मोहम्मदी-पसगवां हाईवे पर दर्दनाक हादसा : सीओ की सरकारी गाड़ी से टक्कर में मामा-भांजे की मौत, मुआवजे के बाद हुआ अंतिम संस्कार
परिजनों ने शव रखने के बाद किया प्रदर्शन, पुलिस के आश्वासन और दो लाख रुपये मुआवजे पर माने ग्रामीण
मनदीप पाल की रिपोर्ट
हरदोई जिले के मोहम्मदी-पसगवां हाईवे पर शनिवार सुबह हुआ दर्दनाक सड़क हादसा पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना रहा। इस हादसे में बाइक सवार मामा-भांजे की मौत के बाद गांव में आक्रोश फैल गया। घटना इतनी संवेदनशील हो गई कि गांव में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात करनी पड़ी। परिजनों ने शवों का अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया और प्रशासन से भारी मुआवजे के साथ दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे।
करीब दो दिन तक चले तनाव और बातचीत के बाद सोमवार को प्रशासन के आश्वासन तथा दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलने पर परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।
हाईवे पर हुआ दर्दनाक हादसा
जानकारी के अनुसार, हरदोई जिले के मोहम्मदी-पसगवां हाईवे पर शनिवार सुबह करीब 11 बजे एक तेज रफ्तार सरकारी वाहन और बाइक की आमने-सामने की टक्कर हो गई। बताया जा रहा है कि यह वाहन मोहम्मदी क्षेत्राधिकारी (सीओ) की सरकारी गाड़ी थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार दोनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे में अनावा गांव निवासी रामऔतार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद जय जय राम को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। इलाज के दौरान जय जय राम ने भी दम तोड़ दिया। दोनों के रिश्ते मामा-भांजे के बताए जा रहे हैं।
घटना के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाने की कार्रवाई शुरू की गई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
गांव में पसरा मातम, परिजनों में फूटा गुस्सा
दो लोगों की मौत की खबर गांव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। परिजनों ने आरोप लगाया कि हादसा सरकारी वाहन की लापरवाही के कारण हुआ है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
गुस्साए ग्रामीणों ने शवों का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक प्रशासन स्पष्ट कार्रवाई और उचित मुआवजा नहीं देगा, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
स्थिति को बिगड़ता देख प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने का प्रयास किया। गांव में तनाव को देखते हुए एहतियातन कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई ताकि कोई अप्रिय घटना न हो सके।
20 लाख रुपये मुआवजे की उठी मांग
मृतकों के परिजनों ने प्रशासन के सामने 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग रखी। साथ ही सरकारी वाहन चालक और जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की गई।
ग्रामीणों का कहना था कि यदि हादसा किसी सामान्य व्यक्ति की गाड़ी से हुआ होता तो तत्काल कार्रवाई की जाती, लेकिन सरकारी वाहन होने के कारण मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
परिवार के लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं ले रही थी। इसी वजह से गांव के लोगों में नाराजगी और बढ़ती चली गई।
संभ्रांत लोगों और पुलिस अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
स्थिति को शांत कराने के लिए पुलिस अधिकारियों के साथ गांव के संभ्रांत लोगों ने भी पहल की। लगातार बातचीत और समझाइश के जरिए माहौल को सामान्य बनाने की कोशिश की गई।
पासगवां कोतवाल ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि मामले में निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी। साथ ही प्रशासन की ओर से आर्थिक सहायता दिलाने का भी आश्वासन दिया गया।
काफी देर तक चली बातचीत के बाद आखिरकार दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी। प्रशासन की ओर से दो लाख रुपये की सहायता राशि देने तथा निष्पक्ष जांच कराने के भरोसे पर परिजन मान गए।
सोमवार को हुआ अंतिम संस्कार
करीब दो दिन तक चले गतिरोध के बाद सोमवार सुबह लगभग 10 बजे दोनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। गांव में भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
हालांकि ग्रामीणों में अभी भी घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सड़क हादसों में लगातार बढ़ती लापरवाही पर सख्त नियंत्रण जरूरी है, खासकर जब सरकारी वाहन शामिल हों।
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और दुर्घटना के लिए कौन जिम्मेदार है, इसकी जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मृतकों के परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं स्थानीय लोग चाहते हैं कि इस मामले में पारदर्शी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सड़क हादसों पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लगातार सड़क हादसों की घटनाएं सामने आ रही हैं। तेज रफ्तार, लापरवाही और नियमों की अनदेखी के कारण आए दिन लोगों की जान जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी और निजी दोनों वाहनों के लिए सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाना बेहद जरूरी है। साथ ही दुर्घटनाओं के मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई भी लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए आवश्यक है।








