ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
बरेली। मोहब्बत के शहर बरेली ने शनिवार को एक बार फिर देश के सामने अपनी गंगा-जमुनी तहजीब की ऐसी खूबसूरत तस्वीर पेश की, जिसमें आस्था के दो अलग-अलग रंग एक साथ नजर आए। एक ओर उर्स-ए-रजवी में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे लाखों अकीदतमंद आला हजरत की मोहब्बत और उनकी शिक्षाओं के संदेश के साथ अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे थे, तो दूसरी ओर सावन के पवित्र महीने में कांवड़ लेकर निकले शिवभक्त हर-हर महादेव, बम-बम भोले के जयघोष से वातावरण को भक्तिमय बना रहे थे।
दोनों धार्मिक आयोजनों की आस्था और परंपराएं भले ही अलग थीं, लेकिन बरेली की सड़कों पर दिखाई देने वाला संदेश एक था—एक-दूसरे की आस्था का सम्मान, भाईचारा और सामाजिक सौहार्द।
कहीं कांवड़ियों के स्वागत में पुष्पवर्षा होती दिखाई दी तो कहीं उर्स में शामिल जायरीन ने कांवड़ियों के लिए रास्ता खाली कर दिया। कई स्थानों पर दोनों समुदायों के लोगों ने संयम और सहयोग का परिचय देते हुए धार्मिक आयोजनों को शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाने में प्रशासन का साथ दिया। भारी भीड़, अलग-अलग धार्मिक आयोजनों और व्यस्त सड़कों के बीच भी बरेली ने सौहार्द का जो संदेश दिया, वह शहर की साझा संस्कृति की मिसाल बन गया।
एक शहर, दो आस्थाएं और सम्मान की साझा भावना
शनिवार को बरेली में धार्मिक गतिविधियों का असाधारण संगम देखने को मिला। एक तरफ उर्स-ए-रजवी का प्रमुख कार्यक्रम और कुल शरीफ था, जिसमें बड़ी संख्या में जायरीन शामिल हुए। दूसरी ओर सावन की कांवड़ यात्रा के तहत शिवभक्तों के जत्थे लगातार शहर और आसपास के इलाकों से गुजरते रहे।
उर्स के दौरान आला हजरत की मोहब्बत में धार्मिक सदाएं बुलंद होती रहीं तो कांवड़ियों के जत्थों के साथ हर-हर महादेव और बम-बम भोले के उद्घोष सुनाई देते रहे। दोनों धार्मिक आयोजनों के बीच कई जगहों पर रास्ते और भीड़ का दबाव साझा था। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के बीच किसी प्रकार का टकराव देखने को नहीं मिला।
प्रशासन की व्यवस्था के साथ आम लोगों के सहयोग ने स्थिति को संभाले रखा। जिन रास्तों पर कांवड़ियों के जत्थे गुजर रहे थे, वहां उर्स में शामिल लोगों ने उनके आवागमन के लिए जगह बनाई। वहीं कांवड़ यात्रा के मार्गों पर भी श्रद्धालुओं ने दूसरे आयोजन में शामिल लोगों के प्रति सम्मान का भाव दिखाया।
यह दृश्य केवल प्रशासनिक व्यवस्था का परिणाम नहीं था, बल्कि बरेली की उस सामाजिक संस्कृति का भी परिचायक था, जिसमें अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के लोग लंबे समय से एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते आए हैं।
उर्स के दौरान शाकाहारी भोजन की पहल ने दिया खास संदेश
इस बार उर्स-ए-रजवी के दौरान एक विशेष पहल भी चर्चा में रही। सावन और कांवड़ यात्रा को ध्यान में रखते हुए उर्स में आने वाले जायरीन के लिए शाकाहारी भोजन परोसने की व्यवस्था की गई।
इस पहल को धार्मिक सहिष्णुता और पारस्परिक सम्मान की भावना से जोड़कर देखा गया। संदेश स्पष्ट था कि हर व्यक्ति अपनी धार्मिक परंपरा और आस्था का पालन करे, लेकिन साथ ही दूसरे धर्म की मान्यताओं और भावनाओं का भी सम्मान किया जाए।
उर्स से जुड़े लोगों की इस पहल का असर शहर के माहौल में भी दिखाई दिया। धार्मिक आयोजनों की भीड़ के बीच एक-दूसरे की आस्था के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखने की कोशिश होती रही। ऐसे समय में जब एक ही शहर में अलग-अलग समुदायों के बड़े धार्मिक आयोजन एक साथ चल रहे हों, यह पहल सामाजिक सौहार्द की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी गई।
रास्ते अलग किए, दिलों में नहीं आई दूरी
