महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर, 1.12 लाख को ‘लखपति दीदी’ बनाने की तैयारी
स्वयं सहायता समूहों के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में जुटा एनआरएलएम
राम कीर्ति यादव की रिपोर्ट
जौनपुर में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने बड़ा कदम उठाया है। जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर उन्हें “लखपति दीदी” बनाने की व्यापक योजना तैयार की गई है। इस अभियान के तहत करीब 1 लाख 12 हजार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि वे अपनी मेहनत और हुनर के बल पर सम्मानजनक आय अर्जित कर सकें।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल अब तेजी पकड़ रही है। प्रशासन का मानना है कि यदि महिलाओं को सही प्रशिक्षण, संसाधन और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकती हैं।
कौशल प्रशिक्षण से बदलेगी महिलाओं की जिंदगी
एनआरएलएम की इस योजना के अंतर्गत उन महिलाओं को विशेष जिम्मेदारी दी जा रही है जो पहले से सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण या अन्य घरेलू उद्योगों में दक्ष हैं। ऐसी महिलाएं अब “मास्टर ट्रेनर” के रूप में काम करेंगी और गांव-गांव जाकर अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देंगी।
योजना का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि महिलाओं को स्थायी आय के साधन उपलब्ध कराना भी है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने, उत्पाद तैयार करने, उनकी पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच बनाने की जानकारी भी दी जाएगी। इससे महिलाएं घर बैठे अपनी आय बढ़ाने में सक्षम हो सकेंगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं ऐसी हैं जिनमें हुनर तो है, लेकिन अवसर और मार्गदर्शन की कमी के कारण वे आर्थिक रूप से आगे नहीं बढ़ पातीं। एनआरएलएम अब इसी अंतर को खत्म करने का प्रयास कर रहा है।
हर महीने 10 से 12 हजार आय का लक्ष्य
उपायुक्त एनआरएलएम जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार “लखपति दीदी” योजना का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को इस स्तर तक सक्षम बनाना है कि वे हर महीने कम से कम 10 से 12 हजार रुपये की नियमित आय अर्जित कर सकें। उनका कहना है कि यह केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाने का अभियान है।
उन्होंने बताया कि समूहों के माध्यम से महिलाओं को बैंकिंग व्यवस्था, बचत, ऋण प्रबंधन और छोटे उद्योगों के संचालन की भी जानकारी दी जा रही है। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ आर्थिक निर्णय लेने में भी सक्षम होंगी।
एनआरएलएम अधिकारियों का मानना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी तो उनके परिवारों की स्थिति भी सुधरेगी। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक स्तर पर इसका सकारात्मक असर दिखाई देगा।
जौनपुर में सक्रिय हैं 19 हजार स्वयं सहायता समूह
जौनपुर जनपद में वर्तमान समय में लगभग 19 हजार स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। इन समूहों से करीब ढाई लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। बीते कुछ वर्षों में स्वयं सहायता समूहों ने गांवों में महिलाओं के बीच बचत और सामूहिक कार्य संस्कृति को मजबूत किया है।
कई समूह पहले से ही अगरबत्ती निर्माण, मसाला पैकिंग, डेयरी, सिलाई-कढ़ाई, पापड़ निर्माण और खाद्य उत्पादों के छोटे कारोबार से जुड़े हुए हैं। अब “लखपति दीदी” योजना के जरिए इन गतिविधियों को और व्यवस्थित तथा व्यापक बनाया जाएगा।
पूर्व में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी कई महिलाएं अब दूसरी महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ने का काम करेंगी। इससे गांवों में स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर तैयार होंगे और महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
महिलाओं में बढ़ रहा आत्मविश्वास
ग्रामीण क्षेत्रों में यह योजना केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं में आत्मविश्वास और सामाजिक पहचान भी विकसित कर रही है। पहले जो महिलाएं घरों तक सीमित थीं, वे अब समूह बैठकों में भाग ले रही हैं, बैंकिंग कार्य संभाल रही हैं और छोटे व्यवसाय चला रही हैं।
कई गांवों में महिलाओं ने मिलकर सामूहिक उत्पादन इकाइयां शुरू की हैं। कुछ समूह स्कूल ड्रेस सिलाई का कार्य कर रहे हैं तो कुछ महिलाएं स्थानीय बाजारों में घरेलू उत्पाद बेचकर अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में ये महिलाएं ग्रामीण विकास की नई पहचान बनेंगी।
गांवों में मजबूत किए जा रहे स्वयं सहायता समूह
एनआरएलएम के तहत गांवों में स्वयं सहायता समूहों को और मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। महिलाओं को नियमित बैठक, बचत, ऋण वापसी और सामूहिक उद्यम संचालन के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
इसके साथ ही महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें स्वरोजगार योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से पलायन जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी और गांवों में स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि “लखपति दीदी” योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा। महिलाओं की आय बढ़ने से गांवों में खरीद क्षमता बढ़ेगी और छोटे कारोबारों को भी लाभ मिलेगा।
जौनपुर में शुरू की गई यह पहल अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के सपनों को नई उड़ान देने वाला अभियान बनती जा रही है। प्रशासन और स्वयं सहायता समूहों की संयुक्त कोशिशों से आने वाले समय में हजारों महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर समाज में नई पहचान कायम कर सकती हैं।








