17 अक्टूबर 2026 8:48 अपराह्न

मुश्ताक खान के निधन से रंगमंच और फिल्म जगत में शोक, चाईबासा इप्टा ने दी श्रद्धांजलि

चाईबासा इप्टा की शोक सभा में मुश्ताक खान के चित्र पर श्रद्धांजलि अर्पित करते रंगकर्मी

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ब्यूरो रिपोर्ट

चाईबासा। हिंदी सिनेमा और रंगमंच से जुड़े लोकप्रिय अभिनेता मुश्ताक खान के निधन की खबर से कला जगत में शोक की लहर है। उनके अभिनय, सहज व्यवहार और रंगमंच के प्रति समर्पण को याद करते हुए भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा), चाईबासा के रंगकर्मियों ने गांधी टोला में शोक सभा आयोजित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान इप्टा के सदस्यों ने मुश्ताक खान के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उनके साथ बिताए समय तथा उनकी कलात्मक यात्रा से जुड़ी स्मृतियों को साझा किया।

शोक सभा में वक्ताओं ने कहा कि मुश्ताक खान ने रंगमंच और फिल्मों दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका सहज अभिनय, हास्य शैली और आम लोगों से जुड़ा व्यक्तित्व दर्शकों के बीच उन्हें लोकप्रिय बनाता था। उनके निधन को रंगमंच और फिल्म जगत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति के रूप में याद किया गया।

चाईबासा इप्टा ने चित्र पर पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धांजलि

गांधी टोला में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में चाईबासा इप्टा से जुड़े रंगकर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मुश्ताक खान के चित्र पर पुष्प अर्पित करने के साथ हुई। उपस्थित सदस्यों ने कुछ समय मौन रहकर दिवंगत अभिनेता की स्मृतियों को नमन किया।

रंगकर्मियों ने कहा कि किसी कलाकार की पहचान केवल उसके द्वारा निभाई गई भूमिकाओं से नहीं होती, बल्कि उसके सहकर्मियों और समाज के बीच छोड़ी गई स्मृतियों से भी होती है। मुश्ताक खान ने अपने लंबे रचनात्मक सफर में रंगमंच और सिनेमा के बीच एक मजबूत रिश्ता कायम रखा। चाईबासा इप्टा के कलाकारों के साथ उनके जुड़ाव को भी इस अवसर पर विशेष रूप से याद किया गया।

तीस वर्षों के फिल्मी सफर में बनाई अलग पहचान

शोक सभा में चाईबासा इप्टा के संस्थापक तरुण मुहम्मद ने मुश्ताक खान के जीवन और कला यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मुश्ताक खान ने लगभग तीन दशक लंबे फिल्मी सफर में सौ से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और विभिन्न प्रकार की भूमिकाओं के माध्यम से दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई।

तरुण मुहम्मद ने कहा कि मुश्ताक खान का जुड़ाव केवल फिल्मों तक सीमित नहीं था। वे रंगमंच से भी गहराई से जुड़े रहे और मुंबई इप्टा के कई नाटकों में उनके साथ अभिनय करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि मंच पर काम करने का उनका अनुभव उनकी अभिनय शैली में भी दिखाई देता था।

उन्होंने मुश्ताक खान के साथ बिताए दिनों को याद करते हुए कहा कि उनके व्यक्तित्व में अपनापन और सहयोग की भावना थी। कलाकारों के बीच उनकी मौजूदगी सहज माहौल तैयार करती थी और वे साथी कलाकारों के साथ आत्मीयता से पेश आते थे।

‘चिल्लर गैंग’ के प्रमोशन में योगदान को किया याद

तरुण मुहम्मद ने अपनी फिल्म ‘चिल्लर गैंग’ से जुड़ी यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि फिल्म के लेखन, निर्माण और निर्देशन से जुड़े इस प्रोजेक्ट के प्रचार-प्रसार में मुश्ताक खान ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया था।

उन्होंने कहा कि फिल्म के प्रमोशन के दौरान मुश्ताक खान का सहयोग उनके लिए विशेष महत्व रखता है। उनके अनुसार, मुश्ताक खान ने जिस आत्मीयता के साथ सहयोग किया, वह लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा। तरुण मुहम्मद ने कहा कि मुश्ताक भाई के साथ जुड़ी ऐसी अनेक यादें अब उनकी विरासत का हिस्सा हैं।

अचानक निधन से इप्टा परिवार में गहरा दुख

चाईबासा इप्टा के अध्यक्ष कैसर परवेज ने मुश्ताक खान के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका अचानक चले जाना कला जगत के लिए पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि मुश्ताक खान ने रंगमंच और फिल्मों में अपने लंबे योगदान से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई थी।

