रिपोर्ट: ठाकुर बख्श सिंह
लखनऊ में करीब एक साल से पुलिस की तलाश से बच रही उज्बेकिस्तान की महिला लोला क्यूमोवा आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गई। पुलिस के मुताबिक, वह राजधानी के एक पॉश इलाके में पहचान बदलकर रह रही थी और इस दौरान उसका नेटवर्क उत्तर प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों तक फैलता रहा। लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहने वाली लोला की गिरफ्तारी किसी बड़े अभियान के बजाय एक चिकित्सकीय प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों से हुई।
लोला एक विदेशी महिला के इलाज के सिलसिले में सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र स्थित एक क्लीनिक पहुंची थी। जिस चिकित्सक की क्लीनिक पर वह पहुंची, उसका नाम भी करीब एक वर्ष पहले सामने आए एक मामले की पुलिस जांच से जुड़ा था। क्लीनिक में विदेशी नागरिक के इलाज से संबंधित औपचारिकताओं के तहत दस्तावेजों की जानकारी फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस यानी एफआरओ तक पहुंची। दस्तावेजों की जांच के दौरान लोला का नाम और उसकी पहचान सामने आने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
विदेशी नागरिक के इलाज की प्रक्रिया बनी गिरफ्तारी की वजह
पुलिस के अनुसार, सात अगस्त को तुर्कमेनिस्तान की एक महिला इलाज के लिए डॉक्टर विवेक गुप्ता की क्लीनिक पहुंची थी। विदेशी नागरिक के भारत में इलाज से संबंधित नियमों के तहत उसकी जानकारी और आवश्यक दस्तावेज एफआरओ को उपलब्ध कराए गए। महिला के पास मेडिकल वीजा तथा दिल्ली में इलाज से जुड़े कागजात भी मौजूद थे।
इसी प्रक्रिया के दौरान उसके साथ उपलब्ध कराए गए संदर्भ दस्तावेजों में लोला क्यूमोवा का आधार कार्ड भी सामने आया। पुलिस के मुताबिक, दस्तावेज देखते ही क्लीनिक स्तर से संबंधित जानकारी एफआरओ तक पहुंचाई गई। एफआरओ और पुलिस ने दस्तावेजों के आधार पर लोला की पहचान की और उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
यही वह प्रक्रिया थी, जिसके कारण करीब एक साल से पुलिस की नजरों से बचती आ रही लोला का ठिकाना सामने आया। जांच एजेंसियों के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस पहले से ही उसके खिलाफ दर्ज मुकदमे में उसकी तलाश कर रही थी।
एक साल से फरार थी लोला
सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस के मुताबिक, लोला के खिलाफ लगभग एक वर्ष पहले मामला दर्ज हुआ था। मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर थी। आरोप है कि उसने राजधानी में ही अपना ठिकाना बना लिया और लंबे समय तक सामान्य जीवन जीने की कोशिश करती रही।
जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि लोला ने एक भारतीय युवक से शादी करने का दावा किया था। इसी आधार पर उसके पास आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज भी तैयार हो गए। हालांकि पुलिस अभी उस युवक का पता नहीं लगा सकी है, जिसका नाम जनक प्रताप सिंह बताया जा रहा है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि लोला से जुड़े दस्तावेज वास्तविक हैं या उनमें किसी स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया है। यदि दस्तावेजों में अनियमितता मिलती है तो पुलिस यह भी जांच करेगी कि इन्हें तैयार कराने में किसी व्यक्ति अथवा विभागीय स्तर पर किसी की भूमिका रही है या नहीं।
ओमेक्स अपार्टमेंट की छापेमारी से जुड़ा था मामला
लोला का नाम इससे पहले जून 2025 में राजधानी में हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान सामने आया था। पुलिस को 21 जून 2025 को ओमेक्स अपार्टमेंट में कथित सेक्स रैकेट संचालित होने की सूचना मिली थी। कार्रवाई के दौरान उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं होलिडा और नीलोफर को गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस की जांच में दोनों महिलाओं के भारत में अवैध रूप से रहने की बात सामने आने का दावा किया गया था। जांच के दौरान जिस फ्लैट में कार्रवाई हुई, उसके संबंध एक डॉक्टर से बताए गए थे।
पुलिस पूछताछ में दोनों महिलाओं ने कथित तौर पर लोला के माध्यम से भारत आने और राजधानी में कुछ लोगों से संपर्क होने की जानकारी दी थी। जांच के दौरान पत्रकारपुरम और अहिमामऊ में मिनर्वा क्लीनिक संचालित करने वाले डॉक्टर विवेक गुप्ता का नाम भी सामने आया था। पुलिस के अनुसार, लोला के जरिए ही दोनों विदेशी महिलाओं की डॉक्टर से मुलाकात हुई थी और डॉक्टर ने उनका इलाज भी किया था।
इसी पुराने मामले में लोला की भूमिका जांच के दायरे में आई थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद उसकी तलाश की जा रही थी, लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं लगी थी।
क्लीनिक में पहले भी पहुंची थी लोला
डॉक्टर विवेक गुप्ता के अनुसार, लोला पहली बार फरवरी 2025 में उनकी क्लीनिक पर आई थी। उसने आंख के पास बने टैटू को हटवाने के लिए चिकित्सकीय सहायता मांगी थी। डॉक्टर के मुताबिक, उस समय उसके पास भारत से संबंधित दस्तावेज मौजूद थे।
