21 अक्टूबर 2026 12:09 पूर्वाह्न

चंबा हादसा : ‘सुबह साथ नाश्ता करेंगे’ कहकर निकला परिवार कभी घर नहीं लौटा, मूसलाधार बारिश ने भी मचाई तबाही

चंबा में सड़क हादसे और भारी बारिश से हुई तबाही का दृश्य, क्षतिग्रस्त मकान, राहत कार्य और रिपोर्टर गुरलीन कौर के साथ समाचार फीचर इमेज।

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गुरलीन कौर की रिपोर्ट

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में एक ही रात में दो ऐसी घटनाओं ने लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया, जिन्होंने पूरे क्षेत्र को शोक और चिंता में डुबो दिया। एक ओर सड़क दुर्घटना ने एक ही परिवार की पांच जिंदगियां छीन लीं, तो दूसरी ओर मूसलाधार बारिश और भूस्खलन ने शहर के कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। जहां एक परिवार अपने प्रियजनों के लौटने का इंतजार कर रहा था, वहीं कुछ ही घंटों बाद उसी घर में मातम पसर गया। दूसरी तरफ तेज बारिश के कारण मकान क्षतिग्रस्त हुए, नाले उफान पर आ गए और कई वाहन मलबे में दब गए।

‘ब्रेकफास्ट तैयार रखना, हम आठ बजे तक पहुंच जाएंगे’… आखिरी बातचीत बन गई याद

चंबा के गेहरा क्षेत्र के एक परिवार के लिए सोमवार रात की एक साधारण-सी फोन कॉल अब जिंदगी की सबसे दर्दनाक स्मृति बन गई है। परिवार के मुखिया बचन सिंह ने घर पर मौजूद अपनी पत्नी तृप्ता देवी को फोन कर भरोसा दिलाया था कि वे सुबह करीब आठ बजे तक घर पहुंच जाएंगे और सभी लोग एक साथ बैठकर नाश्ता करेंगे।

पति की यह बात सुनकर तृप्ता देवी पूरी तरह निश्चिंत हो गई थीं। उन्हें लगा कि परिवार का सफर सुरक्षित पूरा होने वाला है और घर में फिर से खुशियों का माहौल होगा। उन्होंने मन ही मन सुबह की तैयारियों की योजना भी बना ली थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। कुछ ही देर बाद ऐसा हादसा हुआ, जिसने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी।

एक ही हादसे में परिवार की पांच जिंदगियां खत्म

लाहड़ क्षेत्र के समीप देर रात हुई भीषण सड़क दुर्घटना में बचन सिंह, उनके पुलिस विभाग में कार्यरत पुत्र रिपन कुमार, पुत्रवधू रिम्पी, भतीजी कीर्ति तथा एक वर्षीय मासूम बच्चे की मौत हो गई। हादसे की सूचना जैसे ही गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।

जिस घर में परिवार के लौटने की खुशी में सुबह नाश्ता बनने वाला था, वहीं अब एक साथ पांच अंतिम यात्राओं की तैयारी होने लगी। यह दृश्य न केवल परिजनों बल्कि पूरे गांव के लिए बेहद भावुक और असहनीय साबित हुआ।

आखिरी वादा बन गया दर्दभरी याद

बताया जा रहा है कि तृप्ता देवी मंगलवार सुबह तक लगातार दरवाजे की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखती रहीं। उन्हें विश्वास था कि परिवार किसी भी समय घर पहुंच जाएगा। लेकिन उनके इंतजार का अंत खुशियों से नहीं बल्कि एक ऐसी खबर से हुआ जिसने पूरे परिवार को हमेशा के लिए बिखेर दिया।

पति द्वारा फोन पर कही गई सामान्य-सी बात—”ब्रेकफास्ट तैयार रखना, हम सब साथ बैठकर नाश्ता करेंगे”—अब पूरे गांव की आंखें नम कर देने वाली आखिरी याद बन चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी-कभी जिंदगी के सबसे सुंदर वादे भी पलभर में अधूरे रह जाते हैं।

