इरफान अली लारी की रिपोर्ट
गोरखपुर। लगातार हो रही भारी बारिश के बाद गोरखपुर शहर के कई इलाकों में जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सड़कें पानी से लबालब हैं और कई निचले इलाकों में घरों तथा दुकानों तक पानी पहुंचने की शिकायत सामने आई है। इसी बीच बेतियाहाता वार्ड के भाजपा पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी उर्फ सोनू और गोरखपुर के सांसद रवि किशन के बीच फोन पर हुई बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बातचीत में जलभराव की समस्या को लेकर चर्चा के दौरान राजनीतिक तंज भी सुनाई दे रहे हैं, जिसके बाद यह मामला शहर में चर्चा का विषय बन गया है।
रिपोर्ट : इरफान अली लारी
जलभराव की शिकायत लेकर सांसद से हुई बातचीत
वायरल वीडियो के मुताबिक बेतियाहाता दक्षिणी वार्ड के पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने शहर में जगह-जगह जलभराव की स्थिति को लेकर सांसद रवि किशन से फोन पर संपर्क किया। पार्षद की ओर से शहर की स्थिति और लोगों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया गया। उनका कहना था कि कई ऐसे स्थानों पर भी पानी भर गया है, जहां लंबे समय से ऐसी स्थिति नहीं बनी थी।
इसी बातचीत के दौरान सांसद रवि किशन की ओर से पार्षद से समाजवादी पार्टी में शामिल होने को लेकर सवाल किए जाने की बात वीडियो में सुनाई देती है। इसके जवाब में पार्षद ने भी पलटवार करते हुए सांसद से बहुजन समाज पार्टी में शामिल होने को लेकर सवाल कर दिया।
यह बातचीत सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इसे अलग-अलग नजरिये से देख रहे हैं। हालांकि उपलब्ध वीडियो के आधार पर बातचीत के पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए वायरल वीडियो में कही गई बातों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
‘का हो पार्षद जी, सपा ज्वाइन कई लेहला का?’
वीडियो में सुनाई देने वाली बातचीत के अनुसार, जब पार्षद शहर में जलभराव की समस्या और उसके जल्द समाधान की बात कर रहे थे, तभी सांसद की ओर से उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली है।
पार्षद ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह जनसमस्याओं को लेकर बात कर रहे हैं और ऐसे समय में पार्टी की बात क्यों की जा रही है। उन्होंने शहर में पानी भरने से लोगों और दुकानदारों को हो रही परेशानी का हवाला दिया।
बातचीत आगे बढ़ने पर पार्षद ने भी तंज करते हुए पूछा कि यदि जनसमस्या उठाने पर उनसे सपा में जाने की बात कही जा रही है तो क्या सांसद खुद बसपा में चले गए हैं।
दोनों जनप्रतिनिधियों के बीच हुई इस नोकझोंक का अंश सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने लगा। राजनीतिक टिप्पणी और शहर की गंभीर जलभराव समस्या के एक साथ सामने आने के कारण वीडियो ने स्थानीय स्तर पर खासा ध्यान खींचा है।
सांसद ने अधिकारियों से बातचीत और जलनिकासी का दिया हवाला
बातचीत के दौरान रवि किशन की ओर से यह कहा गया कि वह खुद सड़कों पर निकले हुए हैं और अधिकारियों से समस्या के समाधान को लेकर बातचीत कर रहे हैं। वायरल बातचीत में सांसद ने जलनिकासी से जुड़े रेगुलेटरों के संचालन का भी उल्लेख किया।
रिपोर्टों के मुताबिक बातचीत में तरकुलानी और पाम क्षेत्र से संबंधित रेगुलेटरों का जिक्र आया। सांसद की ओर से कहा गया कि जलनिकासी की व्यवस्था के लिए संबंधित अधिकारियों से बातचीत की गई है और रेगुलेटर चालू हैं।
इसके जवाब में पार्षद ने सवाल उठाया कि यदि रेगुलेटर समय से सक्रिय कर दिए जाते तो शहर में जलभराव की स्थिति इतनी गंभीर क्यों होती। इस हिस्से में दोनों के बीच समस्या के कारण और उसके समाधान को लेकर मतभेद दिखाई देते हैं।
पार्षद का दूसरा वीडियो भी चर्चा में
फोन पर हुई बातचीत के अलावा पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी का एक और वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसमें वह रामगढ़ताल क्षेत्र में खड़े नजर आते हैं और सांसद से मिलने की बात कहते हैं।
वीडियो में पार्षद का कहना है कि वह काफी देर से मौके पर मौजूद हैं और सांसद का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद और जनता की समस्याओं को लेकर जवाबदेही का सवाल भी उठाया।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस घटनाक्रम के बाद पार्षद और सांसद के बीच आमने-सामने बातचीत की स्थिति भी बनी। हालांकि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के अलग-अलग हिस्सों के कारण पूरे घटनाक्रम को उसके संपूर्ण संदर्भ में देखना जरूरी है।
भारी बारिश से शहर में बढ़ी परेशानी
गोरखपुर में सितंबर के अंतिम सप्ताह में बारिश का दौर लगातार सक्रिय रहा है। 25 से 27 सितंबर के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश और तेज हवाओं की संभावना को लेकर मौसम संबंधी चेतावनी भी सामने आई थी। 26 सितंबर को गोरखपुर में जलनिकासी व्यवस्था का अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई।
लगातार बारिश का सीधा असर शहर के निचले इलाकों पर पड़ा है। सड़कें पानी से भरने के साथ कई स्थानों पर आवागमन प्रभावित हुआ। जलभराव के कारण दुकानदारों और स्थानीय निवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई इलाकों में लोग पानी निकलने का इंतजार करते नजर आए।
गोरखपुर में जलभराव की समस्या नई नहीं है। अगस्त में भी स्थानीय पार्षदों ने पैडलेगंज क्षेत्र में जलनिकासी व्यवस्था से जुड़े अवरोधों को लेकर चिंता जताई थी। उस रिपोर्ट में बेतियाहाता सहित आसपास के कई वार्डों में बारिश के दौरान जलभराव की आशंका और घरों में पानी पहुंचने की समस्या का उल्लेख किया गया था।
नगर निगम की ओर से जलनिकासी के प्रयास
शहर में बिगड़े हालात के बीच नगर निगम के अधिकारियों द्वारा जलनिकासी के लिए पंप और अन्य संसाधन लगाने की बात कही गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारी प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर रहे हैं और नालों तथा जलनिकासी मार्गों की स्थिति देखी जा रही है।
स्थानीय प्रशासन और नगर निगम के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लगातार बारिश के बीच जमा पानी को जल्द से जल्द बाहर निकाला जाए। इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर पंपिंग और जलनिकासी की व्यवस्था की जा रही है।
राजनीतिक तकरार से ज्यादा बड़ा मुद्दा जलभराव
रवि किशन और विश्वजीत त्रिपाठी के बीच वायरल बातचीत का राजनीतिक हिस्सा भले ही सोशल मीडिया पर ज्यादा चर्चा में हो, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में गोरखपुर का जलभराव है। बारिश के बाद नागरिकों को सड़क, आवागमन, कारोबार और घरों में पानी भरने जैसी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
एक ओर जनप्रतिनिधि जलनिकासी के प्रयासों की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर नागरिकों की शिकायत है कि बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बार-बार सामने आती है। ऐसे में तत्काल राहत के साथ स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की जरूरत का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
वायरल वीडियो ने जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद, जवाबदेही और शहर की जलनिकासी व्यवस्था को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है। अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि बारिश के बाद जलभराव से राहत कब तक मिलती है और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए नगर निगम तथा संबंधित विभाग क्या स्थायी कदम उठाते हैं।













