सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई, पूर्व वॉरेंट ऑफिसर को नम आंखों से किया गया विदा
अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट
प्रयागराज। भारतीय सेना में लंबे समय तक अपनी सेवाएं देकर देश की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सेवानिवृत्त वॉरेंट ऑफिसर राम कृपाल पाण्डेय अब इस दुनिया में नहीं रहे। 80 वर्ष की आयु में उनके निधन से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। देश सेवा के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए सेना की ओर से उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। गार्ड ऑफ ऑनर के बीच उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिसने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।
लाल बिहरा, बम्हरौली निवासी राम कृपाल पाण्डेय का सोमवार सुबह करीब सात बजे अंकुर हॉस्पिटल, बम्हरौली में निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही रिश्तेदारों, शुभचिंतकों, पूर्व सैनिकों और स्थानीय लोगों का उनके आवास पर तांता लग गया। हर किसी की जुबान पर उनकी सादगी, अनुशासन और देशभक्ति की चर्चा सुनाई दी।
देश सेवा को समर्पित रहा पूरा जीवन
राम कृपाल पाण्डेय ने भारतीय सेना में रहते हुए वर्षों तक राष्ट्र की सेवा की। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसके कारण उन्हें साथियों और वरिष्ठ अधिकारियों का सम्मान प्राप्त था। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने सामाजिक जीवन में सक्रिय रहते हुए लोगों को अनुशासित और राष्ट्रहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वे सरल स्वभाव के व्यक्ति थे और हर किसी की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। उनके व्यक्तित्व में सैन्य अनुशासन के साथ मानवीय संवेदनाएं भी साफ झलकती थीं।
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी गई अंतिम श्रद्धांजलि
भारतीय सेना की ओर से पूर्व वॉरेंट ऑफिसर राम कृपाल पाण्डेय को सैन्य परंपराओं के अनुरूप गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। सैन्य अधिकारियों और जवानों ने पूरे सम्मान के साथ उन्हें अंतिम सलामी दी। इस दौरान उपस्थित लोगों ने भी दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
गार्ड ऑफ ऑनर का दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था। सेना की वर्दी में मौजूद जवानों द्वारा अंतिम सम्मान दिए जाने के दौरान परिजनों की आंखें नम हो गईं। आसपास मौजूद लोगों ने भी इस पल को गर्व और भावुकता के साथ देखा।
मंगलवार सुबह रसूलाबाद घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
परिजनों के अनुसार, मंगलवार सुबह प्रयागराज के रसूलाबाद घाट पर पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके पुत्र मनोज कुमार पाण्डेय ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की सभी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया।
अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में परिजन, रिश्तेदार, मित्र, पूर्व सैनिक, शुभचिंतक और क्षेत्र के सम्मानित नागरिक शामिल हुए। “राम नाम सत्य है” के उद्घोष के बीच अंतिम यात्रा निकाली गई, जहां लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
भरा-पूरा परिवार छोड़ गए राम कृपाल पाण्डेय
राम कृपाल पाण्डेय अपने पीछे तीन बेटियां, एक पुत्र तथा नाती-पोतों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिवार के सदस्यों ने बताया कि वे हमेशा परिवार को एकजुट रखने और संस्कारों के साथ जीवन जीने की सीख देते थे।
उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन का हर क्षण परिवार और समाज के साथ-साथ देश के नाम समर्पित किया।
क्षेत्र में शोक, लोगों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
राम कृपाल पाण्डेय के निधन की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बन गया। स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों, पूर्व सैनिकों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने उनके आवास पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
लोगों ने कहा कि उनका जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यों से यह संदेश दिया कि राष्ट्र सेवा केवल वर्दी पहनकर ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाकर भी की जा सकती है।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बना उनका जीवन
पूर्व सैनिकों का मानना है कि राम कृपाल पाण्डेय जैसे सैनिक देश की अमूल्य धरोहर होते हैं। उन्होंने अपने जीवन में कर्तव्य को सर्वोपरि रखा और सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज के बीच सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत किया। उनका व्यक्तित्व युवाओं को देशभक्ति, अनुशासन और ईमानदारी का संदेश देता रहेगा।
सेना में बिताए उनके वर्षों की यादें आज भी उनके साथियों के मन में जीवित हैं। यही कारण है कि उनके अंतिम संस्कार में सैन्य सम्मान दिए जाने के दौरान हर व्यक्ति ने गर्व और सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी।
देश सेवा को मिला अंतिम सलाम
राम कृपाल पाण्डेय का जाना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के एक ऐसे सैनिक का अवसान है जिसने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर अपना जीवन जिया। सैन्य सम्मान के साथ दी गई उनकी अंतिम विदाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि देश की सेवा करने वाले सैनिकों का सम्मान जीवन के अंतिम पड़ाव तक बरकरार रहता है।
उनकी स्मृतियां, उनका अनुशासन, उनकी सादगी और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।