कैसर परवेज ने कहा कि एक कलाकार के रूप में मुश्ताक खान की सक्रियता और रंगमंच से उनका जुड़ाव उन्हें अन्य कलाकारों से अलग पहचान देता था। उनके निधन से रंगकर्मियों के बीच जो रिक्तता बनी है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि कलाकार अपने काम के माध्यम से लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रहते हैं। मुश्ताक खान का अभिनय और उनके साथ काम करने वाले रंगकर्मियों की यादें भी आने वाले समय में उनकी विरासत को आगे बढ़ाती रहेंगी।

सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में चाईबासा आए थे मुश्ताक खान

इप्टा के सचिव संजय कुमार चौधरी ने मुश्ताक खान से अपनी मुलाकात की स्मृति साझा की। उन्होंने बताया कि चाईबासा इप्टा के एक सम्मेलन में मुश्ताक खान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने आए थे। उस अवसर पर उनसे बातचीत और मुलाकात हुई थी।

संजय कुमार चौधरी ने कहा कि मुश्ताक खान का व्यवहार बेहद मिलनसार था। वे लोगों से सहजता से मिलते थे और कलाकारों के साथ आत्मीय संवाद कायम करते थे। उनके व्यक्तित्व की यही सरलता और अपनापन उनसे मिलने वाले लोगों के मन में उनकी अलग छवि बनाता था।

उन्होंने कहा कि मुश्ताक खान जैसे कलाकारों का रंगमंच से जुड़ाव नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणादायी रहा है। उनके अभिनय और रंगमंचीय अनुभव को याद करना वास्तव में कला के उस दौर को याद करना है, जिसमें मंचीय अभिनय और सिनेमा का रिश्ता काफी मजबूत था।

रंगकर्मियों ने साझा कीं मुश्ताक खान से जुड़ी स्मृतियां

श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित रंगकर्मियों ने मुश्ताक खान के व्यक्तित्व और कला यात्रा से जुड़ी अपनी-अपनी यादों को साझा किया। वक्ताओं ने कहा कि वे केवल पर्दे पर हास्य भूमिकाएं निभाने वाले अभिनेता नहीं थे, बल्कि रंगमंच की दुनिया से भी उनका गहरा रिश्ता था।

इप्टा से जुड़े कलाकारों ने कहा कि रंगमंच कलाकार को समाज और उसकी वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ता है। मुश्ताक खान का रंगमंच से जुड़ाव उनके अभिनय में सहजता और संवेदनशीलता के रूप में दिखाई देता था। उनके निधन के बाद उनके सहकर्मी उनके साथ काम करने के अनुभवों को याद कर रहे हैं।

शोक सभा में तरुण मुहम्मद, कैसर परवेज, संजय कुमार चौधरी, राज किशोर साहू, शिव शंकर राम, किशोर साव, चमरू कारवा, पप्पू मछुआ, नरेश राम, सीता पूर्ति, सुमन गोप और राज कुमारी सहित कई रंगकर्मी मौजूद रहे।

रंगमंच और सिनेमा के बीच सेतु की तरह याद किए जाएंगे

मुश्ताक खान की स्मृति में आयोजित इस शोक सभा ने यह भी रेखांकित किया कि रंगमंच और सिनेमा के बीच कलाकारों का जुड़ाव भारतीय कला परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इप्टा जैसे सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े कलाकारों के लिए मुश्ताक खान का जीवन और उनका काम इसी परंपरा की एक कड़ी रहा।

चाईबासा इप्टा के रंगकर्मियों ने कहा कि किसी कलाकार की वास्तविक विरासत उसके द्वारा छोड़े गए अभिनय कार्यों के साथ-साथ उन रिश्तों में भी दिखाई देती है, जो उसने अपने सहकर्मियों और दर्शकों के साथ बनाए। मुश्ताक खान की यादें चाईबासा इप्टा के कलाकारों के बीच भी लंबे समय तक बनी रहेंगी।

श्रद्धांजलि सभा के अंत में उपस्थित रंगकर्मियों ने दिवंगत अभिनेता की स्मृतियों को नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया और उनके परिवार, सहकर्मियों तथा प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की। सभा में मौजूद कलाकारों ने कहा कि मुश्ताक खान का जाना एक ऐसे कलाकार का जाना है, जिसने रंगमंच और सिनेमा दोनों माध्यमों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अपने काम से दर्शकों का मनोरंजन किया।

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