अखिलेश के तंज पर राजभर का पलटवार, बोले— “सुभासपा ज्वाइन कर लीजिए, मंत्री बनवा दूंगा”
अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav द्वारा योगी सरकार में नए मंत्रियों के विभागों के बंटवारे में हो रही देरी पर सवाल उठाने के बाद अब कैबिनेट मंत्री Om Prakash Rajbhar ने तीखा पलटवार किया है। राजभर ने भोजपुरी अंदाज में सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव पर व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर निशाना साधा। इतना ही नहीं, उन्होंने व्यंग्य करते हुए सपा प्रमुख को अपनी पार्टी सुभासपा ज्वाइन करने का ऑफर तक दे डाला।
मंत्रिमंडल विस्तार पर सपा का हमला
दरअसल, उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नए मंत्रियों के विभागों के बंटवारे में देरी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। इसी मुद्दे पर अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि अब क्या मंत्रियों के विभागों की “पर्ची” भी ऊपर से आएगी? उन्होंने दावा किया कि विभागों के बंटवारे में हो रही देरी दरअसल “कमीशन और कमाई” के बंटवारे को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान का नतीजा है।
सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि डबल इंजन सरकार के दोनों इंजन अब आपस में टकराने लगे हैं और यही वजह है कि निर्णय लेने में देरी हो रही है। अखिलेश यादव के इस बयान को भाजपा नेताओं ने राजनीतिक हमला बताते हुए जवाब देना शुरू कर दिया।
राजभर ने भोजपुरी अंदाज में साधा निशाना
इसी कड़ी में ओम प्रकाश राजभर ने बेहद आक्रामक अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि अखिलेश यादव के परिवार में अभी शोक का माहौल है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें राजनीति की चिंता ज्यादा सता रही है।
राजभर ने लिखा कि वह अब तक अखिलेश यादव के पारिवारिक दुख को देखते हुए उनकी राजनीति पर टिप्पणी करने से बच रहे थे, लेकिन सपा प्रमुख लगातार राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “परिवार की गमी के बीच भी राजनीति सूझ रही है”, जिससे यह साफ लगता है कि सत्ता की लालसा उनके ऊपर हावी है।
कैबिनेट मंत्री ने अपने पोस्ट में कहा कि अखिलेश यादव को कम से कम तेरहवीं तक इंतजार करना चाहिए था और उसके बाद राजनीतिक बयानबाजी करनी चाहिए थी। राजभर ने लिखा कि “कुछ आप हमें कह लीजिएगा, कुछ हम आपको सुनाएंगे”, लेकिन इस समय इस तरह की राजनीति उचित नहीं है।
“सुभासपा ज्वाइन कर लीजिए, मंत्री बनवा दूंगा”
राजभर के बयान का सबसे चर्चित हिस्सा वह रहा, जिसमें उन्होंने व्यंग्य करते हुए अखिलेश यादव को अपनी पार्टी में शामिल होने का न्योता दे दिया। उन्होंने लिखा कि यदि अखिलेश यादव को विभागों को लेकर इतनी ही चिंता है तो वह सुभासपा ज्वाइन कर लें। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से झगड़ा करके भी उन्हें मंत्री बनवा देंगे।
राजभर ने लिखा— “बेगाने मंत्रिमंडल में अखिलेश दीवाना”, जो अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान सिर्फ व्यंग्य नहीं बल्कि भाजपा और सहयोगी दलों की ओर से विपक्ष को जवाब देने की रणनीति का हिस्सा भी है।
यूपी की राजनीति में बढ़ी तल्खी
लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। समाजवादी पार्टी जहां भाजपा सरकार पर प्रशासनिक फैसलों में देरी और आंतरिक मतभेदों के आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल विपक्ष पर अवसरवादी राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं।
ओम प्रकाश राजभर अपने बेबाक और आक्रामक बयानों के लिए पहले भी चर्चा में रहे हैं। वह अक्सर भोजपुरी और पूर्वांचली शैली में राजनीतिक तंज कसते हैं, जिससे उनके बयान तेजी से वायरल हो जाते हैं। इस बार भी उनका बयान सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और समर्थक तथा विरोधी दोनों ही इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
राजनीतिक संदेश भी छिपा
विशेषज्ञों का मानना है कि राजभर के इस बयान में केवल तंज ही नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी छिपा हुआ है। भाजपा गठबंधन यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि सरकार में किसी प्रकार का कोई संकट नहीं है और विपक्ष केवल भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी इसे सरकार के भीतर असमंजस और समन्वय की कमी का संकेत बता रही है। मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बंटवारे को लेकर जारी यह सियासी बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
राजभर और अखिलेश यादव के बीच हुई इस जुबानी जंग ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है। एक ओर भाजपा समर्थक राजभर के बयान को “करारा जवाब” बता रहे हैं, वहीं विपक्षी समर्थक इसे व्यक्तिगत टिप्पणी करार दे रहे हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति अब केवल नीतियों और योजनाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए बयानबाजी और तंज भी राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं।








