21 अक्टूबर 2026 9:54 पूर्वाह्न

UP के पूर्व एआरटीओ के ठिकानों पर मिला अकूत खजाना, दीवारों और बेड बॉक्स से निकला करोड़ों का सोना-चांदी व नकदी

रिपोर्टर ठाकुर बख्श सिंह की तस्वीर के साथ पूर्व एआरटीओ ललित कुमार और विजिलेंस छापे में बरामद नकदी व संपत्ति की संयुक्त फीचर इमेज।

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रिपोर्ट: ठाकुर बख्श सिंह

कानपुर। उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग से जुड़े एक चर्चित भ्रष्टाचार मामले में विजिलेंस की कार्रवाई ने सबको चौंका दिया है। आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के आरोपों की जांच के तहत पूर्व सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार के लखनऊ स्थित आवास पर छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में सोना, चांदी, नकदी और करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए गए। जांच एजेंसियों के अनुसार बरामद सामग्री देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। घर की दीवारों, अलमारियों और बेड बॉक्स में इस तरह संपत्ति छिपाकर रखी गई थी कि पहली नजर में किसी को इसका अंदाजा भी नहीं हो सकता था।

दीवारों और अलमारियों में छिपा था करोड़ों का खजाना

विजिलेंस टीम ने तलाशी अभियान के दौरान घर के अलग-अलग हिस्सों की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान लगभग 13 किलोग्राम सोना तथा 9 किलोग्राम चांदी बरामद हुई। इनमें सोने और चांदी के आभूषणों के अलावा बिस्किट और ईंट के रूप में कीमती धातुएं भी शामिल हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इनकी बाजार कीमत करीब 20 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

इसके अलावा घर से बड़ी मात्रा में नकदी भी बरामद हुई, जिसे विभिन्न स्थानों पर छिपाकर रखा गया था। अधिकारियों का कहना है कि बरामद संपत्ति का वास्तविक मूल्य जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

कई जिलों में फैली संपत्तियों के दस्तावेज मिले

छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी को लखनऊ, नोएडा, रायबरेली और बाराबंकी सहित विभिन्न स्थानों पर स्थित करीब 15 अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। इन संपत्तियों की खरीद, निवेश और आय के स्रोत की विस्तृत जांच की जा रही है।

जांच अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल नकदी और आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बड़े पैमाने पर अचल संपत्तियों में निवेश किए जाने की भी संभावना है। इसी कारण अब वित्तीय लेनदेन और बैंक खातों की भी गहन जांच की जा रही है।

कानपुर और आगरा में भी रह चुके हैं तैनात

पूर्व एआरटीओ ललित कुमार उत्तर प्रदेश के कई जिलों में परिवहन विभाग में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वह आगरा और कानपुर में भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे। विजिलेंस अब उनके विभिन्न कार्यकाल के दौरान अर्जित संपत्तियों और वित्तीय गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि बरामद संपत्ति उनकी वैध आय के अनुरूप है या नहीं। यदि आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति मिलने की पुष्टि होती है तो आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कानपुर में साढ़े तीन साल की तैनाती पर भी उठे सवाल

जानकारी के अनुसार ललित कुमार वर्ष 2016 में कानपुर एआरटीओ कार्यालय में संभागीय निरीक्षक (आरआई) के रूप में तैनात हुए थे। लगभग साढ़े तीन वर्ष तक उन्होंने यहां कार्य किया। वर्ष 2019 में उनका प्रमोशन होकर एआरटीओ पद पर नियुक्ति हुई और बाद में उनका तबादला दूसरे जिले में कर दिया गया।

परिवहन विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कानपुर में उनके कार्यकाल के दौरान ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन फिटनेस और अन्य विभागीय सेवाओं से संबंधित कार्यों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही थीं। हालांकि उन शिकायतों पर उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी।

विभागीय कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे सवाल

विजिलेंस की कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली भी चर्चा में आ गई है। विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों की निष्पक्ष जांच होती तो मामला शायद पहले ही सामने आ जाता।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से सरकारी विभागों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता स्पष्ट होती है। भ्रष्टाचार के आरोपों की समयबद्ध जांच और प्रभावी कार्रवाई से ही आम जनता का भरोसा कायम रखा जा सकता है।

जांच जारी, सामने आ सकते हैं नए तथ्य

विजिलेंस विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है। बरामद दस्तावेजों, बैंक खातों, निवेश और अन्य वित्तीय लेनदेन का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कुल संपत्ति कितनी है और उसका स्रोत क्या है।

यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विजिलेंस की इस बड़ी कार्रवाई को उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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