डॉक्टर का कहना है कि दस्तावेजों में जनक प्रताप सिंह नामक व्यक्ति से उसकी शादी का उल्लेख था। चूंकि उस समय उसके पास भारतीय दस्तावेज मौजूद थे, इसलिए विदेशी नागरिक के इलाज से संबंधित अतिरिक्त प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं समझी गई।
इसके बाद लोला इलाज के लिए कई बार क्लीनिक पहुंची। डॉक्टर के अनुसार, बाद में उसने नाक से संबंधित परेशानी की शिकायत की। सांस लेने में दिक्कत की बात बताते हुए उसने उपचार की मांग की, जिसके बाद उसकी नाक की सेप्टोराइनोप्लास्टी की गई।
डॉक्टर ने पुलिस को दिए गए बयान में कथित तौर पर यह भी स्पष्ट किया कि लोला का इलाज टैटू हटाने और नाक से संबंधित समस्या के लिए किया गया था। उनके मुताबिक, बाद में उनके खिलाफ चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी और अन्य तरह की सर्जरी से जुड़े आरोप लगाए गए, जिन्हें उन्होंने गलत बताया।
दस्तावेजों की जांच से खुलेगा पूरा राज
लोला की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल उसके भारतीय दस्तावेजों को लेकर है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस किस प्रक्रिया के तहत बने और उनमें दर्ज जानकारी कितनी प्रमाणिक है।
पुलिस के मुताबिक, लोला ने जनक प्रताप सिंह से शादी होने की बात कही है। उसका दावा है कि उक्त व्यक्ति करीब दो महीने पहले उसे छोड़कर चला गया। पुलिस अभी तक उस व्यक्ति तक नहीं पहुंच सकी है। इसलिए जांच एजेंसियां यह सत्यापित करने का प्रयास कर रही हैं कि शादी वास्तव में हुई थी या दस्तावेज तैयार करने के लिए इस पहचान का इस्तेमाल किया गया।
सभी संबंधित दस्तावेजों को जांच के लिए भेजे जाने की बात कही गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दस्तावेज पूरी तरह फर्जी हैं, उनमें किसी तरह की छेड़छाड़ हुई है या उन्हें वैध प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया गया था।
भाषा बनी पूछताछ में बड़ी चुनौती
गिरफ्तारी के बाद पुलिस को लोला से पूछताछ में भाषा की समस्या का भी सामना करना पड़ा। पुलिस के अनुसार, लोला हिंदी नहीं जानती और केवल थोड़ी बहुत हिंदी समझती है। अंग्रेजी बोलने का उसका तरीका भी पूछताछ में बाधा पैदा कर रहा है।
ऐसे में पुलिस को उससे जानकारी हासिल करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं। जांच एजेंसियां उसके संपर्कों, राजधानी में रहने के ठिकानों और उन लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं, जिनसे वह लगातार संपर्क में थी।
पुलिस का दावा है कि शुरुआती जांच में राजधानी में रहकर कथित हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट नेटवर्क संचालित किए जाने के संकेत मिले हैं। हालांकि इस नेटवर्क की वास्तविक संरचना, इसमें शामिल अन्य लोगों और दूसरे राज्यों से इसके संभावित संबंधों की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
कई राज्यों तक नेटवर्क फैलने का दावा
पुलिस के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि लोला का संपर्क केवल लखनऊ तक सीमित नहीं था। उसके नेटवर्क के उत्तर प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों तक फैले होने की आशंका है। पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, संपर्कों, यात्रा विवरण और आर्थिक लेन-देन सहित अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच कर सकती है।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि विदेशी नागरिकों को भारत में ठहराने, रोजगार अथवा अन्य गतिविधियों से जोड़ने में किन लोगों की भूमिका रही। यदि पुलिस को दस्तावेजों या नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका के प्रमाण मिलते हैं तो मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
फिलहाल लोला क्यूमोवा की गिरफ्तारी ने उस पुराने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है, जिसमें विदेशी महिलाओं के राजधानी में कथित अवैध प्रवास और सेक्स रैकेट से जुड़े होने की जांच की जा रही थी। पुलिस के लिए अब चुनौती केवल लोला से पूछताछ तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके कथित नेटवर्क, भारतीय दस्तावेजों की वास्तविकता और उसके संपर्कों की पूरी कड़ी सामने लाने की है।
जांच के अहम सवाल
इस पूरे मामले में पुलिस की जांच मुख्य रूप से कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर केंद्रित है—लोला को भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज कैसे मिले, जनक प्रताप सिंह कौन है, उसके साथ विवाह का दावा कितना सही है, राजधानी में उसका वास्तविक ठिकाना और गतिविधियां क्या थीं तथा कथित नेटवर्क में उसके साथ कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।
इन सवालों के जवाब दस्तावेजी जांच, पुलिस पूछताछ और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सामने आएंगे। फिलहाल पुलिस ने लोला को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

























