चानौत

साफ पानी की मांग पर अड़ा गांव, विरोध के बीच एफआईआर तक पहुंचा मामला ; डेढ़ महीने से जारी है चानौत का आंदोलन

हांसी के चानौत गांव में पानी को लेकर बढ़ा विवाद, आंदोलन और प्रशासन आमने-सामने

बबीता हांसी की रिपोर्ट

हरियाणा के हांसी क्षेत्र का चानौत (स्थानीय उच्चारण चैनत) गांव इन दिनों पीने के साफ पानी की मांग को लेकर राज्यभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। गांव के लोग पिछले डेढ़ महीने से अधिक समय से धरने पर बैठे हैं और उनका कहना है कि उन्हें वर्षों से दूषित और अपर्याप्त पेयजल मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उनकी मूल समस्या का समाधान करने के बजाय विरोध प्रदर्शन पर कार्रवाई कर रहा है। दूसरी ओर प्रशासन का दावा है कि गांव में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जा रहा है और समस्या के स्थायी समाधान के लिए अलग पाइपलाइन परियोजना पर काम शुरू कर दिया गया है।

इसी विवाद के बीच मुख्य पाइपलाइन पर लगाए गए कथित टी-कनेक्शन को लेकर एफआईआर दर्ज होने और पुलिस कार्रवाई के बाद मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।

ग्रामीणों का दावा—नल का पानी पीने योग्य नहीं

धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि उनके घरों तक पहुंचने वाला पानी साफ नहीं है। कई लोगों के अनुसार पानी का रंग काला या मटमैला होता है और उसमें तलछट भी दिखाई देती है। ऐसे पानी का उपयोग वे केवल कपड़े धोने या अन्य घरेलू कार्यों में कर पाते हैं, जबकि पीने और भोजन बनाने के लिए उन्हें बाजार से पानी खरीदना पड़ता है।

गांव की महिलाओं का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार मजबूरी में वही पानी पीने को विवश हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ रही हैं। कई परिवार सामूहिक रूप से पानी के टैंकर मंगवाते हैं, जबकि कुछ लोग आसपास के क्षेत्रों से पानी लाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिदिन कई घंटे केवल पीने का पानी जुटाने में खर्च हो जाते हैं।

16 मई से लगातार जारी है धरना

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रखी, लेकिन समाधान नहीं मिला। लगातार शिकायतों के बावजूद जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो 16 मई से गांव के लोगों ने शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया।

धरने में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की बड़ी संख्या लगातार शामिल हो रही है। आंदोलन अब डेढ़ महीने से अधिक समय पार कर चुका है और गांव के लोग अपनी मांगों पर कायम हैं।

क्या है ग्रामीणों की मुख्य मांग?

प्रदर्शन कर रहे लोगों की सबसे बड़ी मांग यह है कि हांसी शहर के लिए बिछाई जा रही 36 इंच व्यास वाली भाखड़ा पाइपलाइन से चानौत गांव को टी-कनेक्शन देकर सीधे जोड़ा जाए।

ग्रामीणों का तर्क है कि यह मुख्य पाइपलाइन गांव के पास से होकर गुजर रही है। यदि इसी पाइपलाइन से गांव को जोड़ दिया जाए तो उन्हें नियमित और स्वच्छ पेयजल मिल सकेगा। उनका यह भी कहना है कि मुख्य पाइपलाइन की निगरानी बेहतर रहती है, जिससे अवैध कनेक्शन और पानी की चोरी जैसी समस्याएं कम होंगी।

अमृत 2.0 योजना के तहत बिछ रही है पाइपलाइन

प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत राजली स्थित भाखड़ा नहर से हांसी शहर तक लगभग 27 किलोमीटर लंबी बड़ी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य शहर की पेयजल आपूर्ति को मजबूत करना है।

यही पाइपलाइन चानौत गांव के समीप से गुजर रही है, जिसके कारण ग्रामीण इसे अपने गांव से जोड़ने की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष—योजना के नियम इसकी अनुमति नहीं देते

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि अमृत 2.0 योजना विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों के लिए बनाई गई है। इसलिए इस पाइपलाइन से सीधे किसी गांव को जोड़ना योजना के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।

प्रशासन के अनुसार चानौत गांव को प्रतिदिन लगभग पांच लाख लीटर पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त गांव के लिए लगभग चार किलोमीटर लंबी अलग पाइपलाइन का कार्य शुरू किया जा चुका है। साथ ही मौजूदा जल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगभग 7.5 करोड़ रुपये की नई परियोजना को भी स्वीकृति मिल चुकी है।

अधिकारियों का कहना है कि गांव की समस्या के समाधान के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर तेजी से काम किया जा रहा है।