शनिवार को शहर के कई हिस्सों में उर्स के जायरीन और कांवड़ियों की आवाजाही एक साथ दिखाई दी। पुलिस-प्रशासन ने दोनों आयोजनों को ध्यान में रखते हुए रूट डायवर्जन, बैरिकेडिंग और यातायात प्रबंधन की विस्तृत व्यवस्था की थी।
जहां आवश्यक हुआ, वहां दोनों आयोजनों के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए। बैरिकेडिंग के माध्यम से पैदल श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की गई। इसका उद्देश्य केवल भीड़ को व्यवस्थित करना नहीं था, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना था कि धार्मिक आयोजनों में शामिल लोगों के साथ आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
कई स्थानों पर कांवड़ियों के जत्थे गुजरते समय उर्स में शामिल लोगों ने स्वेच्छा से सड़क का हिस्सा खाली कर दिया। इसी तरह कई जगहों पर स्वागत और पुष्पवर्षा के दृश्य भी सामने आए।
बरेली की सड़कों पर यह संदेश साफ दिखाई दिया कि आस्था के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन सम्मान और इंसानियत का रास्ता साझा हो सकता है।
लाखों की भीड़ के बीच प्रशासन की कड़ी निगरानी
उर्स-ए-रजवी और सावन की कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप अधिकारियों ने दोनों धार्मिक आयोजनों को लेकर पहले से ही सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की रणनीति तैयार की थी।
शनिवार को उर्स-ए-रजवी का कुल शरीफ संपन्न होने के साथ ही उर्स का समापन हुआ। इसी दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों से कांवड़ियों के जत्थों का आवागमन भी जारी रहा।
बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही के बावजूद प्रशासन की संयुक्त रणनीति और लगातार निगरानी के कारण स्थिति नियंत्रण में रही। वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं कई महत्वपूर्ण स्थानों का निरीक्षण किया और मौके की स्थिति के अनुसार अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दिए।
सड़क से कंट्रोल रूम तक अफसरों की नजर
सुरक्षा और व्यवस्था की निगरानी केवल सड़कों तक सीमित नहीं रही। वरिष्ठ अधिकारियों ने फील्ड में मौजूद रहकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया, जबकि इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के माध्यम से शहर के विभिन्न हिस्सों पर नजर रखी गई।
एडीजी जोन रमित शर्मा, कमिश्नर शंभू कुमार, डीआईजी अजय कुमार साहनी, डीएम अविनाश सिंह, एसएसपी अनुराग आर्य, एसपी सिटी मानुष पारीख और एसपी साउथ आंशिक वर्मा सहित वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे।
अधिकारियों ने चौकी चौराहा, पटेल चौक, बिहारीपुर, सिविल लाइंस सहित उर्स और कांवड़ यात्रा से जुड़े प्रमुख मार्गों तथा संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया।
किसी स्थान पर भीड़ का दबाव बढ़ने की सूचना मिलते ही वहां तैनात पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इससे भीड़ को समय रहते नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिली।
सीसीटीवी कैमरों से लाइव निगरानी
इस बार भीड़ प्रबंधन में तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया। पुलिस लाइन स्थित इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से शहर के विभिन्न हिस्सों में लगे सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड के माध्यम से निगरानी की गई।
जिन स्थानों पर श्रद्धालुओं की संख्या अधिक थी, वहां विशेष नजर रखी गई। अधिकारियों को भीड़ के स्वरूप और उसकी दिशा की जानकारी लगातार मिलती रही।
किसी स्थान पर लोगों की भीड़ सड़क पर अधिक बढ़ती दिखाई दी या लोग ऊंचे स्थानों पर चढ़ते नजर आए तो तत्काल मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए गए। इससे संभावित अव्यवस्था को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करने की कोशिश की गई।
पब्लिक एड्रेस सिस्टम से श्रद्धालुओं को दिए गए निर्देश
भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम का भी इस्तेमाल किया गया। कंट्रोल सेंटर से समय-समय पर अनाउंसमेंट कर श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्ग और व्यवस्था का पालन करने की अपील की गई।
जहां भीड़ का दबाव ज्यादा हुआ, वहां पुलिसकर्मियों को लोगों को व्यवस्थित करने और यातायात को सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए गए। इस व्यवस्था से भीड़ को एक जगह जमा होने से रोकने और आवागमन को नियंत्रित करने में मदद मिली।
धार्मिक आयोजनों के दौरान पब्लिक एड्रेस सिस्टम का इस्तेमाल इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि लाखों लोगों की मौजूदगी में केवल पुलिसकर्मियों के जरिए प्रत्येक स्थान तक संदेश पहुंचाना आसान नहीं होता।
ट्रैफिक व्यवस्था पर रहा विशेष जोर
उर्स और कांवड़ यात्रा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यातायात प्रबंधन की भी रही। शहर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के साथ सामान्य यातायात को बनाए रखना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी।
एसपी ट्रैफिक अकमल खान के नेतृत्व में यातायात पुलिस ने प्रमुख मार्गों और चौराहों पर व्यवस्था संभाली। भीड़ के दबाव वाले स्थानों पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।
बैरिकेडिंग के जरिए पैदल श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया। जरूरत के अनुसार मार्गों पर व्यवस्था में बदलाव किया जाता रहा, ताकि उर्स में शामिल जायरीन और कांवड़ियों के जत्थों के साथ आम नागरिकों की आवाजाही भी प्रभावित न हो।
पुलिस का पूरा प्रयास रहा कि धार्मिक आयोजनों की विशाल भीड़ के बावजूद शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराने न पाए।
बरेली ने फिर दिखाया भाईचारे का रास्ता
शनिवार का दिन बरेली के लिए केवल दो बड़े धार्मिक आयोजनों के सफल आयोजन का दिन नहीं रहा, बल्कि यह शहर की सामाजिक एकजुटता का संदेश देने वाला अवसर भी बना।
एक ओर कांवड़ियों की धार्मिक ऊर्जा और हर-हर महादेव का जयघोष था, दूसरी ओर उर्स में शामिल अकीदतमंदों की धार्मिक भावनाएं और आला हजरत के प्रति श्रद्धा। इन दोनों के बीच यदि कोई चीज साझा थी तो वह थी—एक-दूसरे की आस्था के प्रति सम्मान।
भीड़ के बीच रास्ता देना, जरूरत पड़ने पर सहयोग करना, पुष्पवर्षा से स्वागत करना और प्रशासन की व्यवस्था में सहयोग देना इस बात का संकेत रहा कि धार्मिक विविधता के बीच भी सामाजिक सौहार्द कायम रखा जा सकता है।
बरेली की यह तस्वीर इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि एक ही समय में दो बड़े धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी थी। इसके बावजूद लोगों ने संयम और समझदारी का परिचय दिया।
आस्था अलग, संदेश एक—मोहब्बत और सौहार्द
नाथ नगरी की इस तस्वीर ने एक बार फिर यह साबित किया कि धार्मिक आस्था मनुष्य को जोड़ने का माध्यम भी बन सकती है। जब अपनी आस्था के साथ दूसरे की आस्था के लिए भी सम्मान का भाव जुड़ता है, तब धार्मिक विविधता सामाजिक ताकत में बदल जाती है।
उर्स-ए-रजवी और कांवड़ यात्रा के एक साथ गुजरते इस दौर में बरेली की सड़कों पर यही संदेश दिखाई दिया—हर-हर महादेव की गूंज और आला हजरत की सदाएं अलग-अलग धार्मिक परंपराओं की पहचान हो सकती हैं, लेकिन दोनों के बीच इंसानियत, भाईचारे और मोहब्बत की साझा जमीन मौजूद है।
पुलिस-प्रशासन की सतर्कता, तकनीकी निगरानी और यातायात प्रबंधन ने इस बड़े आयोजन को व्यवस्थित रखने में भूमिका निभाई, लेकिन व्यवस्था की सफलता में आम नागरिकों और श्रद्धालुओं का सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा।
शनिवार को बरेली ने अपने इसी साझा संस्कार को फिर से सामने रखा। आस्था के दो रंग एक साथ दिखाई दिए, लेकिन शहर का रंग एक ही रहा—मोहब्बत, भाईचारा और गंगा-जमुनी तहजीब।

























