में बाइक फंसने के बाद तार हटाने की कोशिश कर रहे दो युवक पेड़ की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई। श्रावस्ती में छप्पर पर पेड़ गिरने से छह लोग घायल हुए; गंभीर रूप से घायल एक वृद्ध की बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई।

उधर उन्नाव, फतेहपुर, बदायूं, एटा और गोरखपुर में भी बारिश से जलभराव, मकानों को नुकसान, पेड़ गिरने और आवागमन प्रभावित होने की सूचनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि लगातार बारिश के दौरान सबसे ज्यादा जोखिम किन इलाकों और परिवारों पर पड़ता है—खासकर वे लोग जो कच्चे या जर्जर मकानों में रह रहे हैं, नदी-नालों के आसपास बसे हैं या जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे हैं।

मौसम विभाग के उपलब्ध पूर्वानुमान के अनुसार 26 सितंबर को उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई थी। उत्तरी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं अत्यधिक से असाधारण रूप से भारी बारिश की संभावना भी बताई गई, जबकि दक्षिणी उत्तर प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान था।

यानी इस वक्त कहानी सिर्फ बारिश की नहीं है। कहानी उन सड़कों की भी है जहां पानी भर गया है, उन घरों की भी है जिनकी दीवारें कमजोर पड़ चुकी हैं, उन पेड़ों की भी है जो तेज हवा में सड़क और घरों पर गिर रहे हैं और उन खेतों की भी है जहां खड़ी फसल लगातार बारिश के बीच नुकसान के जोखिम में है।

लखनऊ से पूर्वांचल और अवध के जिलों तक तस्वीर अलग-अलग जरूर है, लेकिन संकट की एक कड़ी साझा है—लगातार बारिश और उसके बाद पैदा हो रही स्थानीय आपदाएं। प्रशासन राहत और बचाव में जुटा है, लेकिन मौसम के लगातार सक्रिय रहने के बीच संवेदनशील इलाकों में निगरानी और सतर्कता की जरूरत बनी हुई है।

यह सिर्फ गिरे हुए मकानों और पेड़ों की कहानी नहीं है। यह उन परिवारों की कहानी है जिनके लिए बारिश का हर नया दौर एक नई आशंका लेकर आ रहा है—आज दीवार बचेगी या नहीं, छत टिकेगी या नहीं, सड़क पार कर पाएंगे या नहीं और खेत में खड़ी फसल बच पाएगी या नहीं।

लगातार बारिश ने शहरों की जल निकासी व्यवस्था की भी परीक्षा शुरू कर दी है। लखनऊ, उन्नाव और गोरखपुर समेत कई शहरों में जलभराव ने यातायात प्रभावित किया है। दूसरी ओर गांवों में कच्चे घर, छप्पर और कमजोर दीवारें लगातार खतरे में हैं। खेतों में पानी भरने से खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। नदियों का जलस्तर ऊपर जाने से नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ और कटान का खतरा अलग मंडरा रहा है।

लखनऊ में बारिश के बीच पेड़ और ऐतिहासिक गेट का हिस्सा गिरा

राजधानी लखनऊ में लगातार बारिश के बीच कई स्थानों पर पुराने पेड़ों और जर्जर संरचनाओं से जुड़ी घटनाएं सामने आईं। निशातगंज में करीब सौ साल पुराना बरगद का पेड़ गिरने से पार्क की बाउंड्री क्षतिग्रस्त हो गई। पेड़ के पास खड़ा डाला भी इसकी चपेट में आकर टूट गया। बारिश और तेज हवा के बीच इस तरह की घटनाओं ने सड़क किनारे तथा सार्वजनिक स्थानों पर खड़े पुराने और कमजोर पेड़ों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

हुसैनाबाद क्षेत्र में सतखंडा चौकी के पास ऐतिहासिक गेट का ऊपरी हिस्सा भी गिरने की सूचना सामने आई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और एहतियात के तौर पर रास्ते पर आवाजाही रोक दी गई। गिरे हुए हिस्से के आसपास बैरिकेडिंग कर लोगों को दूर रखा गया।

लगातार बारिश के दौरान पुरानी इमारतों और ऐतिहासिक संरचनाओं की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण विषय बन जाती है। पानी के लगातार संपर्क और तेज हवाओं के बीच पहले से कमजोर संरचनाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसे में किसी भी क्षतिग्रस्त हिस्से के आसपास लोगों की आवाजाही रोकना तत्काल सुरक्षा उपायों में शामिल है।

जलभराव वाले इलाकों में प्रशासन की निगरानी

राजधानी में बारिश के बीच जिलाधिकारी और नगर आयुक्त ने विभिन्न इलाकों का दौरा कर जलभराव तथा जल निकासी की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने अंडरपास, पंपिंग स्टेशन और जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण किया।

