साहनी हत्याकांड के विरोध में सड़क जाम पड़ा भारी, 15 नामजद समेत 125 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज
तहसील गेट पर प्रदर्शन के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, वीडियो फुटेज के आधार पर पहचान जारी
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया। भाटपार रानी क्षेत्र में चर्चित साहनी हत्याकांड को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सड़क जाम करने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में 15 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जबकि 100 से 125 अज्ञात महिला-पुरुषों को भी अभियुक्त के रूप में शामिल किया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
साहनी हत्याकांड के विरोध में स्थानीय लोगों द्वारा किया गया प्रदर्शन अब कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ गया है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान मुख्य मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया गया था, जिससे घंटों तक यातायात बाधित रहा और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
हत्या के विरोध में सड़क पर उतरे थे लोग
जानकारी के अनुसार, साहनी हत्याकांड से आक्रोशित बड़ी संख्या में लोग 1 जून को भाटपार रानी तहसील गेट के समीप एकत्रित हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने हत्या के आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और न्याय की मांग को लेकर मुख्य सड़क पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। देखते ही देखते प्रदर्शन ने सड़क जाम का रूप ले लिया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बांस-बल्ली, बेंच और मोटरसाइकिलों को सड़क पर खड़ा कर मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया, जिससे दोनों दिशाओं में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क जाम होने से न केवल आम यात्री प्रभावित हुए बल्कि कई आवश्यक सेवाएं भी बाधित हो गईं। एंबुलेंस, स्कूली वाहन, निजी वाहन और मालवाहक गाड़ियां लंबे समय तक जाम में फंसी रहीं।
पुलिस को मिली सूचना, मौके पर पहुंची टीम
पुलिस के अनुसार, कस्बा प्रभारी उपनिरीक्षक आहुत यादव को सूचना प्राप्त हुई कि तहसील गेट के समीप बड़ी संख्या में लोग सड़क जाम कर प्रदर्शन कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।
प्रारंभिक स्तर पर पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की अपील की। पुलिस ने सड़क खाली कराने का प्रयास भी किया ताकि यातायात सामान्य हो सके, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
समझाने के बावजूद नहीं माने प्रदर्शनकारी
पुलिस का आरोप है कि समझाने-बुझाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने मार्ग खाली नहीं किया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोगों द्वारा राहगीरों के साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज भी की गई, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सड़क जाम के कारण आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। कई लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे, जबकि मरीजों और बच्चों को लेकर जा रहे परिजनों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। बाद में थानाध्यक्ष भी घटनास्थल पर पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन तत्काल समाधान नहीं निकल सका।
आम जनता हुई परेशान
सड़क जाम का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ा। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि जाम के कारण बाजार क्षेत्र में आवाजाही प्रभावित हुई और कई दुकानदारों को भी नुकसान उठाना पड़ा।
यातायात बाधित होने से यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा। स्कूल बसों में बैठे बच्चों को भी समय पर घर पहुंचने में परेशानी हुई। वहीं एंबुलेंस के फंसने की खबरों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन सार्वजनिक मार्गों को अवरुद्ध कर आम लोगों को परेशानी में डालना उचित नहीं माना जा सकता।
पुलिस ने कराई वीडियोग्राफी
घटना के दौरान पुलिस प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी कराई। अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान मौजूद लोगों की पहचान करने के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल की जा रही है।
वीडियो फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कई लोगों की पहचान की। इसके बाद 15 व्यक्तियों को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की भी संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इन लोगों को बनाया गया नामजद आरोपी
पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमे में रितिक मद्देशिया, रोशन पाल, दिनेश माली, ऋषि मुनि, अनिल मद्देशिया, गुड्डू मद्देशिया, अंकित मद्देशिया, सलमान अंसारी, बृजेश पाल, अर्जुन यादव, शैलेष साह, संतोष यादव, संजय मद्देशिया और गणेश पाल समेत कुल 15 लोगों को नामजद किया गया है।
इसके अतिरिक्त 100 से 125 अज्ञात महिला-पुरुषों को भी अभियुक्त बनाया गया है। पुलिस अब वीडियो फुटेज, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लोक व्यवस्था भंग करने, सड़क जाम कर यातायात बाधित करने, सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने तथा राहगीरों के साथ अभद्रता करने जैसे आरोपों के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
आगे भी जारी रहेगी जांच
भाटपार रानी पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। जिन लोगों की पहचान होगी, उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून हाथ में लेने या सार्वजनिक मार्गों को अवरुद्ध करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
सड़क जाम के मामले में दर्ज हुए इस मुकदमे के बाद पूरे भाटपार रानी क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। एक ओर जहां कुछ लोग पुलिस की कार्रवाई को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन में शामिल लोगों के समर्थक इसे आंदोलन को दबाने का प्रयास बता रहे हैं।
फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों की पहचान होने तथा कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
साहनी हत्याकांड के बाद शुरू हुआ जनआक्रोश अब न्यायिक और प्रशासनिक कार्रवाई के नए चरण में पहुंच चुका है। ऐसे में पूरे क्षेत्र की नजरें अब पुलिस जांच और आगामी कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।







