बड़े मंगलवार पर जीव-सेवा की मिसाल : बंदरों के लिए लगा भव्य भंडारा, मानवता का दिया गया संदेश
गरीब अधिकार मंच की अनूठी पहल ने जीता लोगों का दिल, बेजुबान प्राणियों के लिए भोजन और पानी की विशेष व्यवस्था
जगदंबा उपाध्याय की रिपोर्ट
आजमगढ़। ज्येष्ठ माह के छठे बड़े मंगलवार के पावन अवसर पर आजमगढ़ कलेक्ट्रेट परिसर स्थित शिव मंदिर में एक ऐसा आयोजन देखने को मिला जिसने धार्मिक आस्था के साथ-साथ जीव-सेवा और मानवीय संवेदनाओं का भी अनूठा संदेश दिया। सामाजिक संगठन ‘गरीब अधिकार मंच’ द्वारा भगवान हनुमान के प्रतीक माने जाने वाले बंदरों के लिए भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में बंदरों को फल, चना और अन्य खाद्य सामग्री वितरित की गई। इस आयोजन ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और उपस्थित नागरिकों ने इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया।
कार्यक्रम का आयोजन गरीब अधिकार मंच के नेतृत्वकर्ता डी.एन. सिंह के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन करना नहीं था, बल्कि बेजुबान जीवों के प्रति संवेदनशीलता और करुणा का संदेश समाज तक पहुंचाना भी था।
जन्मदिवस पर जिला प्रोबेशन अधिकारी ने निभाई सामाजिक जिम्मेदारी
इस विशेष आयोजन में जिला प्रोबेशन अधिकारी सुबोध कुमार सिंह की उपस्थिति प्रमुख आकर्षण का केंद्र रही। संयोगवश इसी दिन उनका जन्मदिवस भी था। उन्होंने अपने जन्मदिन को केवल व्यक्तिगत उत्सव तक सीमित न रखते हुए जीव-सेवा को प्राथमिकता दी और कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई।
सुबोध कुमार सिंह ने स्वयं अपने हाथों से बंदरों को चना, केला और आम खिलाकर भंडारे का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसके कमजोर और असहाय प्राणियों के प्रति व्यवहार से होती है। बेजुबान जीवों की सेवा करना मानवता का सबसे श्रेष्ठ रूप है। उन्होंने गरीब अधिकार मंच की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक सोच और करुणा की भावना को मजबूत करते हैं।
धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण और जीव संरक्षण का संदेश
बड़े मंगलवार का हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व माना जाता है। भगवान हनुमान के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। हालांकि इस बार गरीब अधिकार मंच ने पारंपरिक भंडारे से हटकर एक अलग पहल करते हुए बंदरों के लिए विशेष भंडारे का आयोजन किया।
संगठन के पदाधिकारियों का कहना था कि मंदिरों और धार्मिक स्थलों के आसपास रहने वाले बंदर अक्सर भोजन और पानी की समस्या से जूझते हैं, विशेषकर गर्मी के मौसम में। ऐसे समय में उनकी सहायता करना भी एक प्रकार की सेवा और धर्म का कार्य है। इस आयोजन के माध्यम से लोगों को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि केवल मनुष्यों ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों और अन्य जीवों की देखभाल भी हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है।
भीषण गर्मी में पानी की विशेष व्यवस्था बनी आकर्षण का केंद्र
इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी को देखते हुए आयोजकों ने बंदरों के लिए भोजन के साथ-साथ स्वच्छ पेयजल की भी विशेष व्यवस्था की। परिसर के विभिन्न स्थानों पर बाल्टियों और बड़े बर्तनों में पानी रखा गया ताकि बंदरों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने बताया कि अक्सर गर्मी के मौसम में बंदरों और अन्य जीवों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी स्थिति दयनीय हो जाती है। ऐसे में भोजन के साथ पानी की व्यवस्था करना आयोजन की सबसे सराहनीय पहल रही।
दिनभर चलता रहा सेवा का सिलसिला
दोपहर की तेज धूप में शुरू हुआ यह भंडारा शाम तक लगातार चलता रहा। इस दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने पूरी निष्ठा और उत्साह के साथ बंदरों को भोजन कराया। परिसर में मौजूद बंदरों ने भी बड़ी संख्या में भोजन ग्रहण किया।
कलेक्ट्रेट आने-जाने वाले अधिकारी, कर्मचारी, अधिवक्ता और आम नागरिक इस दृश्य को देखकर प्रभावित हुए। कई लोगों ने इस पहल को सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उपस्थित लोगों ने कहा कि यदि समाज के विभिन्न संगठन इसी प्रकार जीवों और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता दिखाएं तो एक बेहतर सामाजिक वातावरण का निर्माण किया जा सकता है।

लोगों ने की पहल की सराहना
आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों ने गरीब अधिकार मंच की इस पहल की खुलकर प्रशंसा की। लोगों का कहना था कि अक्सर धार्मिक आयोजनों में केवल मानव समुदाय को केंद्र में रखा जाता है, लेकिन इस आयोजन ने बेजुबान जीवों को भी सम्मान और संरक्षण देने का संदेश दिया है।
कई नागरिकों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे समाज में सेवा, करुणा और सह-अस्तित्व की भावना को और अधिक बल मिलेगा।
बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर गरीब अधिकार मंच के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में आलोक सिंह, विजय प्रताप सिंह, रेनू देवी, इंजीनियर सुनील कुमार यादव, हरिओम सिंह, अमित कुमार यादव, राकेश पाण्डेय सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया और आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।
कार्यक्रम का समापन समाज में जीव-सेवा, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ हुआ। यह आयोजन केवल एक भंडारा नहीं बल्कि संवेदनशील समाज के निर्माण की दिशा में उठाया गया एक प्रेरणादायक कदम साबित हुआ।