नगर निगम की टीमें अलग-अलग जोन में जल निकासी की निगरानी कर रही हैं। स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम के माध्यम से भी बारिश और जलभराव की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आवश्यकता के अनुसार संबंधित टीमों को मौके पर भेजकर पानी निकालने और रास्तों को सुचारु करने की कार्रवाई की जा रही है।

प्रशासन की ओर से पेड़ गिरने की स्थिति में उन्हें तत्काल हटाने और यातायात व्यवस्था बाधित न होने देने के निर्देश दिए गए हैं। जलभराव अथवा गिरे हुए पेड़ से संबंधित शिकायतों के लिए नगर निगम की हेल्पलाइन 1533 का इस्तेमाल करने को कहा गया है।

बारिश के दौरान जल निकासी की व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ घंटों की लगातार बारिश के बाद सामान्य सड़कें भी पानी से भर जाती हैं। ऐसे में पंपिंग स्टेशन और जल निकासी तंत्र पर दबाव बढ़ जाता है।

मऊ में कच्चा मकान गिरने से तीन घायल

मऊ के कोतवाली थाना क्षेत्र के परदहा इलाके में तेज आंधी और भारी बारिश के बीच कच्चा मकान गिरने से तीन लोग मलबे में दब गए। हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव शुरू किया।

ग्रामीणों ने मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला। इसके बाद घायलों को एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों में रेनू सिंह, मीनू पटेल और प्रिंस सिंह के नाम बताए गए हैं। इनमें एक की हालत गंभीर बताई गई है।

सूचना मिलने पर कोतवाल समेत पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा। घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि लगातार बारिश के दौरान कच्चे और कमजोर मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।

ग्रामीण इलाकों में कई परिवार वर्षों से कच्चे मकानों में रहते हैं। सामान्य मौसम में ये मकान किसी तरह परिवार का आशियाना बने रहते हैं, लेकिन लगातार बारिश मिट्टी और कमजोर दीवारों की मजबूती को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि बारिश के लंबे दौर में ऐसे घरों में रहने वाले परिवारों के लिए खतरा बढ़ जाता है।

गोंडा में पेड़ गिरने से दो युवकों की मौत

गोंडा के धानेपुर थाना क्षेत्र में बारिश और तेज हवा के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया। शुक्लागंज-रेहरा मार्ग पर राजापुर मुरावन गांव के पास दो युवकों के साथ हादसा हुआ। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार सड़क पर बिजली का तार गिरने के बाद बाइक उसमें फंस गई थी। तार हटाने के प्रयास के दौरान दोनों युवक पेड़ की चपेट में आ गए।

हादसे में दोनों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान 35 वर्षीय इमरान और 33 वर्षीय इम्तियाज उर्फ खालिद के रूप में बताई गई है। दोनों बलरामपुर जिले के रेहरा बाजार थाना क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।

घटना की सूचना मिलने पर धानेपुर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की और परिजनों को सूचना दी।

यह घटना बारिश के दौरान पैदा होने वाले खतरों की जटिलता को सामने लाती है। तेज हवा में केवल पेड़ ही नहीं गिरते, बल्कि बिजली के तार टूटने या सड़क पर आने से भी दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में गिरे हुए बिजली के तारों से दूरी बनाए रखना और संबंधित विभाग को तत्काल सूचना देना महत्वपूर्ण हो जाता है।

श्रावस्ती में राप्ती का बढ़ता जलस्तर, नदी किनारे बसे इलाकों में चिंता

श्रावस्ती में लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीण इलाकों में बारिश के साथ बाढ़ की आशंका भी बढ़ी है। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का असर इस क्षेत्र की नदियों के जलस्तर पर भी पड़ता है।

राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे इलाकों में कटान और बाढ़ की आशंका को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे इलाकों में प्रशासन को लगातार जलस्तर पर नजर रखने और संवेदनशील स्थानों की निगरानी करने की जरूरत होती है।

नदी के आसपास रहने वाले परिवारों के लिए खतरा सिर्फ पानी बढ़ने तक सीमित नहीं रहता। जलस्तर बढ़ने के साथ तटवर्ती इलाकों में कटान, रास्तों के प्रभावित होने और आवागमन बाधित होने की समस्या भी सामने आ सकती है।

श्रावस्ती में छप्पर पर गिरा पेड़, छह लोग घायल

श्रावस्ती के सोनवा थाना क्षेत्र के चन्दरखा बुजुर्ग गांव के लोनियनपुरवा में बारिश के दौरान एक परिवार के लिए मुश्किल घड़ी सामने आई। परिवार के सदस्य छप्पर के नीचे बैठे थे, तभी पास खड़ा पुराना पेड़ अचानक गिर गया।