गेहरा गांव में पसरा मातम

हादसे के बाद गेहरा गांव में शोक का माहौल है। गांव के लोग लगातार पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर सांत्वना दे रहे हैं। हर किसी की जुबान पर यही चर्चा है कि एक ही क्षण में पूरा परिवार उजड़ गया। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की घटना ने पूरे क्षेत्र को भीतर तक झकझोर दिया है।

मूसलाधार बारिश ने चंबा शहर में मचाई तबाही

इधर, चंबा शहर में सोमवार देर रात हुई तेज बारिश ने भी व्यापक नुकसान पहुंचाया। लगातार हुई बारिश के कारण कई नाले उफान पर आ गए और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं।

सबसे अधिक प्रभाव सुल्तानपुर वार्ड के ओबड़ी मोहल्ला और राणा कॉलोनी में देखने को मिला, जहां मलबा और बारिश का पानी रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया। लोगों के घरों में पानी, पत्थर और मिट्टी भर गई, जिससे भारी नुकसान हुआ।

दो मकान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त

द्रम्मण-सरोड़ी मार्ग पर सुरक्षा दीवार (डंगा) ढहने से विशाल चट्टानें और भारी मात्रा में मलबा नीचे बने दो मकानों पर आ गिरा। दोनों मकानों को गंभीर क्षति पहुंची।

हालांकि राहत की बात यह रही कि चट्टानों के गिरने की आवाज सुनकर प्रभावित परिवार समय रहते अपने घरों से बाहर निकल आए, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। यदि लोग समय पर बाहर नहीं निकलते तो बड़ा हादसा हो सकता था।

नाले का पानी घरों में घुसा, वाहन भी हुए क्षतिग्रस्त

राणा कॉलोनी में तेज बहाव के साथ नाले का पानी रिहायशी क्षेत्र में प्रवेश कर गया। कई घरों में पानी और मलबा भर गया। एक मोटरसाइकिल बहकर मलबे में दब गई, जबकि कई अन्य वाहन भी पत्थरों और मलबे की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गए।

बारिश और भूस्खलन का असर चंबा डिग्री कॉलेज परिसर तक भी पहुंचा, जहां सुरक्षा दीवार को नुकसान हुआ। मुख्य मार्गों पर भी भारी मात्रा में मलबा जमा होने से यातायात प्रभावित रहा।

प्रशासन ने शुरू किया राहत कार्य

घटनाओं की जानकारी मिलते ही प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया तथा स्थिति का जायजा लिया गया।

एसडीएम सदर चिराग शर्मा ने बताया कि ओबड़ी मोहल्ले में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए दोनों मकानों के प्रभावित परिवारों को तत्काल 25-25 हजार रुपये की फौरी राहत उपलब्ध करा दी गई है। इसके अलावा राजस्व विभाग की टीम को विस्तृत सर्वे कर नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सर्वे रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सरकारी नियमों के अनुसार प्रभावित परिवारों को आगे की राहत राशि भी उपलब्ध कराई जाएगी।

मानसून के दौरान सतर्कता की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना चाहिए और अत्यधिक वर्षा के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए।

प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन को दें।

दर्द और तबाही की दोहरी मार

चंबा के लिए यह रात केवल एक सड़क दुर्घटना या भारी बारिश की कहानी नहीं रही, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं, अधूरे वादों और प्रकृति के कहर की ऐसी त्रासदी बन गई जिसने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया। एक ओर एक परिवार हमेशा के लिए बिखर गया, तो दूसरी ओर कई परिवारों की मेहनत से बनाए गए आशियाने क्षतिग्रस्त हो गए। अब प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है, जबकि पूरा क्षेत्र उन अपनों को नम आंखों से याद कर रहा है जो घर लौटने का वादा करके निकले थे, लेकिन कभी वापस नहीं आ सके।

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