पाठा मुक्ति मोर्चा ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार, जान से मारने की धमकी और जातिसूचक अपमान का लगाया आरोप
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बढ़ा विवाद, निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग
संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट। सामाजिक न्याय और जनहित के मुद्दों को लेकर सक्रिय रहने वाले पाठा मुक्ति मोर्चा ने एक बार फिर प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। समाजसेवी एवं पाठा मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लवकुश कुमार भारती तथा संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नन्दलाल सिंह आजाद ने पुलिस अधीक्षक चित्रकूट को ज्ञापन सौंपकर जान से मारने की धमकी, गाली-गलौज और जातिसूचक अपमान किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। संगठन की ओर से मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि जिले में सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था कायम रह सके।
जनसत्ता दल के आरोपों को बताया निराधार
पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए ज्ञापन में पाठा मुक्ति मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि जनसत्ता दल के जिलाध्यक्ष कुणाल प्रताप सिंह द्वारा 21 मई को दिए गए ज्ञापन में लगाए गए आरोप पूरी तरह तथ्यहीन और निराधार हैं। संगठन का कहना है कि सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट को जानबूझकर गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और उसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया गया।
मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लवकुश कुमार भारती ने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति या उनकी पूज्य माता जी का अपमान करना नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थ के चलते मामले को तूल देकर उनकी तथा संगठन की छवि खराब करने की साजिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पाठा मुक्ति मोर्चा लगातार समाज के वंचित, गरीब और शोषित वर्गों की आवाज उठाता रहा है, जिससे कुछ असामाजिक और राजनीतिक तत्व असहज महसूस कर रहे हैं। यही कारण है कि संगठन के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है।
जान से मारने की धमकी का गंभीर आरोप
ज्ञापन में सबसे गंभीर आरोप जान से मारने की धमकी को लेकर लगाया गया है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि अरुण सिंह उर्फ मिंटू सिंह निवासी गढ़चपा तथा शिवम परिहार द्वारा लगातार संगठन के पदाधिकारियों और समर्थकों को धमकियां दी जा रही हैं। आरोप है कि फोन कॉल और सोशल मीडिया माध्यमों से अपशब्दों का प्रयोग करते हुए भय का माहौल बनाया जा रहा है।
संगठन का कहना है कि धमकी देने वाले लोग खुलेआम अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और जातिसूचक शब्दों के जरिए सामाजिक रूप से अपमानित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस प्रकार की घटनाएं न केवल सामाजिक सद्भाव को प्रभावित करती हैं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त समानता और सम्मान के अधिकार का भी उल्लंघन हैं।
स्क्रीनशॉट और वीडियो साक्ष्य होने का दावा
पाठा मुक्ति मोर्चा की ओर से यह भी दावा किया गया है कि पूरे मामले से संबंधित स्क्रीनशॉट, ऑडियो और वीडियो साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं। संगठन ने कहा कि यदि पुलिस प्रशासन निष्पक्ष जांच करे तो सच्चाई सामने आ जाएगी।
मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर की गई टिप्पणियों और धमकियों के प्रमाण पुलिस को उपलब्ध कराए जाएंगे। उनका कहना है कि डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर लगातार मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश का आरोप
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ लोग जानबूझकर समाज में तनाव और वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। पाठा मुक्ति मोर्चा ने कहा कि संगठन हमेशा लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों में विश्वास करता है तथा सामाजिक न्याय की लड़ाई शांतिपूर्ण तरीके से लड़ता आया है।
संगठन का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। इसलिए प्रशासन को निष्पक्ष जांच करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पुलिस प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें
पाठा मुक्ति मोर्चा द्वारा पुलिस प्रशासन के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं। इनमें धमकी देने वाले आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, जातिसूचक टिप्पणी करने वालों पर एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है।
संगठन ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति को सामाजिक या राजनीतिक प्रभाव के कारण संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति संविधान और कानून का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है।
लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगी संघर्ष की लड़ाई
राष्ट्रीय अध्यक्ष लवकुश कुमार भारती ने स्पष्ट कहा कि पाठा मुक्ति मोर्चा आगे भी सामाजिक न्याय, जनहित और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि संगठन हमेशा कमजोर और वंचित वर्गों की आवाज उठाता रहेगा, चाहे इसके लिए कितनी भी चुनौतियों का सामना क्यों न करना पड़े।
उन्होंने यह भी कहा कि संगठन किसी प्रकार की हिंसा, वैमनस्य या सामाजिक विभाजन की राजनीति में विश्वास नहीं करता, बल्कि संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से समस्याओं के समाधान का पक्षधर है।
जिले में चर्चा का विषय बना मामला
सोशल मीडिया पोस्ट, राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के चलते यह मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक हलकों में भी इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कई लोगों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में छोटी बातों को भी तेजी से राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप दे दिया जाता है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई करे।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब पूरे मामले में लोगों की निगाहें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि निष्पक्ष जांच होती है तो मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है। वहीं, संगठन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आगे भी अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
चित्रकूट जैसे संवेदनशील सामाजिक और राजनीतिक वातावरण वाले जिले में इस प्रकार के विवाद प्रशासन के लिए भी चुनौती बन सकते हैं। ऐसे में पुलिस प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था बनाए रखने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की बड़ी जिम्मेदारी है।








