19 साल बाद पैतृक गांव पहुंचे फैजल खान, बोले- “आमिर कोई गाय-भैंस नहीं कि पकड़कर ले आऊं”, खेती और फिल्म सिटी पर भी रखी राय
हरदोई में पैतृक जमीन की देखरेख के लिए पहुंचे अभिनेता, आमिर खान के गांव न आने पर दिया बेबाक जवाब
अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
हरदोई। बॉलीवुड अभिनेता और फिल्म मेला से चर्चित हुए फैजल खान करीब 19 वर्षों बाद उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र स्थित अपने पैतृक गांव पहुंचे हैं। यहां उनके परिवार की लगभग 120 बीघा कृषि भूमि और बाग-बगीचे हैं, जिनकी देखरेख के लिए वह कुछ दिनों तक गांव में रहेंगे। अपने दौरे के दौरान उन्होंने मीडिया से खुलकर बातचीत की और परिवार, खेती, फिल्मों, उत्तर प्रदेश की फिल्म सिटी तथा कानून-व्यवस्था जैसे कई मुद्दों पर अपनी राय रखी।
फैजल खान का यह दौरा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह लंबे समय बाद अपने पुश्तैनी गांव आए हैं। गांव पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया और उनसे मुलाकात की। इस दौरान आमिर खान के गांव न आने को लेकर पूछे गए सवाल पर उनका जवाब सुर्खियों में आ गया।
“आमिर खान कोई गाय-भैंस नहीं हैं कि पकड़कर ले आऊं”
मीडिया से बातचीत में जब फैजल खान से पूछा गया कि उनके बड़े भाई और बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान गांव क्यों नहीं आते, तो उन्होंने बेहद सहज लेकिन बेबाक अंदाज में जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि आमिर खान कोई गाय-भैंस नहीं हैं कि उन्हें पकड़कर यहां ले आया जाए। जब उनका मन होगा, वे स्वयं गांव आएंगे। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी प्राथमिकताएं और व्यस्तताएं होती हैं। गांव से जुड़ाव सभी का होता है, लेकिन आने-जाने का निर्णय व्यक्ति स्वयं करता है। उनके इस बयान की चर्चा पूरे क्षेत्र में होने लगी और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
120 बीघा जमीन और बागानों की देखरेख संभालेंगे
फैजल खान ने बताया कि शाहाबाद क्षेत्र के अख्तियारपुर और दिलावरपुर गांवों में उनके परिवार की लगभग 120 बीघा पैतृक जमीन और बागान हैं। लंबे समय से इन संपत्तियों की देखरेख अन्य लोगों के माध्यम से की जा रही थी, लेकिन अब उन्होंने स्वयं इसकी जिम्मेदारी संभालने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि खेती और फार्मिंग में उनकी हमेशा से रुचि रही है। गांव का वातावरण उन्हें आकर्षित करता है और वह चाहते हैं कि अपनी पुश्तैनी जमीन की स्थिति को करीब से समझें। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में वह खेती-किसानी से भी जुड़ सकते हैं और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने पर विचार कर रहे हैं।
“शाहाबाद की याद हमेशा आती रही”
अपने गांव से भावनात्मक लगाव का जिक्र करते हुए फैजल खान ने कहा कि शाहाबाद उनकी स्मृतियों का अहम हिस्सा है। यहां की गलियां, लोग और बचपन की यादें उन्हें हमेशा अपनी ओर खींचती रही हैं।
उन्होंने कहा कि इस बार उन्होंने दृढ़ निश्चय किया था कि गांव आएंगे और अपने पूर्वजों की संपत्ति तथा विरासत को करीब से देखेंगे। लगभग 19 वर्षों बाद गांव पहुंचना उनके लिए भावनात्मक अनुभव रहा है। फैजल ने कहा कि परिवारों में मतभेद और प्रेम दोनों साथ-साथ चलते हैं। रिश्तों में उतार-चढ़ाव हर घर की सामान्य प्रक्रिया है और इसे सहज रूप से स्वीकार करना चाहिए।
यूपी फिल्म सिटी से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित फिल्म सिटी को लेकर पूछे गए सवाल पर फैजल खान ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि फिल्म सिटी बनने से राज्य के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और फिल्म उद्योग को भी नई दिशा मिलेगी।
उनका मानना है कि मुंबई के अलावा अन्य राज्यों में भी फिल्म निर्माण की मजबूत व्यवस्था विकसित होनी चाहिए। इससे स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों, लेखकों और अन्य रचनात्मक प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ ऐसे मंच और अवसरों की है, जहां युवा अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सकें।
निर्देशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं फैजल खान
