कीरत यादव की रिपोर्ट
जौनपुर जनपद के सुइथाकला विकासखंड में बिजली व्यवस्था एक बार फिर गंभीर संकट का विषय बन गई है। देश जहां विकसित भारत के लक्ष्य और विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाओं की दिशा में आगे बढ़ने के दावे कर रहा है, वहीं सुइथाकला क्षेत्र के हजारों ग्रामीण आज भी नियमित और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से क्षेत्र में लगातार बिजली कटौती और कम वोल्टेज की समस्या ने लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि पूरी-पूरी रात बिजली गायब रहती है, जबकि दिन के समय भी केवल कुछ घंटों के लिए ही आपूर्ति हो रही है।
बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण घरेलू जीवन के साथ-साथ व्यापार, शिक्षा और कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि जो बिजली मिलती भी है, वह इतनी कम वोल्टेज की होती है कि सामान्य घरेलू उपकरण भी ठीक से नहीं चल पाते। इससे उमस भरे मौसम में लोगों की परेशानियां कई गुना बढ़ गई हैं।
कम वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग से बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या केवल बिजली कटौती नहीं, बल्कि कम वोल्टेज और लगातार ट्रिपिंग भी है। कई बार बिजली कुछ मिनटों के लिए आती है और फिर अचानक चली जाती है। इससे न केवल दैनिक कार्य प्रभावित होते हैं, बल्कि विद्युत उपकरणों के खराब होने का भी खतरा बना रहता है।
कम वोल्टेज के कारण पंखे बेहद धीमी गति से चलते हैं, बल्ब पर्याप्त रोशनी नहीं दे पाते और मोटर, कूलर तथा अन्य आवश्यक उपकरण चलाना लगभग असंभव हो जाता है। इससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस के बीच पूरी रात जागकर बितानी पड़ रही है।
हर वर्ष दोहराई जाती हैं वही समस्याएं
क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग हर वर्ष गर्मी के मौसम में लगभग एक जैसे कारण बताकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करता है। कभी लाइन में फॉल्ट, कभी तार टूटने और कभी मरम्मत कार्य का हवाला देकर लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है।
ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब सर्दियों में बिजली की मांग अपेक्षाकृत कम होती है, तब जर्जर विद्युत लाइनें, ट्रांसफार्मर और अन्य उपकरणों की समय रहते मरम्मत या बदलाव क्यों नहीं किया जाता। उनका कहना है कि यदि पूर्व तैयारी की जाए तो गर्मी के मौसम में बार-बार होने वाली ऐसी समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।
लोगों का मानना है कि यह स्थिति विभागीय योजना और दीर्घकालिक तैयारी की कमी को दर्शाती है, जिसका खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित
लगातार बिजली कटौती का सबसे अधिक असर बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। उमस भरी रातों में बिजली न होने से लोगों को खुले में या बिना पंखे के रात गुजारनी पड़ रही है। कई परिवारों का कहना है कि रात भर जागने की वजह से बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन 18 से 20 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन सुइथाकला की वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है। यहां कई बार पूरे दिन में कुछ घंटे ही बिजली मिल पाती है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
बिजली संकट को लेकर क्षेत्र के लोगों ने जनप्रतिनिधियों के प्रति भी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि चुनाव के समय विकास और बेहतर सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बिजली जैसी मूलभूत समस्या पर जनप्रतिनिधियों की सक्रियता दिखाई नहीं देती।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि बिजली व्यवस्था को लेकर विभाग और शासन स्तर पर प्रभावी पहल करते, तो शायद क्षेत्र को इतनी गंभीर समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। लोगों की अपेक्षा है कि जनप्रतिनिधि केवल चुनावी वादों तक सीमित न रहें, बल्कि जनता की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए भी ठोस प्रयास करें।
132 केवी विद्युत उपकेंद्र की घोषणा अब तक अधूरी
सुइथाकला क्षेत्र के लोगों को 9 जुलाई 2025 का वह दिन आज भी याद है, जब ब्लॉक मुख्यालय में आयोजित “पेड़ माँ के नाम” कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने क्षेत्र में 132 केवी क्षमता वाले नए विद्युत उपकेंद्र की स्थापना की घोषणा की थी। उस समय लोगों को उम्मीद जगी थी कि इस परियोजना के शुरू होने से क्षेत्र की बिजली व्यवस्था में बड़ा सुधार होगा।
हालांकि लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो उपकेंद्र का निर्माण कार्य शुरू हो सका है और न ही बिजली आपूर्ति की स्थिति में कोई उल्लेखनीय बदलाव दिखाई दे रहा है। इससे लोगों में निराशा बढ़ी है और वे इसे केवल घोषणा तक सीमित योजना मान रहे हैं।
विभाग ने बताई देरी की वजह
बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता ए.के. धर्मा ने बताया कि क्षेत्र में 33 केवी की लगभग 40 किलोमीटर लंबी लाइन है। रात के समय यदि इस लाइन में कहीं फॉल्ट हो जाता है तो उसे ढूंढ़ने और ठीक करने में काफी समय लग जाता है। यही कारण है कि कई बार विद्युत आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है।
उन्होंने यह भी बताया कि ऊर्जा मंत्री द्वारा 132 केवी विद्युत उपकेंद्र की स्थापना की घोषणा की गई थी, लेकिन उपयुक्त भूमि उपलब्ध न होने के कारण परियोजना का प्रस्ताव अभी तक पूरा नहीं हो सका है। भूमि की समस्या दूर होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तेज हो सकेगी।
स्थायी समाधान की मांग तेज
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अब अस्थायी मरम्मत और आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। बिजली व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत बनाने के लिए जर्जर लाइनों के आधुनिकीकरण, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, नियमित रखरखाव और प्रस्तावित 132 केवी विद्युत उपकेंद्र के निर्माण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में बिजली संकट और गंभीर हो सकता है। उनका मानना है कि बिजली केवल सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, व्यापार और सामान्य जीवन की मूलभूत आवश्यकता है।
जनता ने दी लोकतांत्रिक आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि बिजली व्यवस्था में शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करेंगे। उनका कहना है कि केवल घोषणाओं और दावों से लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। क्षेत्र को नियमित, गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।
सुइथाकला की मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि यदि बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए समयबद्ध और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो जनता का असंतोष और बढ़ सकता है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग और शासन स्तर पर कब ठोस कार्रवाई होती है और वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान कब सामने आता है।













