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झारखंड: लोकगायिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता नेहा सिंह राठौड़ के संबंध में एबीपी न्यूज के डिजिटल चैनल पर प्रसारित खबर को लेकर इप्टा झारखंड राज्य परिषद् ने कड़ा विरोध जताया है। 18 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में परिषद् ने संबंधित खबर को भ्रामक, अपमानजनक और नेहा सिंह राठौड़ की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री बताते हुए उसकी निंदा की है। परिषद् का कहना है कि किसी सार्वजनिक व्यक्तित्व के संबंध में गंभीर सामग्री प्रसारित करने से पहले तथ्यों की समुचित जांच-पड़ताल करना पत्रकारिता की बुनियादी जिम्मेदारी है। बिना पर्याप्त सत्यापन के किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा प्रभावित करने वाली सामग्री का प्रसारण मीडिया की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।
इप्टा झारखंड राज्य परिषद् ने नेहा सिंह राठौड़ के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा है कि वह अपने गीतों और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से जनता के सवालों तथा जन-सरोकारों को मुखरता से उठाती रही हैं। परिषद् के मुताबिक, ऐसे में उनके उठाए गए सवालों और विचारों का जवाब तथ्यों तथा तर्कों से देने के बजाय व्यक्तिगत आरोपों और अपमानजनक टिप्पणियों के जरिए निशाना बनाया जाना चिंताजनक प्रवृत्ति है। हालांकि, संबंधित खबर के वास्तविक तथ्यों, प्रसारण की परिस्थितियों और एबीपी न्यूज की ओर से दिए गए पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि इस प्रेस विज्ञप्ति से नहीं होती है।
एबीपी न्यूज की खबर पर इप्टा ने उठाए सवाल
प्रेस विज्ञप्ति में इप्टा झारखंड राज्य परिषद् ने कहा है कि पत्रकारिता का दायित्व केवल समाचार प्रसारित करना नहीं, बल्कि तथ्यों की पुष्टि करना, संबंधित पक्ष का पक्ष जानना और जनहित में जिम्मेदारी के साथ जानकारी प्रस्तुत करना भी है। परिषद् के अनुसार, किसी व्यक्ति के बारे में ऐसी सामग्री प्रसारित करना, जिससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता हो, पत्रकारिता की जवाबदेही और नैतिक मानकों के अनुरूप नहीं है।
परिषद् ने इस प्रकरण को केवल एक व्यक्ति से जुड़ा विवाद मानने के बजाय मीडिया की जवाबदेही और सार्वजनिक विमर्श की गुणवत्ता से जोड़कर देखा है। उसका तर्क है कि समाचार संस्थानों की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि वे संवेदनशील विषयों पर कितनी सावधानी से तथ्यों की जांच करते हैं। किसी आरोप या दावे को प्रकाशित अथवा प्रसारित करने से पहले उसकी सत्यता की पड़ताल करना आवश्यक है। समाचार में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना भी मीडिया की जिम्मेदारी है।
इप्टा की आपत्ति के केंद्र में यही सवाल है कि क्या संबंधित सामग्री के प्रसारण से पहले पर्याप्त जांच की गई थी। परिषद् ने अपने बयान में इस तरह की पत्रकारिता को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के लिए चिंताजनक बताया है और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।
जन-सरोकारों को गीतों के माध्यम से उठाती रही हैं नेहा सिंह राठौड़
नेहा सिंह राठौड़ लोकगीतों और सामाजिक विषयों पर आधारित अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के कारण जानी जाती हैं। उनके गीतों में सामाजिक परिस्थितियों, जनजीवन और सार्वजनिक मुद्दों पर सवाल उठाने की शैली देखने को मिलती है। इप्टा झारखंड राज्य परिषद् ने भी अपनी प्रेस विज्ञप्ति में उनके इसी पक्ष का उल्लेख करते हुए कहा है कि वह जनता के सवालों और जन-सरोकारों को मुखरता से सामने रखती रही हैं।