अपने फिल्मी करियर पर बात करते हुए फैजल खान ने कहा कि फिल्म मेला उनके जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव रही। इस फिल्म के माध्यम से उन्हें व्यापक पहचान मिली और दर्शकों ने उनके अभिनय को सराहा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनका ध्यान निर्देशन और फिल्म निर्माण की ओर अधिक है। वह नए विषयों पर काम कर रहे हैं और भविष्य में ऐसी फिल्में बनाना चाहते हैं जिनमें उत्तर प्रदेश के कलाकारों और तकनीकी विशेषज्ञों को भी अवसर मिल सके।
फैजल ने कहा कि वह चाहते हैं कि लखनऊ और प्रदेश के अन्य शहरों के प्रतिभाशाली युवाओं को फिल्म उद्योग में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिले।
आमिर खान के साथ दोबारा काम करने की इच्छा
अपने भाई आमिर खान के साथ संबंधों को लेकर पूछे गए प्रश्न पर फैजल खान ने कहा कि मेला के बाद उन्होंने आमिर से एक और फिल्म साथ करने की इच्छा जताई थी, लेकिन वह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
उन्होंने बताया कि दोनों भाइयों की कभी-कभी मुलाकात होती रहती है। आमिर खान की हालिया फिल्मों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ फिल्में उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाईं, लेकिन आमिर एक प्रतिभाशाली कलाकार हैं और भविष्य में वह उनके साथ किसी फिल्म परियोजना पर काम करने के बारे में सोच सकते हैं।
मानसिक बीमारी के आरोपों पर भी बोले
फैजल खान ने अपने जीवन के कठिन दौर का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय उन पर मानसिक बीमारी के आरोप लगाए गए थे। हालांकि उन्होंने अपने काम और रचनात्मक प्रयासों के जरिए खुद को साबित किया।
उन्होंने कहा कि संघर्ष जीवन का हिस्सा है और व्यक्ति को अपनी मेहनत तथा प्रतिभा के बल पर आगे बढ़ना चाहिए। निर्देशन और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उनका वर्तमान काम इसी आत्मविश्वास का परिणाम है।
कानून-व्यवस्था पर रखी स्पष्ट राय
उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था के बारे में पूछे गए सवाल पर फैजल खान ने साफ शब्दों में कहा कि जो व्यक्ति सही काम करता है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और जो भी गलत कार्य करेगा, उसे सजा मिलनी चाहिए, चाहे वह किसी भी धर्म, वर्ग या समुदाय से जुड़ा हो। उनके अनुसार न्याय व्यवस्था की मजबूती ही समाज में विश्वास कायम करती है।
लापता लल्ली देवी की तलाश में सहयोग की अपील
हरदोई प्रवास के दौरान फैजल खान ने तहसीलदार संध्या यादव से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने उनकी लापता मां लल्ली देवी को खोजने के अभियान में लोगों से सहयोग की अपील की।
फैजल खान ने कहा कि 71 वर्षीय लल्ली देवी पिछले एक महीने से लापता हैं और परिवार लगातार उनकी तलाश कर रहा है। उन्होंने आमजन से अनुरोध किया कि यदि किसी को उनके बारे में कोई जानकारी मिले तो तुरंत परिवार या प्रशासन को सूचित करें। उन्होंने बताया कि सुरक्षित सूचना देने वाले व्यक्ति को 2 लाख 51 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
30 अप्रैल से लापता हैं लल्ली देवी
तहसीलदार संध्या यादव ने जानकारी दी कि उनकी मां लल्ली देवी 30 अप्रैल को लखनऊ के अर्जुनगंज-अहिमामऊ क्षेत्र स्थित एक मंदिर में दर्शन करने गई थीं। मंदिर से निकलने के बाद वह रास्ता भटक गईं और फिर घर नहीं लौट सकीं।
परिजनों के अनुसार उन्हें आखिरी बार अहिमामऊ स्थित शहीद पथ की सर्विस लेन के पास फौजी ढाबा क्षेत्र में देखा गया था। इसके बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इस संबंध में लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई जा चुकी है और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।
गांव, विरासत और नई जिम्मेदारियों के बीच फैजल खान
हरदोई दौरे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फैजल खान अब केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि अपनी पुश्तैनी विरासत और कृषि भूमि की जिम्मेदारी भी स्वयं संभालना चाहते हैं। गांव से उनका भावनात्मक जुड़ाव, खेती में रुचि और स्थानीय युवाओं को अवसर देने की सोच उनके इस दौरे को खास बनाती है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या फैजल खान वास्तव में खेती और फिल्म निर्माण को जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश में कोई नई पहल करते हैं या नहीं। फिलहाल उनका गांव आगमन और आमिर खान को लेकर दिया गया बयान चर्चा का विषय बना हुआ है।








