राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव : नए CEO के बाद वित्तीय व्यवस्था पर भी कड़ी नजर

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में बदलाव को दर्शाती तस्वीर, रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी और मंदिर की पृष्ठभूमि

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

अयोध्या।। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए बड़े प्रशासनिक बदलाव के बाद अब राम मंदिर की व्यवस्था को नई गति देने की कवायद तेज हो गई है। ट्रस्ट में पहली बार पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति, महासचिव की जिम्मेदारी में बदलाव और नए कोषाध्यक्ष की तैनाती के बाद आने वाले दिनों में मंदिर प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालु सुविधाओं से जुड़े कामों में तेजी दिखाई देने की उम्मीद है।

ट्रस्ट ने 2 सितंबर 2026 को पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला सीईओ नियुक्त किया। इसके साथ ही पहले कोषाध्यक्ष रहे स्वामी गोविंद देव गिरि को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई, जबकि नवनियुक्त ट्रस्टी महेश भागचंदका को नया कोषाध्यक्ष बनाया गया। ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टियों—महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडेय और डॉ. निर्मला यादव—की नियुक्ति भी की गई है। डॉ. निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी बनी हैं।

अयोध्या पहुंचते ही कामकाज समझने में जुटे CEO जितेंद्र मिश्रा

नई जिम्मेदारी संभालने के बाद सीईओ जितेंद्र मिश्रा ने अयोध्या पहुंचकर ट्रस्ट की मौजूदा कार्यप्रणाली को समझना शुरू कर दिया। उन्होंने ट्रस्टियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं और मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, संचालन, सुरक्षा, श्रद्धालु प्रबंधन तथा भविष्य की योजनाओं से संबंधित जानकारी ली।

जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार सीईओ के चयन की प्रक्रिया में हजारों आवेदन आए थे और विस्तृत चयन प्रक्रिया के बाद उनका नाम सामने आया।

अब तक मंदिर ट्रस्ट के अनेक महत्वपूर्ण कार्य ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अलग-अलग समितियों के माध्यम से संचालित होते रहे हैं। ऐसे में एक पूर्णकालिक सीईओ की मौजूदगी से प्रशासनिक जिम्मेदारियों का केंद्रीकरण और निर्णय प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।

ट्रस्ट के नए महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि ने भी स्पष्ट किया है कि सीईओ और महासचिव के बीच समन्वय के साथ काम होगा। इससे संकेत है कि आने वाले समय में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन ट्रस्ट की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

See also  राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पहले CEO की नियुक्ति पर सियासी बयानबाजी तेज, बृजभूषण बोले — पहले होती नियुक्ति तो नहीं खड़ा होता विवाद

नए कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका की सक्रियता बढ़ी

दूसरी ओर, नए कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका ने भी जिम्मेदारी संभालने के बाद अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। उन्होंने पूर्व महासचिव चंपत राय से मुलाकात की और इसके बाद सीईओ तथा अन्य ट्रस्टियों के साथ बैठकों में हिस्सा लिया।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी ऐसे समय में बदली है, जब मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़े कथित अनियमितता और चोरी के आरोपों को लेकर विवाद सामने आया था। जून 2026 में इस मामले में एफआईआर दर्ज होने और बाद में जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ने की जानकारी सामने आई थी। शिकायत में मंदिर में आने वाली भेंट और चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान कथित चोरी, गबन और हेराफेरी के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, आरोपों की जांच और कानूनी प्रक्रिया को अंतिम निष्कर्ष से अलग रखकर देखा जाना जरूरी है।

यही वजह है कि ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था को लेकर अब पारदर्शिता और निगरानी पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।

दिल्ली से CA टीम लाने की तैयारी, वित्तीय रिकॉर्ड की होगी निगरानी

नए कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका के साथ दिल्ली से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की टीम के आने की जानकारी सामने आई है। यह टीम ट्रस्ट की आय, व्यय, चढ़ावे और अन्य वित्तीय व्यवस्थाओं को समझने तथा लेखा-जोखा की निगरानी में सहयोग करेगी।

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि अयोध्या में पहले से काम कर रहे स्थानीय स्तर के चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका तत्काल समाप्त हो जाएगी। मौजूदा वित्तीय व्यवस्था से जुड़े लोग अपना काम करते रहेंगे और नई टीम पहले से उपलब्ध रिकॉर्ड और व्यवस्था को समझने के बाद अपनी निगरानी की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।

सूत्रों के मुताबिक नई व्यवस्था में पुराने और नए वित्तीय तंत्र के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा। स्थानीय सीए से ट्रस्ट की वर्तमान वित्तीय व्यवस्था, खातों और रिकॉर्ड की जानकारी लेने के बाद दिल्ली की टीम नियमित अंतराल पर लेखा-जोखा तैयार कर सकती है और इसकी जानकारी कोषाध्यक्ष तक पहुंचाई जाएगी।

See also  देश की राजनीति में नए संकेत : भाजपा के भीतर असंतोष, विपक्ष की रणनीति और बदलते राजनीतिक समीकरण

हालांकि महेश भागचंदका ने इस संबंध में फिलहाल विस्तार से टिप्पणी करने से इनकार किया है। उनका कहना है कि उचित समय आने पर पूरी जानकारी साझा की जाएगी।

चढ़ावे की निगरानी क्यों बनी अहम?