लोकगीत भारतीय समाज में लंबे समय से जनभावनाओं, सामाजिक अनुभवों और राजनीतिक-सामाजिक परिस्थितियों को व्यक्त करने का माध्यम रहे हैं। जब लोककलाकार अपने गीतों के जरिए सार्वजनिक नीतियों, सामाजिक असमानताओं या व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाते हैं, तो उनकी रचनाएं मनोरंजन की सीमा से आगे बढ़कर सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन सकती हैं। ऐसे में कलाकार की अभिव्यक्ति, उसके विचारों की आलोचना और उसके निजी सम्मान के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
इप्टा का कहना है कि असहमति रखने वाले व्यक्ति की बात का जवाब तथ्यों और तर्कों के आधार पर दिया जाना चाहिए। विचारों से असहमति किसी व्यक्ति के अपमान या उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली अपुष्ट सामग्री के प्रसारण का औचित्य नहीं बन सकती। यह दृष्टिकोण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ जिम्मेदार सार्वजनिक संवाद की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
सवाल उठाने वालों को व्यक्तिगत आरोपों से निशाना बनाने पर चिंता
इप्टा झारखंड राज्य परिषद् ने अपनी विज्ञप्ति में कहा है कि आज सवाल उठाने वाले व्यक्तियों और संगठनों को तथ्यों एवं तर्कों के आधार पर जवाब देने के बजाय व्यक्तिगत आरोपों, अपमानजनक टिप्पणियों और सनसनीखेज खबरों के माध्यम से निशाना बनाए जाने की प्रवृत्ति बढ़ती दिखाई दे रही है। परिषद् के मुताबिक, ऐसी प्रवृत्ति संबंधित व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित करने के साथ-साथ पत्रकारिता की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी कमजोर कर सकती है।
लोकतंत्र में आलोचना और असहमति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नागरिकों, कलाकारों, लेखकों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक मुद्दों पर सवाल उठाने का अवसर मिलना चाहिए। इसी तरह, मीडिया को भी अपने कार्यों और प्रकाशित खबरों के लिए जवाबदेह रहना चाहिए। लेकिन स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद तभी संभव है, जब किसी भी पक्ष के दावों की जांच की जाए और व्यक्तिगत आरोपों को प्रमाणित तथ्यों के रूप में प्रस्तुत न किया जाए।
प्रेस विज्ञप्ति में परिषद् ने इस बात पर जोर दिया है कि स्वतंत्र पत्रकारिता का उद्देश्य सत्ता और व्यवस्था से सवाल करना, तथ्यों को सामने लाना तथा जनहित के मुद्दों को निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करना है। मीडिया की स्वतंत्रता के साथ उसकी सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। किसी खबर की लोकप्रियता, सनसनी या डिजिटल पहुंच से अधिक महत्वपूर्ण उसकी तथ्यात्मक विश्वसनीयता होनी चाहिए।
महिला की मुखर अभिव्यक्ति और चरित्रहनन की प्रवृत्ति पर सवाल
इप्टा झारखंड राज्य परिषद् ने अपने बयान में पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना का उल्लेख करते हुए कहा है कि जब कोई महिला अपनी आवाज बुलंद करती है, सवाल उठाती है या प्रचलित सत्ता और व्यवस्था को चुनौती देती है, तो कई बार उसके सवालों का जवाब देने के बजाय उसे चुप कराने की कोशिश की जाती है। परिषद् ने आरोप लगाया है कि ऐसी परिस्थितियों में महिला के चरित्र पर हमला करना उसे बदनाम करने का माध्यम बन सकता है।
यह टिप्पणी महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक सम्मान से जुड़े व्यापक सवालों को सामने लाती है। महिलाओं के विचारों से असहमति व्यक्त करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उस असहमति को निजी जीवन पर अपमानजनक टिप्पणियों में बदल देना स्वस्थ सार्वजनिक विमर्श के अनुकूल नहीं है। किसी महिला के विचारों, गीतों या सार्वजनिक वक्तव्यों की आलोचना तथ्यों के आधार पर की जा सकती है; इसके लिए उसके चरित्र को निशाना बनाना आवश्यक नहीं है।
