विकास के नाम पर लूट का साम्राज्य! चर्चित सचिव के फर्जीवाड़े की परतें खुलनी शुरू
सरकारी धन पर डाका या सिस्टम की मिलीभगत? पंचायतों में मचा हड़कंप
संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट। पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता और विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जनपद के मानिकपुर ब्लॉक में तैनात एक चर्चित सचिव पर विकास योजनाओं में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सामने आ रहे हैं। ग्राम पंचायतों में सड़क, नाली, पेयजल, सफाई और टैंकर संचालन जैसे कार्यों के नाम पर कथित तौर पर ऐसा खेल खेला गया, जिसने ग्रामीणों और ग्राम प्रधानों दोनों को परेशान कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों का रिकॉर्ड कागजों में पूरा दिखाया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। कहीं निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं तो कहीं ऐसे कार्यों का भुगतान तक कर दिया गया, जो वास्तव में हुए ही नहीं। आरोप है कि चर्चित सचिव ने अपने प्रभाव और विभागीय पकड़ का इस्तेमाल करते हुए लंबे समय से पंचायत व्यवस्था को निजी नेटवर्क की तरह संचालित किया और सरकारी योजनाओं को कमाई का जरिया बना दिया।
मानिकपुर ब्लॉक की पंचायतों में बढ़ती नाराजगी
मानिकपुर ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों में अब सचिव के खिलाफ असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। कई ग्राम प्रधानों का आरोप है कि पंचायत से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले बिना उनकी सहमति के लिए गए और विकास योजनाओं के नाम पर मनमानी तरीके से फाइलें तैयार की गईं।
ग्राम प्रधानों का कहना है कि सचिव ने कई जगहों पर कार्यों की लागत बढ़ाकर दिखाई, जबकि मौके पर वास्तविक काम बेहद कम हुआ। कुछ पंचायत प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि कोई प्रधान सवाल उठाता था तो उसे प्रशासनिक दबाव का सामना करना पड़ता था।
ग्रामीणों के बीच भी यह चर्चा तेज है कि पंचायत निधि का सही उपयोग नहीं हुआ। गांवों में पेयजल, जलनिकासी और सड़क जैसी मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में विकास कार्य पूर्ण दर्शाए जा चुके हैं। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
टैंकर संचालन में भी बड़ा खेल होने के आरोप
मानिकपुर ब्लॉक में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा टैंकर संचालन को लेकर हो रही है। आरोप है कि गर्मी और पेयजल संकट के दौरान पानी सप्लाई के नाम पर बड़े स्तर पर फर्जी बिल तैयार किए गए। कई गांवों में ऐसे टैंकरों का भुगतान दिखाया गया जो कथित रूप से मौके पर पहुंचे ही नहीं।
ग्रामीणों का दावा है कि जिन दिनों रिकॉर्ड में कई-कई चक्कर पानी सप्लाई दर्शाई गई, उन दिनों गांवों में लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान होना पड़ा। आरोप यह भी है कि कुछ निजी वाहनों को टैंकर बताकर भुगतान निकाला गया, जबकि वास्तविक उपयोग बेहद सीमित रहा।
यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो पंचायत विभाग में बड़ा खुलासा सामने आ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक पंचायत तक सीमित मामला नहीं बल्कि कई ग्राम पंचायतों में एक जैसी कार्यप्रणाली अपनाई गई।
कागजों में विकास, जमीन पर अधूरे काम
ग्राम पंचायतों में हुए विकास कार्यों को लेकर सबसे गंभीर सवाल गुणवत्ता और वास्तविकता पर उठ रहे हैं। कई स्थानों पर नाली निर्माण अधूरा है, इंटरलॉकिंग उखड़ चुकी है और सफाई व्यवस्था बदहाल बनी हुई है।
इसके बावजूद विभागीय अभिलेखों में भुगतान पूर्ण दिखाया गया है। आरोप है कि मस्टर रोल, माप पुस्तिका और बिल वाउचर तैयार कर सरकारी धन निकाला गया, जबकि कार्यों की गुणवत्ता बेहद खराब रही।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों में विकास की तस्वीर केवल कागजों तक सीमित रह गई है। योजनाओं के नाम पर बजट तो आया, लेकिन उसका लाभ जनता तक पूरी तरह नहीं पहुंचा। यही वजह है कि अब लोग पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
विभागीय संरक्षण की भी उठ रही चर्चा
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि चर्चित सचिव को विभागीय संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण अब तक उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी। आरोप है कि कई शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचीं, लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया।
कुछ पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि सचिव का नेटवर्क इतना मजबूत है कि शिकायतकर्ताओं को ही परेशान किया जाता है। यही कारण है कि कई लोग खुलकर सामने आने से बचते रहे। हालांकि अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं और कई ग्राम प्रधान तथा ग्रामीण सबूतों के साथ सामने आने की तैयारी कर रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में कई दस्तावेज, भुगतान विवरण और जमीनी तस्वीरें सार्वजनिक हो सकती हैं, जिनसे पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।
जांच हुई तो खुल सकते हैं कई बड़े राज
पंचायत विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि पूरे मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। विशेष रूप से टैंकर संचालन, निर्माण कार्यों के भुगतान और पंचायत निधि के उपयोग की जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित ग्राम पंचायतों का सोशल ऑडिट कराया जाए और कार्यों की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध हो, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि गांवों के विकास के लिए आने वाला धन यदि इसी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता रहा तो ग्रामीण क्षेत्रों का वास्तविक विकास कभी संभव नहीं हो पाएगा।