पेड़ और छप्पर की चपेट में आने से छह लोग घायल हुए। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव शुरू किया और घायलों को बाहर निकाला। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार गंभीर रूप से घायल एक वृद्ध को उपचार के लिए बहराइच मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अन्य घायलों का उपचार जारी बताया गया।

इस घटना में यह अंतर स्पष्ट रखना जरूरी है कि मौत की सूचना मौके पर नहीं, बल्कि उपचार के दौरान सामने आई। आपदा और दुर्घटना की रिपोर्टिंग में ऐसे समय-क्रम का उल्लेख तथ्यात्मक शुद्धता के लिए महत्वपूर्ण होता है।

उन्नाव में लंबे समय की बारिश से जलभराव और फसलों पर असर

उन्नाव में करीब 36 घंटे से जारी बारिश ने कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित किया। जल निगम कार्यालय परिसर में भी पानी भरने की सूचना सामने आई। नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में खड़ी धान की फसल को नुकसान की आशंका भी जताई गई है। लगातार पानी खेतों में जमा रहने की स्थिति में फसल प्रभावित हो सकती है। हालांकि वास्तविक कृषि क्षति का आकलन सर्वेक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।

अचलगंज क्षेत्र के आटा बंथर गांव में कच्चा घर गिरने से छह मवेशियों की मौत की सूचना है। आशा खेड़ा गांव में दीवार गिरने से एक पिता और उनकी दो बेटियों के घायल होने की जानकारी सामने आई।

सई नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद रसूलपुर बकिया मार्ग पर पानी भर गया, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। डीएम घनश्याम मीणा ने अधिकारियों के साथ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और जलभराव वाले स्थानों से पानी निकालने के लिए पंपसेट लगाने तथा स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए।

बदायूं में खेतों तक पहुंची बारिश की मार

बदायूं में लगातार बारिश के बीच खरीफ फसलों को लेकर चिंता बढ़ी है। धान, मक्का, बाजरा, उड़द और तिल जैसी फसलों पर नुकसान की आशंका जताई गई है।

कृषि विभाग की ओर से बीमित किसानों से फसल नुकसान की सूचना समय पर देने की अपील की गई है। किसानों को संबंधित कार्यालय या फसल बीमा प्रतिनिधि को जानकारी देने के साथ टोल फ्री नंबर 14447 पर भी सूचना दर्ज कराने की बात कही गई है।

फसल नुकसान के मामले में अनुमान और वास्तविक क्षति के बीच अंतर होता है। इसलिए सर्वेक्षण और आकलन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। बीमा से जुड़े मामलों में किसान द्वारा समय पर सूचना देना भी महत्वपूर्ण है।

बदायूं में कच्चा आशियाना गिरा, परिवार पर दोहरी मार

बदायूं के सिरसौली गांव में बारिश के दौरान कच्चा मकान ढह गया। बताया गया कि करीब एक सप्ताह पहले ही परिवार के मुखिया होरीलाल की बीमारी के कारण मौत हुई थी। परिवार अभी इस दुख से उबर भी नहीं पाया था कि बारिश के दौरान मकान भी धराशायी हो गया।

मकान गिरने के बाद परिवार के सामने सुरक्षित रहने की जगह की समस्या खड़ी हो गई। बारिश के लंबे दौर में ऐसे परिवारों की मुश्किल और बढ़ सकती है, जिनके पास वैकल्पिक आवास की व्यवस्था नहीं है।

ऐसी घटनाओं में तत्काल राहत के साथ आगे के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण हो जाती है। कच्चे मकानों की क्षति का प्रशासनिक सर्वे और पात्रता के अनुसार सहायता की प्रक्रिया प्रभावित परिवारों के लिए अहम होती है।

एटा में खाई में गिरी ईको कार, ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा

एटा में भारी बारिश के दौरान कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के गंज रोड पर मां जानकी कॉलेज के पास एक ईको कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी।

कार के खाई में गिरने के बाद आसपास के लोगों में हलचल मच गई। बारिश के बीच ग्रामीणों ने राहत-बचाव शुरू किया और कार सवारों को बाहर निकालने में मदद की।

बारिश के दौरान सड़क पर पानी, फिसलन और कम दृश्यता वाहन चालकों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन जाते हैं। ऐसे मौसम में सड़क पर गति नियंत्रित रखना और जलभराव वाले अथवा जोखिम वाले रास्तों पर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।

फतेहपुर में कच्चे मकानों पर बारिश की मार

फतेहपुर में लगातार बारिश से कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने की कई घटनाएं सामने आईं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार जिले में करीब 72 कच्चे मकानों के गिरने की सूचना है।

एक घटना में मकान के मलबे में दबने से छोटे भाई की मौत और बड़े भाई के घायल होने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और राजस्व टीम ने नुकसान का आकलन शुरू किया।

एडीएम विनय पाण्डेय ने बारिश से हुए नुकसान और प्रशासन की ओर से किए जा रहे राहत कार्यों की जानकारी दी। प्रभावित परिवारों को सहायता का भरोसा दिया गया है।