परिषद् का मानना है कि महिलाओं की स्वतंत्र आवाज को कमजोर करने वाली प्रवृत्तियां केवल संबंधित महिला तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि समाज में अन्य महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी और अभिव्यक्ति पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। इसलिए मीडिया सहित सभी सार्वजनिक संस्थाओं को ऐसी सामग्री के मामले में विशेष संवेदनशीलता, तथ्यपरकता और जवाबदेही का परिचय देना चाहिए।
सिर्फ खबर हटाना या खेद जताना पर्याप्त नहीं: इप्टा
इप्टा झारखंड राज्य परिषद् ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया है कि उसके विचार में यदि किसी खबर से किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है, तो केवल संबंधित सामग्री हटा देना या खेद व्यक्त कर देना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। परिषद् ने संबंधित सामग्री के प्रसारण की परिस्थितियों की समीक्षा करने, जवाबदेही सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता बताई है।
यह मांग मीडिया संस्थानों की आंतरिक संपादकीय प्रक्रिया और शिकायत निवारण व्यवस्था की अहमियत को सामने लाती है। किसी विवादित खबर के मामले में यह देखना जरूरी होता है कि सूचना का स्रोत क्या था, दावों की पुष्टि किस प्रकार की गई, संबंधित पक्ष से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास हुआ या नहीं और प्रकाशित सामग्री में तथ्य तथा टिप्पणी के बीच पर्याप्त अंतर रखा गया या नहीं। ऐसी समीक्षा से संस्थान अपनी संपादकीय प्रक्रियाओं में सुधार कर सकते हैं।
हालांकि, प्रेस विज्ञप्ति में उल्लिखित खबर के संबंध में एबीपी न्यूज की आधिकारिक प्रतिक्रिया, सामग्री हटाए जाने की स्थिति अथवा किसी जांच की पुष्टि उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसलिए इन बिंदुओं पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित समाचार संस्थान का पक्ष और अन्य प्रामाणिक जानकारी सामने आना आवश्यक होगा।
लोकतांत्रिक मर्यादा और मीडिया की विश्वसनीयता का सवाल
नेहा सिंह राठौड़ से संबंधित इस विवाद पर इप्टा झारखंड राज्य परिषद् की प्रतिक्रिया ने मीडिया की स्वतंत्रता, सामाजिक जवाबदेही, महिला सम्मान और अभिव्यक्ति की आजादी जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन उसके साथ तथ्यात्मक शुद्धता और निष्पक्षता की जिम्मेदारी भी आती है। इसी प्रकार, सार्वजनिक जीवन में सक्रिय व्यक्तियों के विचारों की आलोचना का अधिकार सभी को है, लेकिन आलोचना और व्यक्तिगत अपमान के बीच की सीमा का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है।
डिजिटल मीडिया के तेजी से विस्तार के दौर में समाचार कुछ ही समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे वातावरण में अपुष्ट दावों का प्रभाव भी व्यापक हो सकता है। इसलिए समाचार तैयार करने, संपादित करने और प्रसारित करने की प्रक्रिया में तथ्य-जांच, संदर्भ की स्पष्टता और संबंधित पक्ष का दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हैं। पाठकों और दर्शकों के लिए भी यह जरूरी है कि वे किसी सनसनीखेज दावे को अंतिम सत्य मानने से पहले उसकी पुष्टि करें।
इप्टा झारखंड राज्य परिषद् ने अंत में लोकगायिका नेहा सिंह राठौड़ के प्रति अपनी एकजुटता और समर्थन व्यक्त किया है। परिषद् की प्रेस विज्ञप्ति का मुख्य संदेश है कि लोकतंत्र में असहमति और सवाल उठाने के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए तथा सार्वजनिक विमर्श को तथ्यपरक, मर्यादित और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। अब इस प्रकरण में संबंधित समाचार संस्थान का पक्ष और उपलब्ध तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
इप्टा झारखंड राज्य परिषद् ने नेहा सिंह राठौड़ के समर्थन में जारी बयान में कथित भ्रामक खबर की निंदा करते हुए मीडिया की तथ्य-जांच, संपादकीय जवाबदेही, महिला सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर दिया है।
स्रोत: इप्टा झारखंड राज्य परिषद् की ओर से 18 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति।












