पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे ग्रामीण, बच्चों ने संभाली बाल्टियां, सियासत हुई गर्म

चित्रकूट में पेयजल संकट के विरोध में बच्चे और ग्रामीण पानी के खाली बर्तन लेकर प्रदर्शन करते हुए, साथ में रिपोर्टर संजय सिंह राणा।

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संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

चित्रकूट। धर्मनगरी चित्रकूट इन दिनों भीषण जल संकट की मार झेल रही है। गर्मी के बढ़ते प्रकोप के बीच जिले के कई ग्रामीण इलाकों में हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोगों को पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन बच्चों के हाथों में किताबें और स्कूल बैग होने चाहिए, वे अब पानी से भरी बाल्टियां ढोने को मजबूर हैं। इसी मुद्दे को लेकर अब राजनीति भी गर्मा गई है और विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हो गए हैं।

जल संकट ने बढ़ाई ग्रामीणों की परेशानी

चित्रकूट के कई गांवों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता गंभीर समस्या बन चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगे कई हैंडपंप या तो खराब पड़े हैं या उनमें पर्याप्त पानी नहीं निकल रहा है। वहीं कई जलापूर्ति योजनाएं भी अपेक्षित रूप से काम नहीं कर रही हैं।

पानी की कमी के कारण लोगों को रोजाना कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है, जिन्हें घरेलू जरूरतों के लिए घंटों तक पानी की व्यवस्था में जुटना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ संकट और गहराता जा रहा है, लेकिन समस्या के समाधान के लिए अभी तक कोई प्रभावी कदम दिखाई नहीं दे रहा है।

विकास खंड कार्यालय पहुंचा ग्रामीणों का गुस्सा

लंबे समय से चली आ रही समस्या से परेशान ग्रामीणों और बच्चों का सब्र आखिरकार टूट गया। दर्जनों लोगों ने विकास खंड कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।

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प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। स्थिति में कोई वास्तविक सुधार नहीं हुआ। लोगों का आरोप है कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जिम्मेदार विभाग संवेदनशीलता नहीं दिखा रहे हैं। प्रदर्शन में शामिल बच्चों ने भी अपनी परेशानी बताई। उनका कहना था कि पानी भरने में इतना समय निकल जाता है कि पढ़ाई प्रभावित होने लगी है।

बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा असर

जल संकट का सबसे बड़ा असर बच्चों की दिनचर्या पर दिखाई दे रहा है। कई परिवारों में बच्चे सुबह स्कूल जाने से पहले पानी भरने के लिए निकलते हैं। कई बार पानी की तलाश में घंटों लग जाते हैं, जिससे वे समय पर विद्यालय नहीं पहुंच पाते।

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों का पढ़ाई से ध्यान हट रहा है और उन्हें ऐसी जिम्मेदारियां उठानी पड़ रही हैं जो उनकी उम्र के अनुकूल नहीं हैं। भीषण गर्मी में पानी ढोने से उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला

चित्रकूट के जल संकट को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा—

“अमृतकाल का कैसा ये दस्तूर, प्यासा बचपन बाल्टी उठाने को मजबूर।”

पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कांग्रेस का कहना है कि बच्चों को शिक्षा और बेहतर भविष्य देने के बजाय उन्हें पानी की व्यवस्था में लगाया जा रहा है, जो शासन व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि कागजों में विकास की तस्वीर भले आकर्षक दिखाई जाती हो, लेकिन वास्तविकता यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग आज भी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।

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वर्षों पुरानी समस्या का नहीं निकल सका समाधान

ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल संकट कोई नई समस्या नहीं है। हर वर्ष गर्मी के मौसम में हालात बिगड़ जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस प्रयास नहीं किए जाते।

कई गांवों में जल संरक्षण की योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। वहीं खराब हैंडपंपों की मरम्मत और पाइप जलापूर्ति योजनाओं की निगरानी भी प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है। परिणामस्वरूप हर साल हजारों लोगों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण और जलापूर्ति तंत्र को मजबूत किए बिना समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। हालांकि अब तक प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि संबंधित विभाग जल्द ही प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर आवश्यक कदम उठाएंगे।

फिलहाल चित्रकूट में जल संकट केवल एक प्रशासनिक चुनौती नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। एक ओर ग्रामीण पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो दूसरी ओर राजनीतिक दल इस मुद्दे पर आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।

पानी ही सबसे बड़ी जरूरत

चित्रकूट के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें राजनीति नहीं, समाधान चाहिए। जब तक गांवों में नियमित और सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक लोगों की मुश्किलें कम नहीं होंगी। आज भी जिले के कई परिवारों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगली बाल्टी पानी आखिर कहां से आएगी।

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