राम मंदिर में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और भक्तों की ओर से दान, भेंट और अन्य माध्यमों से आर्थिक योगदान दिया जाता है। ऐसे में वित्तीय व्यवस्था का मजबूत, पारदर्शी और नियमित ऑडिट के दायरे में रहना ट्रस्ट के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

चढ़ावा विवाद के बाद वित्तीय रिकॉर्ड, संग्रह व्यवस्था और रकम की गिनती से लेकर बैंकिंग तथा लेखांकन तक हर स्तर पर निगरानी की अपेक्षा स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है।

इस लिहाज से नए कोषाध्यक्ष के साथ अलग सीए टीम की सक्रियता को केवल प्रशासनिक बदलाव के रूप में नहीं, बल्कि वित्तीय निगरानी को मजबूत करने की दिशा में उठाए जा रहे कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि इस व्यवस्था का वास्तविक स्वरूप और अधिकार क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया जाना बाकी है।

चंपत राय के बाद बदली जिम्मेदारियों की तस्वीर

राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में सबसे चर्चित बदलाव महासचिव पद को लेकर हुआ है। लंबे समय तक इस जिम्मेदारी को संभालने वाले चंपत राय की जगह अब स्वामी गोविंद देव गिरि को महासचिव बनाया गया है। इससे ट्रस्ट में जिम्मेदारियों का एक महत्वपूर्ण पुनर्विन्यास हुआ है।

वहीं, पहले कोषाध्यक्ष रहे गोविंद देव गिरि के स्थान पर महेश भागचंदका को यह जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह ट्रस्ट के प्रशासनिक और वित्तीय दोनों मोर्चों पर नए समीकरण बने हैं।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नई व्यवस्था मंदिर के रोजमर्रा के संचालन, निर्माण से जुड़े शेष कार्यों, श्रद्धालु सुविधाओं और वित्तीय प्रबंधन में कितना बदलाव लाती है।

जन्माष्टमी पर रामलला के दरबार में कृष्ण जन्मोत्सव

इसी प्रशासनिक हलचल के बीच राम मंदिर परिसर में शुक्रवार, 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव भी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। रामलला के सम्मुख मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव आयोजित किया गया।

See also  राजनीति से ऊपर दिखी रामभक्ति, अयोध्या में गूंज रहा सिर्फ एक नाम—'राम-राम'

राम मंदिर परिसर को इस अवसर के लिए विशेष रूप से सजाया गया था। मुख्य द्वार से लेकर गर्भगृह तक सजावट की गई। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया गया और रामलला को छप्पन भोग अर्पित किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

जन्माष्टमी के लिए मध्यरात्रि का समय धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई गई और निशिता काल में भगवान के जन्मोत्सव की पूजा का विशेष महत्व रहा।

अब असली परीक्षा नई व्यवस्था की

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए बदलाव को केवल पदों की अदला-बदली के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। सीईओ की नियुक्ति के साथ पहली बार प्रशासनिक संचालन के लिए एक पूर्णकालिक पेशेवर भूमिका सामने आई है। वहीं नए कोषाध्यक्ष की सक्रियता और वित्तीय निगरानी की संभावित नई व्यवस्था से ट्रस्ट के आर्थिक प्रबंधन पर भी नजर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

अब चुनौती यह होगी कि नई व्यवस्था कितनी तेजी से धरातल पर उतरती है। मंदिर के बढ़ते श्रद्धालु दबाव, दान और चढ़ावे की बड़ी वित्तीय व्यवस्था, निर्माण एवं विकास की योजनाएं और प्रतिदिन के प्रशासनिक कार्य—इन सभी के बीच तालमेल बनाना आसान नहीं होगा।

ऐसे में जितेंद्र मिश्रा के प्रशासनिक अनुभव, गोविंद देव गिरि की धार्मिक-सामाजिक भूमिका और महेश भागचंदका की वित्तीय जिम्मेदारी के बीच बेहतर समन्वय ट्रस्ट के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

फिलहाल अयोध्या में नए पदाधिकारियों की सक्रियता ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि राम मंदिर ट्रस्ट अब नई प्रशासनिक व्यवस्था के साथ अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि बैठकों और बदलावों का असर मंदिर के संचालन, वित्तीय पारदर्शिता और श्रद्धालु सुविधाओं पर कितनी तेजी से दिखाई देता है।

यायावर
Author: यायावर

यायावर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें