रिपोर्ट: संजय सिंह राणा, चित्रकूट
चित्रकूट जनपद में प्रयागराज को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-35 (NH-35) इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा में है। जिला मुख्यालय कर्वी के पुलिस लाइन तिराहा (खोह) से ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र तक सड़क के दोनों किनारों पर लंबे समय से जलभराव और गंदगी का अंबार लगा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभागों की उदासीनता के कारण समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। यदि समय रहते इसका समाधान नहीं किया गया तो करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित यह राष्ट्रीय राजमार्ग भी क्षतिग्रस्त हो सकता है।
बारिश के मौसम में सड़क किनारे जमा पानी अब केवल स्वच्छता का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह राजमार्ग की मजबूती और यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनता जा रहा है। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
सड़क किनारे जलभराव से कमजोर हो रही राजमार्ग की संरचना
चित्रकूट से प्रयागराज की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-35 पर पुलिस लाइन तिराहे के पास सड़क के दोनों ओर पानी भरा हुआ है। स्थानीय निवासियों के अनुसार आसपास के क्षेत्रों का निकासी जल लगातार सड़क किनारे जमा हो रहा है। पर्याप्त जल निकासी व्यवस्था न होने के कारण यह पानी कई दिनों तक वहीं ठहरा रहता है।
सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के अनुसार यदि सड़क के किनारों पर लंबे समय तक पानी जमा रहे तो सड़क की नींव कमजोर होने लगती है। इससे सड़क की परतों में नमी प्रवेश करती है, जिसके कारण गड्ढे बनने, किनारे धंसने और सड़क की आयु कम होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र की गंदगी बनी बड़ी समस्या
नगर पालिका परिषद चित्रकूट धाम कर्वी के अंतर्गत आने वाले ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में भी हालात चिंताजनक बताए जा रहे हैं। सड़क किनारे फैली गंदगी और जलभराव से न केवल आवागमन प्रभावित हो रहा है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों को दुर्गंध और मच्छरों की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र का पानी सीधे सड़क किनारे फैल रहा है, लेकिन निकासी के लिए नालियों की नियमित सफाई अथवा अन्य प्रभावी व्यवस्था नहीं की जा रही। परिणामस्वरूप समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
राष्ट्रीय राजमार्ग के रखरखाव और संरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) तथा संबंधित निर्माण एवं अनुरक्षण एजेंसियों की होती है। वहीं स्थानीय स्तर पर जल निकासी और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करना नगर निकाय की जिम्मेदारी मानी जाती है।
ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि यदि लंबे समय से सड़क किनारे जलभराव बना हुआ है तो संबंधित विभागों ने अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं किया। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि विभागों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
यात्रियों की सुरक्षा पर भी मंडरा रहा खतरा
बारिश के दौरान सड़क किनारे भरे पानी के कारण कई बार सड़क की वास्तविक चौड़ाई का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। रात के समय यह स्थिति और अधिक जोखिमपूर्ण हो जाती है। यदि सड़क के किनारे कटाव बढ़ता है तो दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ सकती है।
राष्ट्रीय राजमार्ग होने के कारण इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क की गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
समय रहते नहीं हुई कार्रवाई तो बढ़ सकता है नुकसान
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक अवस्था में जल निकासी और मरम्मत पर अपेक्षाकृत कम खर्च आता है, जबकि लंबे समय तक अनदेखी करने पर पूरी सड़क के पुनर्निर्माण की नौबत आ सकती है। इससे सरकारी धन का अतिरिक्त व्यय भी होगा और लंबे समय तक यातायात प्रभावित होने की संभावना भी बनी रहेगी।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सड़क किनारे जमा पानी की तत्काल निकासी कराई जाए, नालियों की सफाई कराई जाए तथा जिन स्थानों पर जलभराव हो रहा है वहां स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था विकसित की जाए।
जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले का संज्ञान लेकर संबंधित विभागों के साथ संयुक्त निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अभी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो राष्ट्रीय राजमार्ग-35 की स्थिति और अधिक खराब हो सकती है।
लोगों का यह भी कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने राष्ट्रीय राजमार्ग का संरक्षण केवल निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समय-समय पर रखरखाव और जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
समस्या के समाधान की ओर बढ़ने की जरूरत
राष्ट्रीय राजमार्ग किसी भी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों और आवागमन की जीवनरेखा होते हैं। चित्रकूट जैसे धार्मिक एवं पर्यटन महत्व वाले जिले में सड़क की बेहतर स्थिति और स्वच्छ परिवेश यात्रियों के अनुभव को भी बेहतर बनाता है। ऐसे में संबंधित विभागों, नगर पालिका और जिला प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित कर इस समस्या का शीघ्र समाधान करना समय की आवश्यकता है।
यदि जलभराव और गंदगी की समस्या का स्थायी निदान नहीं किया गया तो भविष्य में सड़क की क्षति, दुर्घटनाओं का खतरा और सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करते हैं और राष्ट्रीय राजमार्ग-35 को संभावित क्षति से बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।