पानी की गुणवत्ता पर अब भी बना हुआ है सवाल

हालांकि प्रशासन पर्याप्त जलापूर्ति का दावा कर रहा है, लेकिन ग्रामीण लगातार पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। धरना स्थल पर रखी गई पानी की बोतलों में तलछट दिखाई देने का दावा भी आंदोलनकारियों ने किया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है तो इतने लंबे समय तक आंदोलन करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

ग्रामीणों का आरोप—पुरानी पाइपलाइन में होती है पानी की चोरी

गांव के लोगों का कहना है कि वर्तमान जलापूर्ति व्यवस्था तीन गांवों में साझा है। उनके अनुसार रास्ते में अवैध कनेक्शन होने के कारण पानी का दबाव कम हो जाता है और कई बार कई दिनों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचता।

पूर्व सरपंच सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि अलग पाइपलाइन बनने के बाद भी वही पुरानी समस्याएं दोबारा सामने आ सकती हैं। उनका मानना है कि स्थायी समाधान केवल मुख्य पाइपलाइन से सीधा कनेक्शन देने में है।

आसपास के गांवों ने भी दिया समर्थन

समय के साथ यह आंदोलन केवल चानौत गांव तक सीमित नहीं रहा। आसपास के कई गांवों और सामाजिक संगठनों ने भी ग्रामीणों के समर्थन में आवाज उठानी शुरू कर दी है।

आंदोलन का समर्थन करने वाले प्रतिनिधियों का कहना है कि यह किसी राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं बल्कि हर नागरिक के स्वच्छ पेयजल के अधिकार का प्रश्न है। उनका कहना है कि प्रशासन को ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे भविष्य में भी गांव को गुणवत्तापूर्ण पानी मिलता रहे।

टी-कनेक्शन लगाने के बाद अचानक बदला घटनाक्रम

धरना लंबा खिंचने के बाद आंदोलन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि सरकार की ओर से बातचीत करने आए एक व्यक्ति ने मुख्य पाइपलाइन पर टी-कनेक्शन लगाने का भरोसा दिया था। इसके बाद कुछ समय के लिए पाइपलाइन पर टी-कनेक्शन लगाने का कार्य भी शुरू हुआ।

ग्रामीणों का कहना है कि कई घंटे तक यह कार्य चलता रहा और उन्हें लगा कि उनकी मांग स्वीकार कर ली गई है। इसी भरोसे पर कुछ लोगों ने अपना आमरण अनशन भी समाप्त कर दिया। हालांकि अगले ही दिन स्थिति पूरी तरह बदल गई।

टी-कनेक्शन हटाया गया, दर्ज हुई एफआईआर

प्रशासन ने मुख्य पाइपलाइन पर लगाए गए टी-कनेक्शन को अवैध बताते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी। इसके साथ ही उसे हटाने का निर्णय लिया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे इसका विरोध करने पहुंचे तो पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज भी किया। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए।

पुलिस का दावा—सरकारी कार्य में बाधा और पथराव हुआ

पुलिस प्रशासन इन आरोपों से सहमत नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि आंदोलन के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, सड़क जाम की गई और पुलिस पर पथराव भी हुआ।

पुलिस के अनुसार तीन अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें सरकारी कार्य में बाधा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। कुछ मामलों में हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा भी शामिल की गई है।

पुलिस का कहना है कि उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जा रही है तथा जांच अभी जारी है।

बातचीत के कई दौर, लेकिन समाधान अब भी दूर

प्रशासन का कहना है कि स्थानीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ कई दौर की वार्ता हो चुकी है। इसके बावजूद दोनों पक्ष किसी साझा समाधान पर सहमत नहीं हो पाए हैं।

ग्रामीण अपनी मांग पर अडिग हैं कि उन्हें मुख्य पाइपलाइन से टी-कनेक्शन दिया जाए, जबकि प्रशासन योजना के नियमों का हवाला देते हुए अलग पाइपलाइन को ही समाधान बता रहा है।

चानौत गांव का यह विवाद अब केवल पेयजल आपूर्ति तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, ग्रामीणों की बुनियादी जरूरतों और कानून-व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक ओर ग्रामीण वर्षों पुरानी जल समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं, वहीं प्रशासन कानूनी और तकनीकी सीमाओं का हवाला देते हुए वैकल्पिक व्यवस्था पर जोर दे रहा है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों पक्ष बातचीत के जरिए ऐसा रास्ता निकाल पाएंगे जिससे गांव को स्वच्छ और नियमित पेयजल मिल सके तथा लंबे समय से जारी यह आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो सके।

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