यहां भी आंकड़े को “करीब 72” के रूप में ही रखना अधिक सुरक्षित है, क्योंकि नुकसान का अंतिम आंकड़ा प्रशासनिक सर्वे और सत्यापन के बाद बदल सकता है।

गोरखपुर में बारिश से शहर की रफ्तार प्रभावित

गोरखपुर में भी लगातार बारिश का असर व्यापक रूप से दिखाई दिया। बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी। करीब 34 पेड़ गिरने की सूचना सामने आई। इसके अलावा कई स्थानों पर बिजली के पोल गिरने और कुछ पेड़ों के कमजोर होने की जानकारी भी मिली।

नगर निगम और प्रशासन की टीमें सड़कों पर उतरीं और गिरे पेड़ों को हटाने का काम किया। बिजली विभाग की टीमों ने भी विद्युत व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के लिए काम किया।

बारिश के दौरान शहर की सबसे बड़ी चुनौती एक साथ कई व्यवस्थाओं को संभालने की होती है। सड़क पर पानी है तो यातायात प्रभावित होता है, पेड़ गिरता है तो रास्ता बंद होता है और बिजली का पोल गिरने पर विद्युत आपूर्ति के साथ सुरक्षा का सवाल भी खड़ा हो जाता है।

प्रशासन के सामने राहत के साथ रोकथाम की चुनौती

लगातार बारिश के बीच प्रशासन की प्राथमिकता केवल पानी निकालना नहीं, बल्कि संभावित हादसों को रोकना भी है। जर्जर मकानों की पहचान, कमजोर पेड़ों की निगरानी, नदी और नालों के जलस्तर पर नजर, बिजली के टूटे तारों से सुरक्षा और जलभराव वाले मार्गों पर यातायात नियंत्रण—इन सभी मोर्चों पर एक साथ काम करना पड़ता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बारिश प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को सतर्क रहने और फील्ड में मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। रेड अलर्ट वाले जिलों में स्कूल बंद रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्रशासन के लिए चुनौती यह भी है कि बारिश रुकने के बाद नुकसान का वास्तविक आकलन तेजी से किया जाए। मकान, सड़क, बिजली, फसल और पशुधन से जुड़े नुकसान अलग-अलग स्तर पर दर्ज होते हैं। इसलिए शुरुआती सूचनाओं और अंतिम सरकारी आंकड़ों में अंतर संभव है।

बारिश थमने तक सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

इस पूरे घटनाक्रम में एक बात साफ दिखाई देती है—लगातार बारिश के दौरान जोखिम केवल उन स्थानों पर नहीं होता जहां पानी भर चुका है। कमजोर मकान, पुराने पेड़, जर्जर दीवारें, खुले बिजली तार, नदी किनारे के इलाके और जलभराव वाली सड़कें सभी अलग-अलग तरह का खतरा पैदा कर सकते हैं।

बारिश के दौरान गिरे हुए बिजली तार को छूना या उसके पास से गुजरना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना और कमजोर संरचनाओं के आसपास अनावश्यक आवाजाही न करना भी जरूरी है। नदी और नालों का जलस्तर बढ़ने पर स्थानीय प्रशासन की चेतावनी को नजरअंदाज करना जोखिम बढ़ा सकता है।

मौसम की मार और व्यवस्था की परीक्षा

लखनऊ से गोरखपुर और गोंडा से उन्नाव तक सामने आई घटनाओं को एक साथ देखें तो तस्वीर केवल भारी बारिश की नहीं, बल्कि उसके बाद पैदा हुए अलग-अलग स्थानीय संकटों की है। कहीं मकान गिरा, कहीं पेड़, कहीं रास्ते डूबे और कहीं खेतों में पानी भरने से फसल पर असर की आशंका बनी।

इन घटनाओं में कई परिवारों ने अपना सदस्य खोया है, कई लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को जलभराव तथा आवागमन की परेशानी झेलनी पड़ी है। वहीं प्रशासनिक टीमें राहत और बचाव के काम में जुटी हैं।

बारिश की इस स्थिति में सबसे जरूरी बात आंकड़ों की होड़ नहीं, बल्कि हर घटना की सही पुष्टि और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाना है। शुरुआती सूचनाएं अक्सर बदलती रहती हैं। इसलिए मौत, घायल, मकान गिरने या फसल क्षति के आंकड़ों को संबंधित प्रशासनिक पुष्टि के साथ ही अंतिम रूप देना जरूरी है।

फिलहाल मौसम सक्रिय है और कई जिलों में बारिश का असर बना हुआ है। ऐसे में संवेदनशील इलाकों में निगरानी, जल निकासी, बिजली सुरक्षा और कमजोर संरचनाओं को लेकर सतर्कता आने वाले घंटों में भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें