शिक्षक होते भाग्य विधाता, मात-पिता जैसा है यह नाता : मोहन द्विवेदी
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
सलेमपुर (देवरिया)। गुरु केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थी के जीवन को दिशा देने वाला ऐसा प्रकाशपुंज है, जिसकी रोशनी में भविष्य की राहें स्पष्ट होती हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु को माता-पिता के समान सम्मान इसलिए दिया गया है, क्योंकि वह अपने शिष्यों के व्यक्तित्व को आकार देने के साथ उनके भीतर संस्कार, अनुशासन, नैतिकता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करता है। इसी गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना को समर्पित शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन सलेमपुर नगर पंचायत स्थित जी.एम. एकेडमी में हर्षोल्लास, आत्मीयता और गरिमापूर्ण वातावरण में किया गया।
शिक्षक दिवस के अवसर पर विद्यालय परिसर में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। विद्यार्थियों के चेहरे पर अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कार्यक्रम में प्रस्तुति देने को लेकर उत्साह साफ झलक रहा था। कहीं रंगोली अपनी कलात्मक छटा बिखेर रही थी तो कहीं बच्चे सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की अंतिम तैयारियों में जुटे दिखाई दिए। विद्यालय का वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो शिक्षा के मंदिर में गुरु के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का उत्सव मनाया जा रहा हो।
विद्यार्थियों ने शिक्षक दिवस के अवसर पर अपने शिक्षकों का आशीर्वाद लिया और उन्हें उपहार भेंट कर सम्मान प्रकट किया। इस दौरान गुरु के प्रति शिष्यों की आत्मीयता ने समारोह को औपचारिक आयोजन से आगे बढ़ाकर एक भावनात्मक अवसर में बदल दिया। शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों के स्नेह को आत्मीयता से स्वीकार किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मां सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्वलन से हुआ समारोह का शुभारंभ
जीएम एकेडमी शिक्षक दिवस समारोह का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद उन्होंने महान शिक्षाविद और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना और गणेश वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

दीप प्रज्वलन के साथ ही विद्यालय परिसर में ज्ञान, संस्कार और गुरु-परंपरा की उस भारतीय भावना का प्रतीकात्मक उद्घाटन हुआ, जिसमें शिक्षा को केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक बनाने वाली प्रक्रिया माना गया है।
प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। शिक्षक दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
नन्हे विद्यार्थियों की नाट्य प्रस्तुति ने जीता सबका दिल
समारोह में विद्यालय के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावकों के आपसी संबंधों पर आधारित नाट्य प्रस्तुति देकर दर्शकों का मन मोह लिया। छोटे-छोटे बच्चों की सहज अभिनय क्षमता, संवाद अदायगी और भाव-भंगिमाओं ने उपस्थित लोगों को प्रभावित किया।
नाट्य प्रस्तुति में यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व निर्माण में विद्यालय और परिवार दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षक जहां बच्चे को शिक्षा और अनुशासन की राह दिखाता है, वहीं माता-पिता उसके जीवन की पहली पाठशाला होते हैं। इन दोनों के सहयोग और समन्वय से ही बच्चे के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास संभव है।
बच्चों की प्रस्तुति के दौरान विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कई क्षण ऐसे भी आए जब दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान के साथ भावुकता भी दिखाई दी।
भाषण में गूंजी गुरु की महत्ता
शिक्षक दिवस समारोह में विद्यार्थियों ने भाषण के माध्यम से गुरु की महत्ता और गुरु-शिष्य संबंधों की गरिमा पर प्रकाश डाला। कक्षा आठ की अंकिता पांडेय और कक्षा 11 की छाया ने अपने प्रभावशाली भाषण से उपस्थित लोगों की खूब वाहवाही बटोरी।
दोनों छात्राओं ने अपने विचारों में शिक्षक को जीवन का मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा देने का कार्य करते हैं। उनकी सीख किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन के कठिन मोड़ों पर निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करती है।
उनके भाषण में गुरु के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और भारतीय शिक्षा परंपरा की झलक देखने को मिली। विद्यार्थियों के विचारों ने यह भी स्पष्ट किया कि आधुनिक शिक्षा के दौर में तकनीक और संसाधनों की भूमिका भले ही बढ़ गई हो, लेकिन शिक्षक का स्थान आज भी सर्वोपरि है।
नृत्य और गीतों ने बांधा सांस्कृतिक समां
शिक्षक दिवस समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विविधता ने आयोजन को और भी रंगीन बना दिया। जया शुक्ला और आराध्या ने एकल नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके नृत्य में भाव, लय और ताल का सुंदर संयोजन देखने को मिला।
इसके बाद अष्टमी एवं उनके समूह ने समूह नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण में ऊर्जा भर दी। विद्यार्थियों की सामूहिक प्रस्तुति ने दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। वहीं कक्षा सातवीं के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मैशअप डांस समारोह का विशेष आकर्षण रहा। अलग-अलग गीतों और नृत्य शैलियों के सुंदर संयोजन ने कार्यक्रम में ऐसा उत्साह पैदा किया कि पूरा परिसर तालियों और उत्साह से गूंज उठा।

