बकरीद पर पशु बलि को लेकर फिर गरमाई बहस, यतींद्रानंद गिरी ने उठाए सख्त सवाल
UCC, बहुविवाह और घुसपैठ पर भी बोले महामंडलेश्वर, कहा- “भारत कोई धर्मशाला नहीं”
अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
हरदोई। बकरीद के मौके पर होने वाली पशु बलि को लेकर एक बार फिर धार्मिक और सामाजिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है। जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी ने हरदोई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बकरीद पर होने वाली पशु हिंसा का कड़ा विरोध करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से इस विषय पर सख्त कानून बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में त्योहार के नाम पर बेजुबान जानवरों की हत्या को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
महामंडलेश्वर ने अपने संबोधन में समान नागरिक संहिता (UCC), बहुविवाह पर रोक, अवैध घुसपैठ और घर वापसी जैसे मुद्दों पर भी खुलकर अपनी राय रखी। उनके बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
“त्योहार के नाम पर हिंसा स्वीकार्य नहीं”
स्वामी यतींद्रानंद गिरी ने कहा कि बकरीद के दौरान लाखों पशुओं की बलि दी जाती है, जिसे लेकर समाज को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब छोटे स्तर पर पशुओं या जीवों के साथ होने वाले व्यवहार पर कानून सख्ती दिखाता है, तब बड़े पैमाने पर होने वाली पशु बलि पर चुप्पी समझ से परे है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मदारी, सपेरे या पशुओं का प्रदर्शन करने वाले लोगों पर कार्रवाई हो सकती है, तो फिर त्योहारों के नाम पर होने वाली पशु हत्या पर चर्चा क्यों नहीं होती। उन्होंने कहा कि इंसान को अपनी बुराइयों, अहंकार और गलत आदतों की बलि देनी चाहिए, न कि बेजुबान जानवरों की।
महामंडलेश्वर के इस बयान को लेकर कई लोगों ने समर्थन जताया, जबकि कुछ संगठनों ने इसे धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप करार दिया। हालांकि यतींद्रानंद गिरी ने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पशु हिंसा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना है।
समान नागरिक संहिता पर जताया समर्थन
अपने संबोधन के दौरान स्वामी यतींद्रानंद गिरी ने असम सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता और बहुविवाह पर नियंत्रण की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश में एक समान कानून व्यवस्था लागू होना समय की मांग है।
उन्होंने असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे फैसले समाज में समानता, अनुशासन और न्याय की भावना को मजबूत करेंगे। उनके अनुसार, अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग कानून होने से सामाजिक संतुलन प्रभावित होता है और इससे कई प्रकार की जटिलताएं पैदा होती हैं।
महामंडलेश्वर ने कहा कि समान नागरिक संहिता केवल कानूनी सुधार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर रोक लगना महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की दृष्टि से भी जरूरी है।
घुसपैठ के मुद्दे पर कांग्रेस पर साधा निशाना
यतींद्रानंद गिरी ने अपने भाषण में अवैध घुसपैठ के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों के दौरान असम और सीमावर्ती राज्यों में बड़े पैमाने पर अवैध घुसपैठ को बढ़ावा मिला।
उन्होंने कहा कि रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर भेजा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, अवैध रूप से देश में रहने वाले लोग राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन दोनों के लिए चुनौती बन सकते हैं।
महामंडलेश्वर ने कहा कि भारत भारतीयों का देश है और यहां की संस्कृति, परंपराओं तथा कानूनों का सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि सीमाओं की सुरक्षा और नागरिकता से जुड़े मामलों में सरकार को और अधिक सख्ती बरतनी चाहिए।
पाकिस्तान में बदले जा रहे नामों पर दी प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान में कुछ स्थानों के नाम ‘कृष्ण नगर’ और ‘कृष्ण जैन चौक’ किए जाने की खबरों पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। स्वामी यतींद्रानंद गिरी ने इसे सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि यह सांस्कृतिक परिवर्तन और ऐतिहासिक पहचान की ओर लौटने का प्रतीक माना जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि पड़ोसी देशों में भी इसके कई ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं।
‘घर वापसी’ को बताया सांस्कृतिक पुनर्जागरण
महामंडलेश्वर ने अपने संबोधन में यह भी दावा किया कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और भारत के अनेक मुसलमानों के पूर्वज मूल रूप से हिंदू थे, जिनका अतीत में धर्म परिवर्तन कराया गया।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी मूल संस्कृति और परंपरा की ओर लौटना चाहता है, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने ‘घर वापसी’ को सांस्कृतिक पुनर्जागरण की संज्ञा देते हुए कहा कि यह किसी पर दबाव डालने का विषय नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आस्था और पहचान का मामला है।
हालांकि इस तरह के बयान पहले भी विवाद का कारण बनते रहे हैं और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।
सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
यतींद्रानंद गिरी के बयान ऐसे समय में सामने आए हैं, जब देश में समान नागरिक संहिता, जनसंख्या नियंत्रण, घुसपैठ और धार्मिक परंपराओं जैसे मुद्दों पर बहस लगातार तेज हो रही है। उनके बयान को कुछ लोग सामाजिक सुधार और सांस्कृतिक संरक्षण से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि विरोधी पक्ष इसे ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा बता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान आगामी राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी बकरीद को लेकर सुरक्षा और कानून व्यवस्था के मद्देनजर सतर्कता बढ़ाई जा रही है।
हरदोई में स्वामी यतींद्रानंद गिरी द्वारा दिए गए बयान ने कई संवेदनशील मुद्दों को एक साथ चर्चा के केंद्र में ला दिया है। पशु बलि से लेकर समान नागरिक संहिता, बहुविवाह, घुसपैठ और घर वापसी जैसे विषयों पर उनकी टिप्पणियों ने समर्थकों और विरोधियों दोनों के बीच नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।