कार्यक्रम में साधना मिश्रा के गीत की भी उपस्थित लोगों ने जमकर सराहना की। उनकी प्रस्तुति ने समारोह में संगीत की मधुरता घोल दी। इसी क्रम में मुन्ना चौहान की रंगोली ने भी सभी का ध्यान आकर्षित किया। रंगों और आकृतियों के सुंदर संयोजन से तैयार रंगोली ने विद्यालय परिसर की सजावट में सांस्कृतिक सौंदर्य का एक और रंग जोड़ दिया।
शिक्षकों ने विद्यार्थियों को दिखाई उज्ज्वल भविष्य की राह
समारोह के दौरान रवि शंकर त्रिपाठी, परमानंद गोस्वामी, डी. मिश्रा, ज्ञानेंद्र मिश्र और आशुतोष तिवारी ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने बच्चों को मेहनत, अनुशासन, ईमानदारी और निरंतर सीखने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन मनुष्य के भविष्य की नींव तैयार करने का समय होता है। इस दौरान मिली अच्छी आदतें और संस्कार जीवनभर साथ चलते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर रहते हुए शिक्षकों के मार्गदर्शन का लाभ उठाना चाहिए।
वक्ताओं ने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता केवल अच्छे अंक प्राप्त करने से नहीं मिलती, बल्कि अच्छे संस्कार, सही सोच, परिश्रम और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी जीवन की सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
शिक्षकों को उपहार भेंट कर किया सम्मान
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने विद्यालय के सभी शिक्षकों को उपहार भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार में आत्मीयता और सम्मान का वातावरण दिखाई दिया।
प्रधानाचार्य ने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन शिक्षा, संस्कार और आदर्शों के प्रति समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल है। शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों को बधाई देने का दिन नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी और गुरु के प्रति सम्मान को समझने का अवसर भी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने शिक्षकों का सम्मान करने और उनके मार्गदर्शन का अनुसरण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने विद्यार्थियों में छिपी संभावनाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को शिक्षक की डांट में भी सुधार की भावना और उनकी सीख में अपने उज्ज्वल भविष्य का संदेश देखना चाहिए।
‘शिक्षक होते भाग्य विधाता’ से भावनाओं को मिला साहित्यिक स्वर
प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने अपने संबोधन में कविता के अंदाज में कहा—
“शिक्षक होते भाग्य विधाता,
मात-पिता जस है यह नाता।”
इन पंक्तियों ने समारोह के वातावरण को भावनात्मक बना दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक के रूप में हमारा धर्म केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं है। हमारा दायित्व है कि हम बच्चों को माता-पिता की तरह स्नेह देते हुए उन्हें उचित दिशा दें, उनके व्यक्तित्व का विकास करें और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार करें।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी अपने भीतर संभावनाओं का एक संसार लेकर विद्यालय आता है। शिक्षक का कार्य उन संभावनाओं को पहचानना और उन्हें सही दिशा देना है। यही प्रक्रिया आगे चलकर राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव तैयार करती है।
उनके इस विचार में शिक्षक दिवस की मूल भावना भी दिखाई दी—शिक्षक और विद्यार्थी का रिश्ता केवल कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि विश्वास, संस्कार और मार्गदर्शन का रिश्ता है।
गुरु-शिष्य संबंधों की आत्मीयता ने समारोह को बनाया यादगार
जीएम एकेडमी में शिक्षक दिवस का यह आयोजन इसलिए भी खास रहा, क्योंकि इसमें विद्यार्थियों ने केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ही नहीं दीं, बल्कि अपने शिक्षकों के प्रति मन में बसे सम्मान और कृतज्ञता को भी अभिव्यक्त किया।
किसी ने गीत के माध्यम से गुरु का गुणगान किया, किसी ने नृत्य से अपनी भावनाएं व्यक्त कीं तो किसी ने भाषण और नाटक के माध्यम से शिक्षा तथा संस्कार की महत्ता बताई। इस तरह पूरा समारोह गुरु-शिष्य संबंधों के विभिन्न रंगों से सजा नजर आया।

भारतीय परंपरा में गुरु को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शक माना गया है। शिक्षक दिवस जैसे आयोजन इसी परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने का कार्य करते हैं। बदलते समय में शिक्षा की पद्धतियां भले बदल रही हों, लेकिन शिक्षक के प्रति सम्मान और उनके मार्गदर्शन की आवश्यकता आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
मिठाई वितरण के साथ हुआ समारोह का समापन
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों के बीच मिठाइयों का वितरण किया गया। बच्चों के चेहरों पर खुशी और शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना पूरे समारोह के दौरान बनी रही।
गुरु के प्रति श्रद्धा, विद्यार्थियों का उत्साह, शिक्षकों का स्नेह और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की रंगीन छटा ने जीएम एकेडमी का शिक्षक दिवस समारोह यादगार बना दिया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि संस्कारवान, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है।
कार्यक्रम का सफल एवं व्यवस्थित संचालन प्रमोद कुमार यादव, एस.के. गुप्ता, अनन्या तिवारी और मेधा मिश्रा ने किया। सभी के समन्वित प्रयासों से समारोह गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने गुरु-शिष्य परंपरा की उस खूबसूरत तस्वीर को जीवंत कर दिया, जिसमें शिक्षक अपने विद्यार्थियों के भविष्य के निर्माता और विद्यार्थी अपने गुरु के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता से भरे शिष्य दिखाई देते हैं। शिक्षक दिवस की यही आत्मीयता समारोह की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।
























